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रूस के बढ़ते खतरे से यूरोप सतर्क, यूक्रेन पर हमले तेज

  • डेनमार्क ने नाटो देश पर सीमित रूसी हमले का जोखिम कम लेकिन बढ़ता बताया; पोलैंड में स्टारलिंक केंद्र की आग को तोड़फोड़ माना गया, जबकि कीव और खार्किव पर रूसी हमले जारी रहे

भारत 19 डेस्क
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोप की सुरक्षा चिंता एक साथ कई मोर्चों पर बढ़ती दिख रही है। डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा ने रूस की ओर से किसी नाटो देश पर सीमित सैन्य हमले के जोखिम को कम लेकिन बढ़ता हुआ बताया है। इसी आकलन में आने वाले महीनों में रूस की हाइब्रिड गतिविधियां और तेज होने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, पोलैंड में यूक्रेन को भी संचार सुविधा देने वाले स्टारलिंक भू-केंद्र में लगी आग को सरकार ने तोड़फोड़ बताया है, हालांकि जिम्मेदार पक्ष की पहचान अभी नहीं हुई है। इसी बीच रूस के ताजा हमलों में यूक्रेन के कीव और खार्किव क्षेत्र में लोगों के मारे जाने की खबर है। डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा ने यह आकलन 24 सितंबर को जारी किया है।

डेनमार्क ने नाटो देश पर हमले का जोखिम बढ़ता बताया

डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा के नए आकलन के मुताबिक रूस आने वाले महीनों में नाटो और पश्चिम के खिलाफ अपनी हाइब्रिड गतिविधियां और बढ़ा सकता है। एजेंसी ने किसी नाटो देश के खिलाफ सीमित सैन्य हमले की संभावना को कम लेकिन बढ़ता हुआ बताया है। साथ ही उसने कहा कि रूस की ओर से किसी नाटो देश पर पूर्ण पैमाने का आक्रमण अभी असंभावित है, हालांकि इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। इस आकलन का मतलब तत्काल रूस-नाटो युद्ध की चेतावनी नहीं है। बल्कि डेनमार्क की एजेंसी यूरोप में ऐसे जोखिमों की ओर ध्यान दिला रही है, जिनमें सीमित सैन्य कार्रवाई और पारंपरिक युद्ध से नीचे की हाइब्रिड गतिविधियां शामिल हैं।

रूस की हाइब्रिड गतिविधियों पर नाटो की निगरानी बढ़ी

डेनमार्क की चेतावनी ऐसे समय आई है जब नाटो पहले से रूस की हाइब्रिड गतिविधियों, ड्रोन घटनाओं और संभावित तोड़फोड़ को लेकर सतर्क है। नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने 23 सितंबर को कहा कि हाल के हफ्तों में हाइब्रिड हमलों और ड्रोन से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं और गठबंधन को शांत रहते हुए अपनी सुरक्षा तैयारियां जारी रखनी चाहिए। नाटो ने पहले भी रूस से जुड़ी हाइब्रिड गतिविधियों में तोड़फोड़, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और दुष्प्रचार जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया है। गठबंधन का कहना है कि ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य सहयोगी देशों की एकजुटता और सुरक्षा को कमजोर करना हो सकता है।

पोलैंड में स्टारलिंक केंद्र की आग पर तोड़फोड़ की जांच

मध्य पोलैंड के वोला क्रोबोव्स्का में 23 सितंबर की शाम स्टारलिंक के एक भू-आधारित संचार केंद्र में आग लग गई। Reuters के अनुसार पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और डिजिटल मामलों के मंत्री क्रिजिस्तोफ गॉकोव्स्की ने इसे इंटरनेट सेवाओं को बाधित करने के उद्देश्य से की गई तोड़फोड़ बताया। आग से बिजली व्यवस्था और बैकअप जनरेटर प्रभावित हुए, हालांकि बाद में प्रणालियां फिर चालू कर दी गईं। यह केंद्र मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों को संचार सुविधा देता है, जिसमें यूक्रेन भी शामिल है। इसी वजह से घटना को यूक्रेन के संचार ढांचे के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्टारलिंक आग के पीछे किसका हाथ, जांच जारी

पोलिश सरकार ने घटना को तोड़फोड़ बताया है, लेकिन इसके लिए किसी देश या संगठन की जिम्मेदारी अभी स्थापित नहीं हुई है। रूस की ओर से ऐसी घटनाओं में शामिल होने के आरोपों से पहले भी इनकार किया जाता रहा है। इसलिए स्टारलिंक केंद्र की आग को सीधे रूसी कार्रवाई बताना फिलहाल उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक पोलैंड में अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं।

कीव और खार्किव पर रूसी हमलों से बढ़ी चिंता

इसी बीच यूक्रेन में रूसी हमले जारी रहे। 24 सितंबर को कीव और खार्किव क्षेत्र में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबर सामने आई। Reuters से जुड़ी रिपोर्टिंग में इन हमलों में नौ लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। खारकीव क्षेत्र में एक कृषि प्रतिष्ठान को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई, जबकि कीव में आवासीय और अन्य नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा। इन हमलों के बीच यूक्रेन के शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर रूसी हवाई हमलों का दबाव बना हुआ है।

जेलेंस्की के संयुक्त राष्ट्र भाषण के बीच हमले

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की उस समय न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की अपील कर रहे थे। इसी अवधि में यूक्रेन पर रूसी हमलों की खबर सामने आई। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इन हमलों को जेलेंस्की के संयुक्त राष्ट्र भाषण की सीधी प्रतिक्रिया बताने का पर्याप्त प्रमाण नहीं है। इसलिए दोनों घटनाओं को समयक्रम के रूप में देखना ज्यादा सटीक है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत पश्चिमी नेताओं के साथ युद्ध और यूक्रेन की सुरक्षा पर कूटनीतिक प्रयास भी कर रहे थे।

यूरोप के सामने सैन्य हमले से ज्यादा व्यापक खतरा

ताजा घटनाक्रम का महत्व केवल इस बात में नहीं है कि रूस किसी नाटो देश पर सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। डेनमार्क की चेतावनी में हाइब्रिड गतिविधियों को भी प्रमुख जोखिम के रूप में सामने रखा गया है। इसमें ऐसे कदम शामिल हो सकते हैं जिनका उद्देश्य सीधे युद्ध शुरू किए बिना विरोधी देशों पर दबाव बनाना हो। नाटो पहले ही तोड़फोड़, साइबर गतिविधियों, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और दुष्प्रचार को रूस से जुड़े हाइब्रिड खतरे के संदर्भ में सूचीबद्ध कर चुका है।

रूस-नाटो टकराव पर फिलहाल पूर्ण युद्ध का संकेत नहीं

डेनमार्क की रक्षा खुफिया सेवा का ताजा आकलन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे रूस और नाटो के बीच तत्काल पूर्ण युद्ध की चेतावनी के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पूर्ण पैमाने पर नाटो देश पर रूसी आक्रमण की संभावना अभी असंभावित है, जबकि सीमित सैन्य हमले का जोखिम कम लेकिन बढ़ता हुआ है। इस बीच यूक्रेन में जारी रूसी हमले और यूरोपीय देशों में बढ़ती सुरक्षा सतर्कता यह दिखाती है कि युद्ध का प्रभाव यूक्रेन के मोर्चे से आगे पूरे यूरोपीय सुरक्षा ढांचे पर पड़ रहा है।

यूरोप की निगाह अब रूस की अगली चाल पर

डेनमार्क की खुफिया चेतावनी, नाटो की बढ़ी सतर्कता, पोलैंड में स्टारलिंक केंद्र की आग और यूक्रेन पर जारी रूसी हमले एक-दूसरे से अलग घटनाएं हैं, लेकिन इन सभी ने यूरोप में सुरक्षा संबंधी चिंता बढ़ाई है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्टारलिंक आग की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हुई है और नाटो पर रूसी हमले का जोखिम डेनमार्क की एजेंसी ने कम लेकिन बढ़ता हुआ बताया है। इसलिए मौजूदा स्थिति को बढ़ते सुरक्षा जोखिम और बढ़ी हुई सतर्कता के रूप में देखना अधिक सटीक है, न कि तत्काल रूस-नाटो युद्ध की स्थिति के रूप में।

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