- नगर निगम सदन में गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की जानकारी पर बोले- शेर की मांद में अकेले क्यों गए, बल लेकर जाना चाहिए था
भारत 19
कानपुर। नगर निगम सदन में शनिवार को पार्षदों के बीच गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट के बाद भाजपा में विवाद और गहरा गया है। रविवार को घटना की जानकारी देने पहुंचे पार्षदों से कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने दो टूक कहा, “शेर की मांद में अकेले क्यों गए थे, बल लेकर यानी अपना भी इंतजाम लेकर जाना चाहिए था।” क्षेत्रीय अध्यक्ष की यह टिप्पणी अब नगर निगम के विवाद के साथ भाजपा के भीतर चल रही खींचतान के संदर्भ में भी चर्चा में है।
बागी पार्षदों ने क्षेत्रीय नेतृत्व के सामने रखा पक्ष
रविवार को पवन गुप्ता, आलोक पांडेय, भाजपा कौशलपुरी मंडल मंत्री मनीष त्रिपाठी और मंडल अध्यक्ष भानु क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। उन्होंने क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू और क्षेत्रीय प्रभारी शंकर लाल लोधी से मुलाकात कर शनिवार की घटना और उसके बाद नगर निगम कार्यालय में हुए घटनाक्रम की जानकारी दी। पवन गुप्ता को नगर निगम की भाजपा मेयर ने सदन से निष्कासित किया था। इसके बाद से वह लगातार मेयर और उनके पुत्र के नगर निगम के कार्यों में कथित अनुचित दखल के खिलाफ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक शिकायतें करते रहे हैं। इसी वजह से पार्टी के भीतर उन्हें “बागी पार्षद” कहा जाता रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से उन्हें आधिकारिक रूप से “बागी” घोषित किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
मनीष त्रिपाठी को पत्र रिसीव कराने भेजा था
पवन गुप्ता ने क्षेत्रीय पदाधिकारियों को बताया कि उन्होंने कौशलपुरी मंडल के मंत्री मनीष त्रिपाठी को नगर निगम कार्यालय में एक पत्र रिसीव कराने के लिए भेजा था। काफी देर तक मनीष के वापस नहीं आने पर वह खुद नगर निगम पहुंचे। पवन गुप्ता का आरोप है कि वहां बंटी और कुछ अन्य लोगों ने मनीष त्रिपाठी को जबरन बैठा रखा था। मनीष ने भी क्षेत्रीय नेतृत्व के सामने इसकी पुष्टि की। पवन गुप्ता के मुताबिक, विरोध करने पर उनके साथ हाथापाई की गई और आलोक पांडेय को भी धक्का देकर गिरा दिया गया।
चोरी का आरोप लगाकर पुलिस को सौंपा
पवन गुप्ता के अनुसार मनीष त्रिपाठी पर चोरी करने के लिए नगर निगम आने का आरोप लगाया गया और उन्हें स्वरूप नगर पुलिस को सौंप दिया गया। शोरगुल होने पर अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। पवन गुप्ता ने बताया कि उन्होंने आत्मदाह करने की चेतावनी दी, जिसके बाद पुलिस ने मनीष त्रिपाठी को छोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर रविवार को क्षेत्रीय नेतृत्व के सामने शिकायत दर्ज कराई गई।
“शेर की मांद में अकेले क्यों गए”
घटना की जानकारी दिए जाने के दौरान क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने पार्षदों से कहा, “शेर की मांद में अकेले क्यों गए थे, कुछ बल लेकर जाना चाहिए था।” इस पर पवन गुप्ता ने कहा कि वह पार्षद हैं और नगर निगम जाना उनके काम का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मनीष त्रिपाठी भी मंडल मंत्री हैं और अपने काम के सिलसिले में नगर निगम कार्यालय जा सकते हैं। क्षेत्रीय अध्यक्ष की टिप्पणी में इस्तेमाल “बल लेकर” और “इंतजाम” जैसे शब्द अब इस पूरे घटनाक्रम का प्रमुख संगठनात्मक संदर्भ बन गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी की ओर से इस तरह की सलाह को कार्यकर्ताओं को विवादित परिस्थितियों में अकेले न जाने और अपने स्तर पर सहयोग या सुरक्षा का इंतजाम रखने की बात के तौर पर देखा जा रहा है।
सुरक्षा की मांग, कहा- जरूरत हो तो इस्तीफा ले लें
बैठक में पवन गुप्ता, आलोक पांडेय और मनीष त्रिपाठी ने अपनी सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें जान का खतरा है। उन्होंने कहा कि यदि संगठन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता तो उनसे इस्तीफा ले लिया जाए। क्षेत्रीय पदाधिकारियों ने उनसे घटना से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा।
प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची शिकायत
क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है। उन्होंने संबंधित नेताओं से प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात रखने को कहा है। साहू ने कहा कि फिलहाल मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रकरण कोर ग्रुप के सामने रखा जाएगा और इसके बाद प्रदेश नेतृत्व को सूचना दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन में कार्रवाई करने का अधिकार प्रदेश नेतृत्व के पास है। पवन गुप्ता और मनीष त्रिपाठी ने कहा कि वे पूरे मामले की लिखित जानकारी जल्द संगठन को देंगे।


