Hot Topics

भारत में मांग बढ़ी, फिर भी सौर बिजली का इस्तेमाल रुका

– AP के मुताबिक 15 महीनों में 11 TWh सौर बिजली का कर्टेलमेंट; करीब एक करोड़ घरों को रोशन कर सकने वाली ऊर्जा ग्रिड और स्टोरेज की कमी से इस्तेमाल नहीं हो सकी

भारत 19
नई दिल्ली।
भारत में बिजली की मांग बढ़ रही है और सौर ऊर्जा क्षमता भी तेजी से विस्तार कर रही है। इसके बावजूद उपलब्ध सौर बिजली का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 महीनों में भारत ने करीब 11 टेरावाट-घंटे (TWh) सौर बिजली का कर्टेलमेंट किया। यह मात्रा करीब एक करोड़ घरों को बिजली देने के बराबर है।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि इसी अवधि में गर्मी और कमजोर मानसून के कारण बिजली की जरूरत बढ़ी। एयर कंडीशनर के बढ़ते इस्तेमाल और कृषि क्षेत्र में सिंचाई की जरूरत से बिजली की खपत बढ़ी, लेकिन ग्रिड उपलब्ध सौर ऊर्जा को पूरी तरह इस्तेमाल करने की स्थिति में नहीं था।

सौर बिजली का क्यों हुआ कर्टेलमेंट

कर्टेलमेंट का मतलब है कि सौर संयंत्र बिजली पैदा करने में सक्षम होने के बावजूद ग्रिड के निर्देश पर उत्पादन घटा या रोक देता है। ऐसा तब होता है जब ग्रिड में उस समय उपलब्ध बिजली को सुरक्षित तरीके से लेने, दूसरी जगह पहुंचाने या संतुलित करने की पर्याप्त क्षमता नहीं होती। दोपहर में सौर उत्पादन तेजी से बढ़ता है। इस दौरान ग्रिड को सौर बिजली के साथ दूसरे बिजली स्रोतों का भी संतुलन बनाए रखना पड़ता है। कोयला आधारित संयंत्रों को उत्पादन तेजी से घटाने और बाद में बढ़ाने में कठिनाई होती है। इससे अतिरिक्त सौर बिजली को ग्रिड में समाहित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ा दबाव

भारत में सौर उत्पादन का बड़ा हिस्सा पश्चिमी राज्यों में केंद्रित है। गुजरात और राजस्थान मिलकर देश की करीब आधी सौर क्षमता रखते हैं। दोपहर में यहां उत्पादन बढ़ने पर दूसरे राज्यों तक बिजली पहुंचाने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर दबाव बढ़ जाता है। AP के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में भारत अपने वार्षिक ट्रांसमिशन निर्माण लक्ष्यों का करीब 80 फीसदी ही हासिल कर पाया है। एक सौर या पवन परियोजना लगभग दो साल में तैयार हो सकती है, जबकि नई बड़ी ट्रांसमिशन लाइन बनाने में कम से कम तीन साल लग सकते हैं।

स्टोरेज की कमी भी बड़ी वजह

दूसरी बड़ी समस्या ऊर्जा भंडारण की है। सौर बिजली दिन में सबसे ज्यादा पैदा होती है, जबकि शाम और रात में भी बिजली की मांग बनी रहती है। पर्याप्त बैटरी स्टोरेज होने पर दोपहर की अतिरिक्त बिजली को जमा करके बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार के मुताबिक जुलाई में भारत के पास करीब 3 GW बैटरी स्टोरेज और 7.4 GW चालू पंप्ड-स्टोरेज क्षमता थी। 2032 तक देश की स्टोरेज जरूरत करीब 74 GW पहुंचने का अनुमान है।

बढ़ती सौर क्षमता के सामने नई चुनौती

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW स्वच्छ बिजली क्षमता हासिल करना है। लेकिन 11 TWh सौर बिजली का कर्टेलमेंट बताता है कि सिर्फ नई सौर परियोजनाएं लगाने से ऊर्जा संक्रमण पूरा नहीं होगा। उत्पादन क्षमता के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी स्टोरेज और लचीले ग्रिड का विस्तार भी जरूरी है। वरना सौर बिजली पैदा करने की क्षमता बढ़ती रहेगी, लेकिन उसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना मुश्किल होगा।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News