- IMF प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का आकलन, AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से करीब 3% बनी हुई है वैश्विक वृद्धि; ऊर्जा संकट के दबाव के बीच थाईलैंड समेत एशियाई हार्डवेयर उत्पादक देशों को खास फायदा, उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक बढ़ोतरी संभव
भारत 19 डेस्क। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से बढ़ता निवेश वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के मुताबिक, AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा भारी खर्च दुनिया की आर्थिक वृद्धि को करीब 3 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने में मदद कर रहा है। ये निवेश ऐसे समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, जब ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान और महंगी ऊर्जा आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल रहे हैं। AI से जुड़ी इस तेजी का सबसे अधिक फायदा उन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को मिल रहा है, जो चिप, सर्वर और दूसरे तकनीकी हार्डवेयर की आपूर्ति करती हैं। इनमें थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं।
AI निवेश बना वैश्विक वृद्धि का बड़ा सहारा
जॉर्जीवा ने बैंकॉक में IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान कहा कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मांग और निवेश, दोनों को बढ़ाने वाला कारक बन गया है। डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग क्षमता और AI से जुड़े उपकरणों की बढ़ती जरूरत के कारण कंपनियां बड़े पैमाने पर पूंजी लगा रही हैं। इससे तकनीकी उत्पादों की मांग, औद्योगिक गतिविधियों और संबंधित आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा मिल रहा है। IMF के जुलाई 2026 के अनुमान के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2026 में 3 प्रतिशत और 2027 में 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जॉर्जीवा का ताजा बयान बताता है कि AI निवेश इस वृद्धि को सहारा देने वाले प्रमुख कारकों में शामिल है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाओं में समान गति से सुधार हो रहा है।
एशियाई देशों को AI हार्डवेयर की मांग से फायदा
AI तकनीक के विस्तार के लिए चिप, सर्वर, कंप्यूटर उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और डेटा सेंटर से जुड़े हार्डवेयर की जरूरत बढ़ रही है। एशिया के कई देश इन उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला का अहम हिस्सा हैं। इसलिए AI कंपनियों के बढ़ते खर्च का लाभ उन देशों तक पहुंच रहा है, जहां इन उपकरणों का उत्पादन और निर्यात होता है। जॉर्जीवा के आकलन के मुताबिक, AI निवेश से एशिया की विकसित अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर में 0.5 से 1 प्रतिशत अंक तक बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह बढ़ोतरी 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक हो सकती है। थाईलैंड जैसे हार्डवेयर आपूर्तिकर्ता देशों को इस निवेश चक्र से फायदा मिलने की संभावना है।
ऊर्जा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर डाल रहा दबाव
AI निवेश से मिल रही गति के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने ऊर्जा आपूर्ति का संकट बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऊर्जा की उपलब्धता और कीमतों में उतार-चढ़ाव से परिवहन, विनिर्माण और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कंपनियों के निवेश फैसलों, उपभोक्ता खर्च और महंगाई पर पड़ता है। जॉर्जीवा के मुताबिक, AI निवेश से पैदा हुई मांग और पूंजीगत खर्च की तेजी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े नकारात्मक प्रभावों की कुछ हद तक भरपाई कर रही है। लेकिन यह राहत सभी देशों को समान रूप से नहीं मिल रही। जो अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भर हैं और जिन्हें AI तकनीक के विस्तार से सीधे लाभ नहीं मिल रहा, उनके लिए आर्थिक दबाव अधिक रह सकता है। IMF ने भी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा है कि युद्ध से पैदा ऊर्जा संबंधी झटके कुछ देशों की वृद्धि को कमजोर कर रहे हैं, जबकि तकनीकी मूल्य शृंखला से जुड़े देशों को AI की मांग से लाभ मिल रहा है।
AI बूम के साथ जोखिम भी बढ़ रहे
AI में तेजी से बढ़ता निवेश अवसरों के साथ जोखिम भी लेकर आया है। यदि कंपनियों की AI सेवाओं और उत्पादों से होने वाली कमाई निवेश की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहती, तो बड़े पैमाने पर पूंजी लगाने वाली कंपनियों और वित्तीय बाजारों पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, AI के लाभ कुछ देशों और कंपनियों में केंद्रित रहने से वैश्विक आर्थिक असमानता बढ़ने की आशंका भी है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भारी मात्रा में बिजली और दूसरे संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए तकनीकी विस्तार के साथ ऊर्जा उपलब्धता, लागत और बुनियादी ढांचे की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कुल मिलाकर, IMF का आकलन है कि AI निवेश फिलहाल वैश्विक वृद्धि को सहारा दे रहा है और एशिया के हार्डवेयर उत्पादक देशों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। लेकिन ऊर्जा संकट, निवेश से जुड़ी अनिश्चितता और AI के लाभों के असमान वितरण के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।


