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आजम खान और जौहर ट्रस्ट पर ED का शिकंजा, नई FIR दर्ज

  • रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज हुआ मुकदमा, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज; जेल में आठ घंटे पूछताछ के अगले दिन हुई कार्रवाई

भारत 19/ लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर रामपुर के अजीमनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। ईडी के डिप्टी डायरेक्टर पीयूष एस. थ्रोट की शिकायत पर हुई इस कार्रवाई में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर हुए खर्च, धन के स्रोत और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।

जेल में आठ घंटे पूछताछ के अगले दिन दर्ज हुई FIR

एफआईआर से पहले 13 अक्टूबर को ईडी की टीम ने रामपुर जेल में आजम खान से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। जांच एजेंसी जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय लेन-देन, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च और धन के स्रोत की पड़ताल कर रही है। पूछताछ के अगले दिन पुलिस में शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज होने से मामले में जांच का दायरा बढ़ गया है।

494 करोड़ की अनुमानित लागत, घोषित खर्च 78 करोड़

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण खर्च को लेकर सामने आए आंकड़े जांच का अहम आधार हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर की इमारतों की अनुमानित निर्माण लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं, वित्त वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच ट्रस्ट की ओर से आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च घोषित किए जाने की बात सामने आई है। इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 416.14 करोड़ रुपये का अंतर है। ईडी इस अंतर के कारणों, निर्माण पर वास्तविक खर्च और धन के स्रोत की जांच कर रही है। हालांकि, अनुमानित निर्माण लागत और घोषित खर्च के बीच अंतर अपने आप में वित्तीय अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं है। इसकी वास्तविक स्थिति जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की पड़ताल

जांच से जुड़े आरोपों में सरकारी कार्यों के लिए जारी धन और निर्माण सामग्री का यूनिवर्सिटी परिसर में इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी शामिल है। मीडिया रिपोर्टों में सरकारी धन से कराए गए कुछ कार्यों का मूल्य करीब 85.81 करोड़ रुपये बताया गया है। एजेंसी इन कार्यों से जुड़े भुगतान, ठेकेदारों की भूमिका और यूनिवर्सिटी के निर्माण के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है। दान और अन्य स्रोतों से प्राप्त धन के इस्तेमाल की भी पड़ताल की जा रही है।

ट्रस्ट और ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में

ईडी की शिकायत के आधार पर दर्ज एफआईआर में आजम खान और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले की जांच आगे बढ़ेगी। संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन और निर्माण कार्यों के रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 61, 316(5) और 318(4) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं का भी उल्लेख है। धाराओं और आरोपों की पुष्टि एफआईआर की प्रमाणित प्रति से की जानी चाहिए।

जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ईडी की जांच का केंद्र निर्माण खर्च, धन के स्रोत और सरकारी संसाधनों के कथित इस्तेमाल से जुड़े सवाल हैं। नई एफआईआर के बाद इन पहलुओं पर जांच आगे बढ़ेगी। फिलहाल आरोप जांच के अधीन हैं और उनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होनी बाकी है।

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