- त्योहार-सहालग में बढ़ेगा सोने-चांदी का कारोबार, साइबर ठगी की रकम से भुगतान होने पर बैंक खाता हो सकता है होल्ड या फ्रीज; ग्राहक की KYC, भुगतानकर्ता और बैंक खाते का मिलान जरूरी
भारत 19
कानपुर। त्योहारों के साथ अब सहालग का सीजन भी शुरू होने वाला है। इस दौरान सोने-चांदी के आभूषणों की खरीदारी बढ़ने से सराफा बाजार में कारोबार तेज होगा। ग्राहकों की बढ़ती संख्या और बड़ी रकम के लेन-देन के बीच साइबर ठगी से जुड़े भुगतान का जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे में सराफा कारोबारियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ग्राहक सोना-चांदी खरीदकर भुगतान किसी तीसरे व्यक्ति के बैंक खाते या यूपीआई से कराता है और बाद में पता चलता है कि उस खाते से भेजी गई रकम साइबर ठगी से जुड़ी थी, तो कारोबारी का बैंक खाता भी होल्ड या फ्रीज हो सकता है। उसे पुलिस की जांच का सामना भी करना पड़ सकता है।
ग्राहक और भुगतानकर्ता एक ही व्यक्ति हो
ऑल इंडिया ज्वेल्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि त्योहार और सहालग के दौरान सराफा कारोबारियों को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ग्राहकों की भीड़ और ज्यादा कारोबार के बीच किसी भुगतान की जांच में लापरवाही भारी पड़ सकती है। जिस व्यक्ति के नाम पर बिल बन रहा है और जो आभूषण लेकर जा रहा है, भुगतान भी उसी व्यक्ति के बैंक खाते से होना चाहिए। किसी तीसरे व्यक्ति के खाते से भुगतान आने पर कारोबारी को बिना जांच के माल नहीं देना चाहिए।
तीसरे खाते से भुगतान पर सामान न दें
सराफा कारोबारियों को यह नियम बनाना चाहिए कि ग्राहक के बजाय किसी दोस्त, रिश्तेदार, पार्टनर या अन्य व्यक्ति के खाते से भुगतान आने पर सामान न दिया जाए। ग्राहक कितना भी पुराना या भरोसेमंद क्यों न हो, बड़ी रकम के लेन-देन में भुगतानकर्ता और सामान लेने वाले की पहचान एक ही होनी चाहिए। यदि किसी तीसरे खाते से भुगतान आता है तो कारोबारी को भुगतानकर्ता की पहचान और ग्राहक से उसके संबंध की पुष्टि करनी चाहिए। पूरी जांच के बिना आभूषण सौंपने पर कारोबारी अनजाने में साइबर ठगी से जुड़े धन के लेन-देन में फंस सकता है।
साइबर ठगी की रकम से भुगतान पर फ्रीज हो सकता है खाता
यदि किसी ग्राहक के आभूषण की कीमत का भुगतान ऐसे बैंक खाते या यूपीआई से किया गया है, जिसका संबंध साइबर ठगी की रकम से निकलता है, तो उस लेन-देन की जांच में कारोबारी भी शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में कारोबारी का बैंक खाता होल्ड या फ्रीज किया जा सकता है। साथ ही भुगतान के स्रोत और लेन-देन से जुड़े दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। इसलिए बड़ी रकम के लेन-देन में केवल रकम खाते में आने की पुष्टि करना ही पर्याप्त नहीं है। ग्राहक, भुगतानकर्ता, बिल और भुगतान खाते के बीच संबंध स्पष्ट होना भी जरूरी है।
KYC और मोबाइल नंबर की जांच जरूरी
बड़े लेन-देन में ग्राहक की पहचान से जुड़े दस्तावेज लेकर उनका मिलान किया जाए। ग्राहक का मोबाइल नंबर भी बिल और कारोबारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। जरूरत पड़ने पर ग्राहक के सामने उसी नंबर पर फोन कर यह भी देखा जा सकता है कि नंबर उसी व्यक्ति के पास है या नहीं। इससे गलत पहचान के जरिए होने वाले लेन-देन का जोखिम कम किया जा सकता है।
स्क्रीनशॉट नहीं, खाते में रकम आने पर दें माल
यूपीआई भुगतान का स्क्रीनशॉट देखकर आभूषण देने से बचना चाहिए। कारोबारी अपने बैंक खाते में रकम जमा होने की पुष्टि करने के बाद ही सामान सौंपें। ग्राहक के मोबाइल पर दिख रहा भुगतान संदेश या स्क्रीनशॉट अपने आप में पर्याप्त प्रमाण नहीं है। खासकर बड़ी रकम के लेन-देन में कर्मचारी केवल ग्राहक के मोबाइल पर दिखाई दे रहे भुगतान संदेश के आधार पर सामान न सौंपें। बैंक खाते में वास्तविक क्रेडिट की पुष्टि करना जरूरी है।
त्योहार-सहालग में भुगतान जांच पर विशेष ध्यान
त्योहारों और सहालग में सोने की खरीदारी बढ़ने के साथ दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ भी बढ़ती है। इस दौरान कर्मचारी जल्दी में भुगतान की जांच न छोड़ें। बड़ी रकम के लेन-देन में ग्राहक की पहचान, बिल, भुगतानकर्ता और बैंक खाते का मिलान जरूर किया जाए। किसी भी तरह का संदेह होने पर सौदा रोकना बेहतर है। कारोबारियों को अपने कर्मचारियों को भी तीसरे खाते से भुगतान, संदिग्ध यूपीआई लेन-देन और फर्जी भुगतान स्क्रीनशॉट जैसे मामलों को लेकर स्पष्ट निर्देश देने की सलाह दी गई है।
साइबर ठगी का शक हो तो 1930 पर शिकायत
यदि भुगतान का तरीका संदिग्ध लगे या किसी लेन-देन में साइबर ठगी का संदेह हो तो तत्काल भुगतान रोककर साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दी जा सकती है। कारोबारियों को अपने कर्मचारियों को भी इन सावधानियों के बारे में जानकारी देने की सलाह दी गई है।
पंकज अरोड़ा ने कारोबारियों को किया अलर्ट
पंकज अरोड़ा ने कहा, “त्योहार और सहालग सराफा कारोबार के लिए सबसे व्यस्त समय होते हैं। इस दौरान कारोबार बढ़ने के साथ साइबर ठगी का जोखिम भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमारी अपील है कि कारोबारी ग्राहक की पहचान और भुगतानकर्ता का मिलान जरूर करें। तीसरे व्यक्ति के खाते से भुगतान आने पर बिना पूरी जांच के सोना-चांदी न दें। कुछ मिनट की सावधानी बैंक खाते और पूरे कारोबार को बड़ी परेशानी से बचा सकती है।


