- 15 सरकारी डेटासेट से परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का एआई आकलन; आंध्र प्रदेश के 1.35 करोड़ परिवारों का बन सकेगा स्कोर, घर-घर सर्वे की जरूरत घटाने की तैयारी
भारत 19
कानपुर। सरकारी योजनाओं का लाभ सही परिवार तक पहुंचाना अक्सर उतनी ही बड़ी चुनौती है, जितनी योजना बनाना। जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए होने वाले बड़े पैमाने के घर-घर सर्वे में समय, पैसा और बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। अब आईआईटी कानपुर का एआई आधारित ‘फैमिली स्कोर’ इस पूरी प्रक्रिया को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह तकनीक पहले से मौजूद सरकारी आंकड़ों के आधार पर परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का आकलन कर यह पहचानने में मदद करेगी कि किस परिवार को सरकारी सहायता की ज्यादा जरूरत है।
आईआईटी कानपुर और आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से परियोजना के पहले चरण में यह जांच की गई कि क्या सरकारी रिकॉर्ड और एआई मॉडल की मदद से पारंपरिक घरेलू सर्वेक्षणों की जगह भरोसेमंद सामाजिक-आर्थिक आकलन किया जा सकता है। शुरुआती नतीजों में आईआईटी के एन्सेंबल एआई मॉडल ने पारंपरिक सर्वेक्षणों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन के संकेत दिए हैं। इससे बड़े स्तर पर परिवारों की पहचान कम समय और कम संसाधनों में करने की संभावना बनी है।

15 सरकारी डेटासेट से बनेगा परिवार का ‘फैमिली स्कोर’
‘फैमिली स्कोर’ करीब 15 सरकारी डेटासेट से मिले संकेतकों का इस्तेमाल करता है। इनमें परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े विभिन्न आंकड़े शामिल हैं। एआई मॉडल को राज्यव्यापी सर्वेक्षण से तैयार सामाजिक-आर्थिक स्कोर के आधार पर प्रशिक्षित और जांचा गया है। मॉडल तैयार होने के बाद उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद परिवारों के लिए बिना किसी नए सर्वेक्षण के फैमिली स्कोर तैयार किया जा सकता है। वर्तमान सरकारी आंकड़ों के आधार पर आंध्र प्रदेश के 1.72 करोड़ परिवारों में करीब 1.35 करोड़ यानी लगभग 75 प्रतिशत परिवारों का फैमिली स्कोर तैयार किया जा सकता है।
आंध्र प्रदेश में पहले चरण के प्रयोग के मिले संकेत
आईआईटी कानपुर और आंध्र प्रदेश सरकार की इस पहल का पहला चरण यह परखने पर केंद्रित था कि उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से तैयार एआई मॉडल पारंपरिक घरेलू सर्वेक्षण के मुकाबले परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का आकलन कितनी प्रभावी तरीके से कर सकता है। शुरुआती परिणामों में एन्सेंबल एआई मॉडल ने बेहतर प्रदर्शन के संकेत दिए हैं। इससे बड़े स्तर पर जरूरतमंद परिवारों की पहचान के लिए समय और संसाधन दोनों बचाने की संभावना सामने आई है।
चंद्रबाबू नायडू के सामने पेश हुए नतीजे
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसरों ने एआई फैमिली स्कोर तकनीक के पहले चरण के नतीजे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने प्रस्तुत किए। सरकार ने जरूरतमंद परिवारों तक लक्षित सहायता पहुंचाने में इस तकनीक की संभावनाओं की सराहना की। आईआईटी के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने कहा कि फैमिली स्कोर का उद्देश्य एआई और उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के जरिए परिवारों की स्थिति का बेहतर आकलन कर उन्हें उचित योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उनके मुताबिक शुरुआती नतीजे संकेत देते हैं कि इससे महंगे और समय लेने वाले सर्वेक्षणों पर निर्भरता घटाई जा सकती है।
अब पूरे आंध्र प्रदेश में होगा फैमिली स्कोर का परीक्षण
समझौता ज्ञापन के तहत दूसरे चरण में फैमिली स्कोर को पूरे राज्य ‘आंध्र प्रदेश’ के परिवारों तक पहुंचाया जाएगा और इसे आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ‘एपीएसडीसी’ से जोड़ा जाएगा। बड़े पैमाने पर परीक्षण के दौरान मॉडल के प्रदर्शन और स्कोर को और बेहतर किया जाएगा। यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण होगा क्योंकि पूरे राज्य में इस्तेमाल के दौरान यह पता चलेगा कि उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और एआई मॉडल के आधार पर तैयार किया गया फैमिली स्कोर विभिन्न सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों वाले परिवारों का आकलन कितनी प्रभावी तरीके से कर पाता है।
कई संस्थान मिलकर कर रहे हैं तकनीक पर काम
आंध्र प्रदेश में पहली बार हुए इस प्रकार के सर्वे को आईआईटी के अलावा वाधवानी सेंटर फॉर डेवलपिंग इंटेलीजेंस सिस्टम, वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलीजेंस सिस्टम व एयरावत रिसर्च फाउंडेशन ने साथ मिलकर काम किया है। फैमिली स्कोर की परिकल्पना का बड़ा उद्देश्य यही है कि पहले से उपलब्ध सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल कर जरूरतमंद परिवारों की पहचान आसान बनाई जाए। यदि बड़े पैमाने पर परीक्षण में शुरुआती नतीजे कायम रहते हैं तो सरकारी योजनाओं के लिए लाभार्थियों की पहचान में घर-घर सर्वे पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण तकनीकी कदम साबित हो सकता है।


