सीएम योगी ने कारपेट एक्सपो में किया ऐलान; 1,340 करोड़ की 112 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिलने का भी दावा
भारत 19/ लखनऊ। भदोही जिले की पहचान फिर बदलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को घोषणा की कि अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह ऐलान भदोही में आयोजित 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती समारोह में किया। उन्होंने जिले के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया अलग चरण में पूरी होगी।
संत रविदास नगर भदोही होगा नया नाम
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि अब भदोही जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब जिले में 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। भदोही के नाम को लेकर पहले भी बदलाव हो चुका है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार जिले का गठन 1994 में वाराणसी से अलग करके किया गया था। बाद में इसका नाम संत रविदास नगर किया गया और फिर भदोही नाम प्रचलन में आया। अब मुख्यमंत्री ने इसे फिर संत रविदास नगर भदोही के नाम से पहचान देने की घोषणा की है।
1,340 करोड़ की 112 परियोजनाओं की सौगात
नाम परिवर्तन के ऐलान के साथ भदोही को विकास परियोजनाओं की भी बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री ने 112 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिनकी कुल लागत 1,340 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल, अवस्थापना और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। इससे नाम परिवर्तन की घोषणा के साथ कार्यक्रम में जिले के विकास का एजेंडा भी प्रमुखता से सामने आया।
50वें कारपेट एक्सपो में जुटे विदेशी खरीदार
मुख्यमंत्री ने भदोही में आयोजित 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो का उद्घाटन भी किया। चार से सात अक्टूबर तक आयोजित इस एक्सपो में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों और फ्लोर कवरिंग उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने रखा जा रहा है। एक्सपो में करीब 250 प्रदर्शक और 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कारीगरों और निर्यातकों से संवाद कर कालीन उद्योग में तकनीक, डिजाइन और बाजार की भूमिका पर जोर दिया। भदोही की पहचान देश के प्रमुख कालीन उत्पादन और निर्यात केंद्रों में होती है। मुख्यमंत्री ने इसी औद्योगिक पहचान को नई तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने की जरूरत बताई।
2,500 एमएसएमई, पांच लाख रोजगार का दावा
मुख्यमंत्री के मुताबिक भदोही में करीब 2,500 एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं और कालीन उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। उन्होंने जिले के कालीन उद्योग को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना से मिले बाजार और तकनीकी सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी का सिल्क एवं कारपेट क्लस्टर देश के कालीन निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग भी प्राप्त है।
50 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा भी किया। उनके अनुसार 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों की ग्राउंडब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि 7.5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं जल्द धरातल पर आने की दिशा में हैं। ये आंकड़े मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में दिए गए हैं। उन्होंने निवेश के संदर्भ में प्रदेश की कनेक्टिविटी, औद्योगिक ढांचे और कानून-व्यवस्था का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले की तुलना में प्रदेश में कारोबार और निवेश का माहौल बदला है।
2017 से पहले के हालात पर विपक्ष को घेरा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने उस दौर को दंगा, कर्फ्यू, अराजकता और माफियागिरी से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे माहौल में कारोबार और निवेश प्रभावित होते थे। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक वक्तव्य है। इसके विपरीत उन्होंने मौजूदा सरकार के कार्यकाल में सुरक्षा, कनेक्टिविटी, तकनीक और बाजार के विस्तार को उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण से जोड़ा।
कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर
भदोही में नाम परिवर्तन की घोषणा के साथ कालीन उद्योग पर मुख्यमंत्री का जोर खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। जिले की अर्थव्यवस्था में कालीन कारोबार की बड़ी भूमिका है और बड़ी संख्या में कारीगर इससे जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, डिजाइन और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और व्यापारिक सुविधाएं जरूरी हैं।


