- SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन; दिल्ली, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़ और मणिपुर समेत कई जगह प्रदर्शन, वाम दलों ने भी आंदोलन का ऐलान किया
भारत 19
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब देशभर में सड़क तक पहुंच गया है। 25 सितंबर को कांग्रेस ने कई राज्यों में प्रदर्शन कर CEC के इस्तीफे और हटाने की मांग की। दिल्ली, लखनऊ, पटना, गुवाहाटी, कोलकाता, चंडीगढ़, देहरादून, जम्मू और मणिपुर समेत कई जगह चुनाव कार्यालयों की ओर मार्च किए गए। कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
विवाद की जड़ में SIR और आयोग की कार्यप्रणाली
मौजूदा विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है। इसके साथ ही चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख है।
चुनाव आयोग ने कहा, अंतिम फैसले सर्वसम्मत
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय और विचार-विमर्श निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व या उनकी तारीखों को नकारा नहीं, लेकिन कहा कि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। इस तरह विवाद में दो अलग पक्ष सामने हैं, विपक्ष आंतरिक आपत्तियों को आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल के रूप में उठा रहा है, जबकि आयोग इन्हें संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बता रहा है।
दिल्ली से मणिपुर तक कांग्रेस का प्रदर्शन
दिल्ली में कांग्रेस और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे की मांग की। लखनऊ में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया, जबकि समाजवादी पार्टी इसमें शामिल नहीं हुई। पटना में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। चंडीगढ़ में भी पुलिस ने पानी की बौछार की। गुवाहाटी में कांग्रेस सांसद और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। मणिपुर में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने की रिपोर्ट है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, कोलकाता और अन्य स्थानों पर भी कांग्रेस के प्रदर्शन हुए। मेघालय के शिलांग में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC का पुतला भी फूंका।
वाम दलों ने भी आंदोलन का ऐलान किया
कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद CPI(M), CPI, CPI(ML)-लिबरेशन, RSP और AIFB ने भी CEC और SIR के खिलाफ देशव्यापी कार्यक्रम का ऐलान किया है। इन दलों का प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा। वाम दलों ने SIR रोकने और CEC को हटाने की मांग की है। यह कार्यक्रम कांग्रेस के 25 सितंबर के प्रदर्शन से अलग है।
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल
SIR की प्रक्रिया को लेकर न्यायिक स्तर पर भी सवाल उठे हैं। दिल्ली में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर भेजे गए नोटिसों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और उसकी भाषा को लेकर सवाल पूछे हैं। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं को लेकर भी बड़ी संख्या में अपीलें दाखिल हुई हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में 22 लाख से अधिक ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है।
विवाद अब सड़क से संसद तक पहुंचा
CEC को लेकर विपक्षी दलों का विरोध अब केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। संसद में CEC को हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी विपक्षी दलों के बीच चर्चा चल रही है। वहीं 25 सितंबर को CEC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल हुई, जिसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों और SIR के दौरान मतदाता नाम हटाने से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं। फिलहाल पूरे विवाद के तीन प्रमुख केंद्र हैं, SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका।
