- सीएसजेएमयू में 110वीं जयंती पर विचार गोष्ठी; एकात्म मानववाद, अंत्योदय और राष्ट्र निर्माण पर चर्चा, कुलपति ने विचारों को जीवन में उतारने का किया आह्वान
भारत 19
कानपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में उनके विचारों और सामाजिक चिंतन पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। तात्या टोपे सीनेट हाल में हुए कार्यक्रम में एकात्म मानववाद, अंत्योदय, भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की अवधारणा पर चर्चा हुई। इस दौरान समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में योगदान देने वाले आठ युवाओं और प्रबुद्धजनों को सम्मानित किया गया।
एकात्म मानववाद को जीवन से जोड़ने पर जोर
विश्वविद्यालय के दीनदयाल शोध केंद्र की ओर से ‘दीनदयाल जी के विचार एवं सिद्धांत’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं क्षेत्र धर्म जागरण प्रमुख अभय जी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद को केवल विचार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उसे अपने जीवन में उतारकर भी दिखाया। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के जीवन में सादगी, अनुशासन, सेवा और संवेदनशीलता को प्रमुख विशेषताएं बताते हुए कहा कि व्यक्ति और समाज एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में अधिकारों के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना भी जरूरी है।
आत्मचिंतन और संयम को बताया जरूरी
अभय जी ने सामाजिक जीवन में आत्मचिंतन और संयम के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने काम, क्रोध, मद और लोभ जैसी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने का संदेश दिया। उनके अनुसार व्यक्ति के आचरण का प्रभाव व्यापक सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएसजेएमयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि महापुरुषों की जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य उनके जीवन और विचारों पर आत्मचिंतन करना होना चाहिए। केवल किसी महापुरुष के बारे में जानकारी हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके विचारों और सद्गुणों को व्यवहार में उतारना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय के सामाजिक, आर्थिक और दार्शनिक विचारों पर अधिक शोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शोध के माध्यम से उनके विचारों को नई पीढ़ी और समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है।
अंत्योदय के संदेश को जनकल्याण से जोड़ा
गोष्ठी में समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों के जरिए अंत्योदय के संदेश को आगे बढ़ाने वाले विपिन, गोलू, ददन मिश्रा, प्रकाश श्रीवास्तव, सुरेश तिवारी, अरुण त्रिपाठी, हर्ष तिवारी और मनमोहन सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक एवं दीनदयाल शोध केंद्र के निदेशक डॉ. दिग्विजय शर्मा ने विषय प्रस्तावना प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ. दुर्गेश सिंह, श्रवण कुमार द्विवेदी, संगम बाजपेयी, डॉ. मानस उपाध्याय और डॉ. दिवाकर अवस्थी समेत विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
