- CSJMU और BOAT-NR के बीच एमओयू, NATS के तहत अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम लागू होगा, तीन वर्षीय डिग्री में 1 से 3 और चार वर्षीय डिग्री में 2 से 4 सेमेस्टर तक ‘ऑन-द-जॉब’ ट्रेनिंग का मौका
भारत 19/ कानपुर। अब विश्वविद्यालय की डिग्री सिर्फ किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के विद्यार्थी पढ़ाई के साथ वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव भी हासिल कर सकेंगे। इसके लिए विश्वविद्यालय ने भारत सरकार की नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम (NATS) के तहत अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) लागू करने की दिशा में बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग, नॉर्दर्न रीजन, कानपुर (BOAT-NR) के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है।
सेंटर फॉर एकेडमिक में मंगलवार को हुए कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और BOAT-NR के निदेशक विवेक कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिग्री के साथ ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण देना है, जिससे पढ़ाई पूरी करने के बाद वे रोजगार की दुनिया की जरूरतों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
तीन और चार वर्षीय डिग्री में अप्रेंटिसशिप का मौका
AEDP के तहत तीन वर्षीय अंडरग्रेजुएट डिग्री में विद्यार्थी कम से कम एक और अधिकतम तीन सेमेस्टर अप्रेंटिसशिप कर सकेंगे। वहीं चार वर्षीय डिग्री में दो से चार सेमेस्टर तक ‘ऑन-द-जॉब’ ट्रेनिंग का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि जब अप्रेंटिसशिप पाठ्यक्रम के अंतिम सेमेस्टर में होगी, तो NATS के प्रावधानों के अनुसार विद्यार्थियों को स्टाइपेंड भी मिलेगा। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योग और कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों को समझने का मौका मिलेगा। साथ ही तकनीकी, व्यावसायिक और पेशेवर कौशल विकसित होंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
कक्षा से करियर तक बनेगा सीधा रास्ता
एमओयू का एक प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करना है। विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल के साथ आउटकम-बेस्ड लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा। यानी विद्यार्थी केवल डिग्री हासिल करने के बजाय उस क्षेत्र में जरूरी व्यावहारिक दक्षताएं भी विकसित करेंगे, जिसमें उन्हें भविष्य में काम करना है। विभागीय शिक्षकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। AEDP और NATS के प्रावधानों, अप्रेंटिसशिप की प्रक्रिया और विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसरों की जानकारी दी गई। शिक्षकों को अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए कार्यक्रम की कार्य प्रणाली समझाई गई।
12 लाख से अधिक विद्यार्थियों को फायदा पहुंचने की संभावना
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें उच्च शिक्षा को कौशल, रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय से जुड़े सात जिलों के करीब 700 महाविद्यालयों में 12 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में AEDP के जरिए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने की संभावना है।


