- ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दावा किया, कीव और खार्किव में बिजली संयंत्रों पर हमलों की यूक्रेन ने दी सूचना, मॉस्को की ओर से समझौते की पुष्टि नहीं
भारत 19 डेस्क। रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की पहल के बीच नए हमलों की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, यूक्रेन ने इसके बाद भी अपने बिजली संयंत्रों पर रूसी हमलों की सूचना दी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के मुताबिक, राजधानी कीव में एक बिजली संयंत्र को ड्रोन से निशाना बनाया गया। इसके बाद खार्किव में बिजली और हीटिंग आपूर्ति से जुड़े संयंत्र पर भी हमले की जानकारी दी गई। दूसरी ओर, मॉस्को की तरफ से संघर्ष विराम पर स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में ट्रंप के दावे और यूक्रेन की ओर से सामने आए हमलों के विवरण के बीच ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ट्रंप ने ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का किया दावा
ट्रंप ने 11 अक्टूबर को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा संघर्ष विराम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उनके दावे के मुताबिक, दोनों पक्ष ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संघर्ष विराम में किन ऊर्जा सुविधाओं को शामिल किया गया है, इसकी निगरानी कैसे होगी और उल्लंघन होने पर क्या कार्रवाई की जाएगी। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ कि दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं या यह सहमति किसी अन्य स्तर पर बनी है। मॉस्को की ओर से स्पष्ट पुष्टि नहीं आने के कारण संघर्ष विराम की वास्तविक स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।
कीव और खार्किव में हमलों की यूक्रेन ने दी सूचना
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ऊर्जा संघर्ष विराम की पहल का स्वागत करता है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए रूस की सहमति और उसका पालन जरूरी है। उन्होंने कीव में बिजली संयंत्र पर रूसी ड्रोन हमले की जानकारी दी। इसके बाद खार्किव में बिजली और हीटिंग व्यवस्था से जुड़े संयंत्र पर भी हमले की सूचना सामने आई।
यूक्रेन के मुताबिक, इन हमलों से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश संघर्ष विराम की शर्तों पर स्पष्टता चाहता है। यूक्रेन की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की तत्परता भी जताई गई है, बशर्ते रूस भी ऐसा करे। हालांकि, इन हमलों के विवरण और संघर्ष विराम की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
रूस की पुष्टि नहीं, संघर्ष विराम पर बना संशय
ट्रंप की घोषणा के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि क्या रूस ने औपचारिक रूप से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की सहमति दी है। मॉस्को की ओर से स्पष्ट पुष्टि नहीं होने के कारण इसे दोनों देशों के बीच पूरी तरह लागू समझौता मानना जल्दबाजी होगी। रूस और यूक्रेन लंबे समय से एक-दूसरे के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाते रहे हैं।
रूस के हमलों से यूक्रेन की बिजली और हीटिंग व्यवस्था प्रभावित हुई है, जबकि यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए हैं। ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने का असर सैन्य आपूर्ति के साथ आम नागरिकों और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।
सर्दियों से पहले ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा अहम
सर्दियों के करीब आने के साथ यूक्रेन के बिजली संयंत्रों, हीटिंग नेटवर्क और ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा और महत्वपूर्ण हो जाती है। इन ठिकानों पर हमले जारी रहने से बिजली कटौती, हीटिंग संकट और उद्योगों के संचालन पर असर पड़ सकता है। ऊर्जा ठिकानों को निशाना न बनाने संबंधी किसी भी समझौते से नागरिकों को राहत मिल सकती है। लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों की स्पष्ट सहमति, शर्तों का निर्धारण और उनका पालन जरूरी होगा।
फिलहाल, ट्रंप के संघर्ष विराम संबंधी दावे के बाद रूस की आधिकारिक स्थिति और यूक्रेन की ओर से बताए गए हमलों की स्वतंत्र पुष्टि पर नजर बनी हुई है। जब तक इन बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं आती, ऊर्जा संघर्ष विराम को स्थापित समझौते के बजाय एक ऐसा दावा मानना अधिक उचित होगा, जिसकी स्थिति की पुष्टि बाकी है।


