- बाजार विकास के नाम पर सहयोग राशि लेने पर आपत्ति, अध्यक्ष-प्रधान सचिव से मांगा स्पष्टीकरण
भारत 19
कानपुर। कानपुर कपड़ा कमेटी में सहयोग राशि जुटाने की प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर अंदरूनी विवाद सामने आया है। कमेटी के कई पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों ने बाजार के विकास के नाम पर व्यापारियों से ली गई राशि को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वाटर कूलर, शव वाहन समेत अन्य कार्यों के लिए सहयोग राशि जुटाने से पहले संबंधित प्रस्ताव कार्यकारिणी की बैठक में एजेंडे के रूप में नहीं रखा गया। पदाधिकारियों ने 30 सितंबर को अध्यक्ष और प्रधान सचिव को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।
20 सितंबर की आमसभा के बाद सामने आया मामला
पदाधिकारियों की ओर से भेजे गए पत्र के मुताबिक, 20 सितंबर को कमेटी की आमसभा आयोजित हुई थी। इसमें वार्षिक एजेंडे के विषयों के साथ बाजार से प्राप्त सहयोग राशि का विवरण भी सदस्यों के सामने रखा गया। पत्र में आरोप लगाया गया है कि वाटर कूलर, शव वाहन आदि के नाम पर बाजार से लाखों रुपये की राशि एकत्र की गई, जबकि इन कार्यों से जुड़े प्रस्ताव पहले कार्यकारिणी की बैठक के एजेंडे में शामिल नहीं किए गए थे। सदस्यों का कहना है कि राशि जुटाने से पहले कार्यकारिणी में प्रस्ताव रखकर चर्चा और सहमति ली जानी चाहिए थी।
101 साल पुरानी संस्था की प्रक्रिया का दिया हवाला
पदाधिकारियों ने अपने पत्र में कमेटी की पुरानी कार्यप्रणाली का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि करीब 101 साल पुरानी कानपुर कपड़ा कमेटी में अलग-अलग मौकों पर व्यापारियों से सहयोग राशि जुटाई जाती रही है। पत्र के अनुसार, राम मंदिर, शताब्दी वर्ष, क्रिकेट मैच और कारगिल के जवानों से जुड़े अवसरों पर भी व्यापारियों से सहयोग लिया गया था। पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संबंधित विषय को कार्यकारिणी की बैठक के एजेंडे में शामिल किया जाता था और सदस्यों की सहमति के बाद ही राशि जुटाई जाती थी।
इस बार प्रक्रिया नहीं अपनाने का लगाया आरोप
पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि इस बार निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने इसे कमेटी के नियमों के विपरीत बताते हुए अध्यक्ष और प्रधान सचिव से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि इस मामले को लेकर आगे कोई कानूनी नोटिस या कार्रवाई होती है तो पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कार्यकारिणी सदस्यों को उसके लिए जिम्मेदार न माना जाए। संबंधित कार्रवाई और दायित्व की जिम्मेदारी अध्यक्ष पर होने की बात भी पत्र में कही गई है।
कई पदाधिकारियों के हस्ताक्षर से बढ़ी हलचल
पत्र पर कोषाध्यक्ष अशोक माहेश्वरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश कपूर समेत कई निदेशकों और कार्यकारिणी सदस्यों के हस्ताक्षर बताए गए हैं। एक साथ कई पदाधिकारियों के सामने आने से कमेटी के भीतर सहयोग राशि और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में अध्यक्ष या प्रधान सचिव की ओर से इन आरोपों पर दिया गया कोई विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए फिलहाल मामला पदाधिकारियों की आपत्ति और स्पष्टीकरण मांगने तक ही है।
अब जवाब पर टिकी निगाहें
कपड़ा कमेटी में उठे विवाद का केंद्र केवल सहयोग राशि नहीं, बल्कि कार्यकारिणी की स्वीकृति और संस्था की तय प्रक्रिया है। पदाधिकारियों ने जिस तरह लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई है, उससे आने वाले दिनों में कमेटी की बैठक और अध्यक्ष के जवाब पर नजर रहेगी। अध्यक्ष की ओर से इस पत्र का जवाब दिया जाता है या कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर कोई निर्णय होता है, तो विवाद की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।


