- बूथ सत्यापन बैठक में पदाधिकारियों की निष्क्रियता पर अनिल दीक्षित नाराज; कहा- पद नेम प्लेट लगाने के लिए नहीं, जमीन पर उतरकर जिम्मेदारी निभाएं
भारत 19
कानपुर। विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कानपुर उत्तर भाजपा में संगठन की जमीनी सक्रियता को लेकर जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित की नाराजगी खुलकर सामने आई। बूथ सत्यापन की तैयारी को लेकर मंगलवार को हुई बैठक में उन्होंने जिला पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्षों को दो टूक कहा कि पद सिर्फ नेम प्लेट लगाकर घर में बैठने के लिए नहीं मिला है। उन्होंने जिम्मेदारी संभालने वाले पदाधिकारियों से जमीन पर उतरकर संगठन का काम करने और बूथ स्तर पर अपनी भूमिका साबित करने को कहा। भाजपा की चुनावी रणनीति में बूथ को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। ऐसे में पदाधिकारियों की सक्रियता को लेकर जिलाध्यक्ष की नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बूथ सत्यापन में कागजी खानापूर्ति पर रोक
नवीन मार्केट स्थित भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में अनिल दीक्षित ने साफ कहा कि बूथ सत्यापन महज कागजी प्रक्रिया पूरी करने का अभियान नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य बूथ स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति का पता लगाना और कमजोरियों को दूर करना है। उन्होंने पदाधिकारियों और मंडल अध्यक्षों को क्षेत्र में जाकर बूथ कमेटियों की स्थिति परखने के निर्देश दिए। केवल रिपोर्ट तैयार कर देने के बजाय यह देखना होगा कि कमेटियों में दर्ज कार्यकर्ता वास्तव में सक्रिय हैं या नहीं और चुनावी जिम्मेदारी संभालने की स्थिति में हैं या नहीं।
कागज पर बनी बूथ कमेटियों की होगी परीक्षा
भाजपा में बूथ को चुनावी संगठन की सबसे अहम इकाई माना जाता है। पार्टी का जोर हमेशा से बूथ को मजबूत करने और वहां कार्यकर्ताओं की सक्रिय टीम तैयार करने पर रहा है। अब सत्यापन अभियान में कागज पर गठित बूथ कमेटियों की जमीनी हकीकत भी परखी जाएगी। चुनाव के दौरान बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां बांटने के समय यदि सूची में दर्ज कार्यकर्ता सक्रिय नहीं मिले तो संगठन की तैयारियों पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से सत्यापन के दौरान केवल नाम और पद की पुष्टि करने के बजाय कार्यकर्ताओं की सक्रियता और बूथ पर संगठन की वास्तविक स्थिति पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
दो से चार सितंबर तक चलेगा सत्यापन
कानपुर उत्तर जिला कार्यालय में दो से चार सितंबर तक बूथ सत्यापन से जुड़े कार्यों पर मंथन किया जाएगा। अभियान के लिए जिला महामंत्री अवधेश सोनकर को संयोजक बनाया गया है। पूर्व महापौर व जिलाध्यक्ष रवीन्द्र पाटनी, पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील बजाज, दीपू पांडेय और विधायक नीलिमा कटियार को एक-एक मंडल के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी बूथ के साथ मंडल और शक्ति केंद्रों की स्थिति भी परखने जा रही है। इससे संगठन के जमीनी ढांचे की कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें चुनाव से पहले दुरुस्त करने की कोशिश होगी।
पदाधिकारी सक्रिय नहीं तो बूथ कैसे मजबूत होगा
जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित की नाराजगी का सीधा संदेश पदाधिकारियों की सक्रियता से जुड़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन में पद मिलना अपने आप में पर्याप्त नहीं है। जिम्मेदारी मिलने के बाद क्षेत्र में उसकी सक्रियता भी दिखाई देनी चाहिए। खास तौर पर बूथ सत्यापन जैसे अभियान में पदाधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि जिम्मेदार पदाधिकारी ही क्षेत्र में सक्रिय नहीं होंगे तो बूथ कमेटियों की वास्तविक स्थिति सामने लाना मुश्किल होगा।
विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की परीक्षा
बैठक में विधायक नीलिमा कटियार और पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील बजाज ने भी बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता और मजबूती को महत्वपूर्ण बताया। भाजपा के लिए बूथ स्तर का संगठन चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में दो से चार सितंबर तक होने वाला सत्यापन अभियान केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं होगा। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बूथ, मंडल और शक्ति केंद्र स्तर पर पार्टी का ढांचा कितना सक्रिय है और चुनावी चुनौती से निपटने के लिए कहां सुधार की जरूरत है।
बैठक में महामंत्री अभिनव दीक्षित, प्रमोद विश्वकर्मा, अनुराग शर्मा, जन्ममेय सिंह, आकाश शुक्ला, शिवांग मिश्रा, सीमा, सुरेंद्र गुप्ता, पारस मदान, रीता पासवान, मोनेन्द्र राजपूत, विनोद पाल, शालिनी कटियार, प्रशांत त्रिपाठी, शैल शुक्ला, रामजी गुप्ता, चंद्रमणि चौबे, योगेश पांडेय, राजेश तिवारी, शुभम दीक्षित, अजय राय, रमाशंकर अग्रहरि, अनंत मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, दीपक शुक्ला, सियाराम, रामपाल, विवेक पांडेय, प्रभाकर अवस्थी, सुरेश गुप्ता, राजेश चौहान, जिशान अहमद, स्पर्श कटियार और आशीष तिवारी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


