- ‘RetroVerse ’26’ में 1970 से 1990 के दशक के गीतों ने बांधा समां; ‘लिखे जो खत तुझे’, ‘एक हसीना थी’ और ‘क्या हुआ तेरा वादा’ पर विद्यार्थियों ने दी गायन-नृत्य प्रस्तुतियां
भारत 19
कानपुर। जब मंच से ‘लिखे जो खत तुझे’ की धुन उठी तो माहौल में पुराने बॉलीवुड का रोमांस उतर आया। इसके बाद ‘एक हसीना थी’, ‘क्या हुआ तेरा वादा’ और ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को उस दौर की संगीत दुनिया में पहुंचा दिया। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में गुरुवार की शाम विद्यार्थियों के नाम रही, जिन्होंने ‘RetroVerse ’26’ में 1970 से 1990 के दशक के सदाबहार फिल्मी गीतों को अपनी आवाज और अंदाज में पेश किया।
पुराने गीतों ने फिर रचा संगीत का जादू
यूआईईटी के ओपन एम्फिथिएटर में हुए कार्यक्रम में म्यूजिक विभाग के विद्यार्थियों ने गायन, वाद्ययंत्र और नृत्य के जरिए रेट्रो संगीत को मंच पर उतारा। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. विनय पाठक और डॉ. वंदना पाठक मौजूद रहे। प्रस्तुतियों के दौरान विद्यार्थियों की तैयारी और पुराने गीतों की पहचान ने दर्शकों को पूरे कार्यक्रम से जोड़े रखा। ‘RetroVerse ’26’ की परिकल्पना का केंद्र भारतीय सिनेमा के उस दौर का संगीत रहा, जिसे आज भी अलग पीढ़ियों के श्रोता पसंद करते हैं। विद्यार्थियों ने इन गीतों को नए मंचीय अंदाज में पेश किया, लेकिन उनकी मूल धुन और संगीत की पहचान को बरकरार रखा।
‘पिया तोसे’ से ‘लिखे जो खत’ तक गीतों की महफिल
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक गीत और समूह नृत्य से हुई। इसके बाद एक के बाद एक पुराने फिल्मी गीतों की प्रस्तुतियां होती रहीं। वैष्णवी सक्सेना ने ‘पिया तोसे नैना लागे रे’ पेश किया, जबकि आदर्श शुक्ला ने ‘लिखे जो खत तुझे’ के जरिए माहौल को रूमानी रंग दिया। सरस्वती ने ‘ये दिल तुम बिन’ प्रस्तुत किया। इसके बाद लक्ष्मी ने ‘चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था’, मैविश ने ‘तड़पते तड़पाते’ और रुद्राक्ष ने ‘क्या हुआ तेरा वादा’ सुनाया। क्रतिका जायसवाल ने ‘तूने ओ रंगीले’, तनिष्का ने ‘तू इस तरह से’ और गुरप्रीत ने ‘मुझे तेरी मोहब्बत का सहारा’ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पुलकित और क्रतिका की युगल प्रस्तुति ‘एक हसीना थी’ भी खास आकर्षण रही।
गायन के साथ वाद्ययंत्रों ने बढ़ाया रंग
रेट्रो गीतों की प्रस्तुतियों को प्रभावी बनाने में विद्यार्थियों की वाद्ययंत्रों पर संगत की भी अहम भूमिका रही। कीबोर्ड, तबला, गिटार, ड्रम और कोंगो जैसे वाद्ययंत्रों के साथ विद्यार्थियों ने गीतों की लय और संगीत संरचना को मंच पर जीवंत किया। आयोजन में सिर्फ लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति पर जोर नहीं रहा, बल्कि उनके राग-आधार, संगीत संरचना, गीतात्मकता और कलात्मक संदर्भ को भी महत्व दिया गया। इससे कार्यक्रम महज मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा और विद्यार्थियों को भारतीय फिल्म संगीत की विरासत को समझने तथा उसे मंच पर नए तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
प्रस्तुतियों के बाद विद्यार्थियों का सम्मान
कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रतिभागी और आयोजन से जुड़े विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कुलपति प्रो. विनय पाठक ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए उन्हें सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। ‘RetroVerse ’26’ की शाम इस मायने में भी अलग रही कि विद्यार्थियों ने उस दौर के गीतों को सिर्फ दोहराया नहीं, बल्कि अपनी आवाज, प्रस्तुति और मंचीय ऊर्जा के साथ उन्हें नई पीढ़ी के सामने फिर से पेश किया।


