- रावे के तहत किसानों से सीधे संवाद करेंगे कृषि स्नातक छात्र; आधुनिक खेती, फसल प्रबंधन, सिंचाई से लेकर पशुपालन और दुग्ध उत्पादन तक देंगे व्यावहारिक जानकारी
भारत 19
कानपुर। अब कृषि की पढ़ाई सिर्फ कक्षा और प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगी। सीएसए के कृषि स्नातक छात्र गांवों में पहुंचकर किसानों को खेती और पशुपालन की आधुनिक तकनीक सिखाएंगे। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में गुरुवार को कृषि स्नातक चतुर्थ वर्ष के छात्रों के ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) का ओरिएंटेशन कार्यक्रम हुआ। इसमें विद्यार्थियों को गांवों में जाकर किसानों से सीधे संवाद करने, उनकी खेती से जुड़ी समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को व्यावहारिक तरीके से किसानों तक पहुंचाने की कार्ययोजना बताई गई।
रावे के तहत विद्यार्थी सिर्फ तकनीकों की जानकारी ही नहीं देंगे, बल्कि गांवों में खेती की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझेंगे। वे फसलों की स्थिति, कृषि संसाधनों के इस्तेमाल, खेती में आ रही दिक्कतों और किसानों की जरूरतों का अध्ययन करेंगे। इसके जरिए कृषि शिक्षा को खेत, किसान और गांव की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने पर जोर रहेगा।
फसल उत्पादन से मृदा प्रबंधन तक सीखेंगे छात्र
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को फसल उत्पादन, मृदा प्रबंधन, बीज और उर्वरक के संतुलित उपयोग, कीट एवं रोग नियंत्रण और सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों को व्यवहारिक रूप से समझना होगा। इसके साथ किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी नई तकनीक को किसानों तक पहुंचाने के साथ स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक उसके इस्तेमाल की जानकारी देना जरूरी है। मिट्टी, पानी, मौसम और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर तकनीक का उपयोग ही किसानों के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
खेती के साथ पशुपालन से आय बढ़ाने पर जोर
रावे का दायरा खेती तक सीमित नहीं रहेगा। विद्यार्थी पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और पशुओं के रखरखाव से जुड़ी गतिविधियों को भी समझेंगे। किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ पशुपालन और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। ऐसे में विद्यार्थियों को कृषि की समग्र तस्वीर और किसानों की आय बढ़ाने वाले विकल्पों से भी परिचित कराया जाएगा।
किसानों से सीधा संवाद, समस्याओं का करेंगे आकलन
गांवों में जाकर विद्यार्थियों को किसानों से सीधे बातचीत करनी होगी। वे फसलों की स्थिति, खेती में इस्तेमाल हो रहे संसाधनों, स्थानीय समस्याओं और किसानों की जरूरतों को समझेंगे। इस दौरान मिले अनुभवों को दर्ज करना भी प्रशिक्षण का हिस्सा होगा। इससे छात्रों को कक्षा में पढ़ी कृषि तकनीकों को खेत की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक जानकारी किसानों तक पहुंचाने में भी विद्यार्थियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
कृषि डिग्री के लिए रावे अनिवार्य प्रशिक्षण
विश्वविद्यालय के अनुसार ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव एक सेमेस्टर का अनिवार्य प्रशिक्षण है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के निर्धारित पाठ्यक्रम के तहत कृषि स्नातक की डिग्री के लिए इसे अनिवार्य किया गया है। ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गांवों में काम करने की प्रक्रिया, किसानों से संवाद और प्रशिक्षण के दौरान हासिल अनुभवों को दर्ज करने से जुड़ी जानकारी दी गई। रावे के जरिए छात्रों को भविष्य के कृषि विशेषज्ञ के रूप में जमीनी अनुभव मिलेगा, वहीं किसानों तक विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को पहुंचाने का सीधा माध्यम भी तैयार होगा।


