- 2024 लोकसभा चुनाव में विधानसभा-वार प्रदर्शन बनेगा टिकट का अहम पैमाना; तावडे 15 जिलों में संगठन से लेंगे फीडबैक, कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों की दावेदारी पर होगी नजर
भारत 19
नई दिल्ली। भाजपा में अगला विधानसभा टिकट सिर्फ संगठन के बड़े नेताओं से नजदीकी के दम पर हासिल करना आसान नहीं होगा। पार्टी इस बार 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार प्रदर्शन को टिकट की कसौटी बनाने की तैयारी में है। किस विधायक के क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी को कितनी बढ़त मिली, कहां पार्टी पिछड़ी और 2022 के मुकाबले वोट में कितना बदलाव आया—इन आंकड़ों का असर संभावित टिकट पर पड़ सकता है। इस जमीनी रिपोर्ट को तैयार करने की जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी विनोद तावडे के कंधों पर होगी।
2024 का प्रदर्शन खोलेगा विधायकों की टिकट फाइल
भाजपा टिकट वितरण से पहले मौजूदा विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी रिकॉर्ड खंगाल सकती है। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को अपने विधानसभा क्षेत्र में कितनी बढ़त मिली थी। जिन विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा लोकसभा प्रत्याशी बढ़त हासिल नहीं कर सके थे, उनकी दावेदारी पर पार्टी गंभीरता से विचार कर सकती है। वहीं जिन क्षेत्रों में बढ़त मिली, वहां भी केवल जीत का आंकड़ा पर्याप्त नहीं माना जाएगा। 2022 विधानसभा चुनाव की तुलना में 2024 में वोट कितना बढ़ा या घटा, यह भी टिकट के आकलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यानी 2024 में बढ़त दिलाने वाला विधायक भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाएगा। यदि उसके क्षेत्र में 2022 के मुकाबले भाजपा के वोट में उल्लेखनीय गिरावट आई है तो पार्टी उसके प्रदर्शन की अलग से समीक्षा कर सकती है।
बूथ तक पहुंचेगा तावडे का टिकट आकलन
इसी चुनावी रिकॉर्ड को जमीनी फीडबैक से जोड़ने के लिए तावडे उत्तर प्रदेश में लगातार प्रवास करेंगे। उनका पहला बड़ा चुनावी प्रवास 16 से 22 सितंबर के बीच प्रस्तावित है। इस दौरान वह 15 जिलों में जिला और मंडल पदाधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन की स्थिति के साथ यह भी समझने की कोशिश होगी कि विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक या टिकट के संभावित दावेदार की वास्तविक पकड़ कितनी है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, संगठन के साथ तालमेल और क्षेत्र में नेता की मौजूदगी जैसे पहलुओं का फीडबैक टिकट के समीकरण में महत्वपूर्ण हो सकता है।
दिल्ली की पैरवी से ज्यादा जमीन का हिसाब
टिकट के दावेदारों ने अभी से दिल्ली में सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। लेकिन पार्टी के भीतर संकेत दिया जा रहा है कि सिर्फ बड़े नेताओं से संपर्क और पैरवी दावेदारी को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। दावेदारों को अपने विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहना होगा। बूथ स्तर तक संगठन के काम में उनकी भूमिका और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को भी देखा जाएगा। दूसरे शब्दों में, पार्टी टिकट मांगने वाले नेताओं का “जमीनी हिसाब” तैयार करना चाहती है। यही वजह है कि तावडे के क्षेत्रीय प्रवास को सिर्फ संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं माना जा रहा। इन दौरों से मिलने वाला फीडबैक संभावित उम्मीदवारों के आकलन में इस्तेमाल हो सकता है।
लोकसभा नतीजों से विधानसभा की तस्वीर पढ़ेगी भाजपा
भाजपा के लिए 2024 लोकसभा चुनाव का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव में उसे उसी संगठनात्मक नेटवर्क और उन्हीं विधानसभा क्षेत्रों में उतरना है। पार्टी यह समझना चाहती है कि लोकसभा चुनाव में कमजोर प्रदर्शन के पीछे स्थानीय स्तर पर क्या कारण रहे और क्या वे कमजोरियां अब भी कायम हैं। मौजूदा विधायकों के मामले में यह आकलन और महत्वपूर्ण हो सकता है। किसी क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी को बढ़त न मिलना या 2022 के मुकाबले वोट में गिरावट आना स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता, संगठन की सक्रियता और चुनावी प्रबंधन से जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि अंतिम टिकट का फैसला केवल इन आंकड़ों पर निर्भर होगा, लेकिन 2024 का विधानसभा-वार चुनावी रिकॉर्ड दावेदारों की छंटनी के महत्वपूर्ण इनपुट में शामिल हो सकता है।
बीएल संतोष की समीक्षा से तेज होगी तैयारी
भाजपा के महामंत्री संगठन बीएल संतोष 11 सितंबर को लखनऊ पहुंचकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद तावडे का जिलों में प्रस्तावित प्रवास संगठन और संभावित दावेदारों की जमीनी स्थिति का फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। पार्टी नेताओं के मुताबिक विधानसभा चुनाव तक तावडे का ज्यादातर समय उत्तर प्रदेश में ही गुजर सकता है। ऐसे में टिकट के दावेदारों के लिए इस बार संकेत साफ है, दिल्ली में परिक्रमा से ज्यादा अपने विधानसभा क्षेत्र में पराक्रम और 2024 के चुनावी प्रदर्शन का हिसाब मायने रखेगा।


