- गोपालपुरम और जरौली फेज-2 में राहत-बचाव शुरू, भौती-पनका पुल पर आवागमन बंद; बाढ़ आश्रय स्थल पर 400 लोगों के लिए कम्युनिटी किचन चालू
भारत 19
कानपुर। पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से गुरुवार को गोपालपुरम और जरौली फेज-2 के निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। जलभराव के बीच करीब 25 परिवारों के फंसे होने की सूचना पर एनडीआरएफ को राहत-बचाव के लिए उतारा गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। प्रशासन और पुलिस की टीमें भी प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
निचले इलाकों में बढ़ा पानी, NDRF ने संभाला मोर्चा
पांडु नदी का पानी बढ़ने से गोपालपुरम और जरौली फेज-2 के निचले हिस्सों में जलभराव की स्थिति बनी। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए एनडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया गया। इससे पहले बुधवार देर रात संयुक्त मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह और तहसीलदार सदर विनय द्विवेदी ने जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए राहत किट की भी व्यवस्था कराई गई है।
पांडु का पानी पुल के ऊपर पहुंचा, रास्ता बंद
ग्राम पनका बहादुर नगर में भौती-पनका संपर्क मार्ग के पुल के ऊपर से पांडु नदी का पानी बहने लगा। पानी का बहाव बढ़ने और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने पुल पर बैरिकेडिंग कराकर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया। स्थानीय पुलिस को पुल पर निगरानी रखने और किसी भी व्यक्ति को वहां से आवागमन की अनुमति नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं। इससे आसपास के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
बाढ़ आश्रय स्थल में 400 लोगों के लिए भोजन
जलभराव वाले क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए निकट स्थित श्री विशम्भर नाथ ठाकुर इंटर कॉलेज को बाढ़ आश्रय स्थल बनाया गया है। यहां प्रभावित लोगों के लिए कम्युनिटी किचन शुरू कर दिया गया है। प्रशासन के अनुसार कम्युनिटी किचन में रोजाना करीब 400 लोगों के लिए भोजन तैयार कराया जा रहा है। जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मायापुरम और रविदासपुरम का भी निरीक्षण
उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य रमेश चंद्र कुंडे ने मायापुरम और रविदासपुरम के जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने जलभराव वाले क्षेत्रों में रह रहे लोगों से सुरक्षा के मद्देनजर बाढ़ आश्रय स्थल में जाने की अपील की। प्रशासन का कहना है कि पांडु नदी के जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।


