- बीएससी और एमएससी कृषि के लिए नया अध्यादेश बनाने को समिति गठित, सिक्स डीन कमेटी की संस्तुतियों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और दूसरे कृषि विश्वविद्यालयों के नियमों के अध्ययन के आधार पर तैयार होंगी सिफारिशें
भारत 19/ कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में बीएससी और एमएससी कृषि के छात्रों के पाठ्यक्रम और परीक्षा संबंधी नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय ने सिक्स डीन कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने के लिए नया अध्यादेश तैयार करने के उद्देश्य से समिति गठित की है। समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और दूसरे कृषि विश्वविद्यालयों में लागू नियमों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। हालांकि, अभी किसी बदलाव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। नई व्यवस्था का स्वरूप समिति की सिफारिशों और विश्वविद्यालय के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
चार सदस्यीय समिति करेगी नियमों की समीक्षा
परीक्षा नियंत्रक राकेश कुमार के अनुसार, समिति में कृषि संकाय के अधिष्ठाता प्रो. भूपेन्द्र कुमार त्रिपाठी, इटावा के जनता कॉलेज बकेवर के प्रो. अशोक कुमार पाण्डेय, स्कूल ऑफ एडवांस एग्रीकल्चर एंड सोशल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हिमांशु त्रिवेदी और उप-कुलसचिव (परीक्षा) अंजलि मौर्या शामिल हैं। अंजलि मौर्या समिति की समन्वयक होंगी। समिति से जल्द अपनी आख्या और संस्तुतियां उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पढ़ाई, प्रायोगिक प्रशिक्षण और परीक्षा व्यवस्था पर मंथन
समिति दूसरे कृषि विश्वविद्यालयों में लागू शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी प्रावधानों का तुलनात्मक अध्ययन करेगी। इसके आधार पर बीएससी और एमएससी कृषि के मौजूदा अध्यादेश की समीक्षा कर सिक्स डीन कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने के विकल्प सुझाए जाएंगे। पाठ्यक्रम संचालन, सैद्धांतिक पढ़ाई, प्रयोगात्मक कार्य और मूल्यांकन व्यवस्था समीक्षा के प्रमुख पहलू हो सकते हैं। हालांकि, कार्यालय-ज्ञाप में इन सभी विषयों पर अलग-अलग बदलावों का उल्लेख नहीं है। वास्तविक सिफारिशें समिति की रिपोर्ट में सामने आएंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी बनेगी आधार
समिति को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और सिक्स डीन कमेटी की संस्तुतियों के अनुरूप नया अध्यादेश तैयार करने के लिए कहा गया है। नीति में कौशल विकास, व्यावहारिक अनुभव, बहुविषयक शिक्षा और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। कृषि शिक्षा में इन पहलुओं का महत्व बढ़ रहा है, क्योंकि खेती में वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक उत्पादन तकनीकों और डिजिटल साधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
डिजिटल कृषि के अनुरूप प्रशिक्षण पर भी नजर
मौसम संबंधी जानकारी, मृदा परीक्षण, डिजिटल मानचित्रण, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकें कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण हो रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता देना भी जरूरी है। दूसरे विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करते समय समिति यह देख सकेगी कि कृषि शिक्षा और बदलती तकनीकी जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल के लिए कौन-से प्रावधान उपयोगी हो सकते हैं।
समिति की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी नई व्यवस्था
नए अध्यादेश की तैयारी से कृषि शिक्षा के शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी नियमों की समीक्षा आगे बढ़ेगी। दूसरे विश्वविद्यालयों के नियमों से तुलना कर CSJMU के लिए उपयुक्त प्रावधान सुझाए जा सकेंगे। इससे पाठ्यक्रम संचालन और विद्यार्थियों के मूल्यांकन को अधिक स्पष्ट बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल नए नियम लागू होने की कोई तारीख तय नहीं हुई है। आगे की स्थिति समिति की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

