- SIT की जांच में चढ़ावे से जुड़ी 105 संदिग्ध घटनाएं सामने आईं, आठ आरोपी बनाए गए और 79.85 लाख रुपये बरामद हुए; सुप्रीम कोर्ट ने फोरेंसिक ऑडिटर को जांच में शामिल करने के निर्देश दिए, 2 नवंबर को सुनवाई होगी।
भारत 19/ नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित चोरी का मामला अब मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और निगरानी तक पहुंच गया है। काउंटिंग रूम की CCTV फुटेज में 105 संदिग्ध घटनाएं सामने आने के बाद जांच सिर्फ रकम की बरामदगी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सवाल भी सामने है कि मंदिर की व्यवस्था में ऐसी घटनाओं की निगरानी कैसे होती रही। SIT की जांच में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है और 79.85 लाख रुपये बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की वित्तीय पड़ताल को मजबूत करने के लिए फोरेंसिक ऑडिटर को जांच टीम में शामिल करने का निर्देश दिया है।
CCTV जांच में सामने आईं 105 घटनाएं
SIT की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के काउंटिंग रूम की CCTV फुटेज की पड़ताल के दौरान 105 मौकों पर चढ़ावे की नकदी को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से हटाने या छिपाने की घटनाएं सामने आईं। जांच टीम ने CCTV के अलावा बैंक खातों, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की भी पड़ताल की। इसी आधार पर आरोपियों की भूमिका तय करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मामला किसी एक कथित घटना के बजाय चढ़ावे की गिनती और निगरानी की पूरी व्यवस्था से जुड़ा दिखाई देता है।
आठ आरोपी, 79.85 लाख की बरामदगी
जांच के बाद आठ लोगों को आरोपी बनाया गया और अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक आरोपपत्र में बड़ी संख्या में गवाहों के बयान और CCTV फुटेज को साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। जांच के दौरान कथित चोरी से संबंधित 79.85 लाख रुपये बरामद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब जांच का अहम पहलू यह है कि कथित तौर पर रकम निकालने वालों की भूमिका के साथ उस व्यवस्था की भी पड़ताल हो, जिसके तहत काउंटिंग रूम में नकदी की निगरानी की जाती थी।
चंपत राय आरोपी नहीं, गवाह
मामले में राजनीतिक बहस का एक प्रमुख कारण यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और कुछ अन्य ट्रस्ट पदाधिकारियों को आरोपी नहीं, बल्कि गवाह के रूप में शामिल किया गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जांच की दिशा और कथित देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी पूछा है कि CCTV फुटेज में घटनाएं सामने आने के बाद FIR दर्ज करने में कितना समय लगा।
इन आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
पूरे राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी का मामला नहीं
जांच से जुड़ी रिपोर्टों में यह अहम अंतर सामने आता है कि मौजूदा मामला राम मंदिर को मिले पूरे चंदे में वित्तीय अनियमितता साबित होने का नहीं है। SIT ने मंदिर को मिले चांदी और अन्य मूल्यवान चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की। रिपोर्टों के मुताबिक 200 किलो और 38.288 किलो चांदी की ईंटों, चांदी की माला, चरण पादुका और रामचरित मानस से संबंधित दान के रिकॉर्ड में ऐसी विसंगति नहीं मिली, जिसे कथित नकदी चोरी से जोड़ा जा सके। 803 मूल्यवान वस्तुओं की रसीदों और रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया, जबकि 86 मूल्यवान वस्तुओं की रसीद उपलब्ध नहीं होने का उल्लेख भी जांच में आया है। इसलिए खबर का केंद्र फिलहाल काउंटिंग रूम में कथित नकदी चोरी और उससे जुड़ी निगरानी व्यवस्था है, न कि मंदिर को मिले पूरे दान की अनियमितता।
फोरेंसिक ऑडिट से खुलेगा वित्तीय लेनदेन
सुप्रीम कोर्ट ने जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया है। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि फोरेंसिक ऑडिट में केवल खातों का मिलान नहीं, बल्कि रकम के लेनदेन, रिकॉर्ड और संभावित वित्तीय विसंगतियों की गहराई से पड़ताल की जाती है। इससे जांच में CCTV और पुलिस साक्ष्यों के साथ पैसे के प्रवाह और लेखा रिकॉर्ड का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा। यही प्रक्रिया यह स्पष्ट करने में मदद कर सकती है कि बरामद रकम और सामने आई घटनाओं के बीच क्या संबंध है।
विवाद में राजनीति का एंगल भी जुड़ा
मामले को लेकर कांग्रेस और विश्व हिंदू परिषद के रुख अलग-अलग हैं। कांग्रेस जांच का दायरा व्यापक करने की मांग कर रही है, जबकि VHP ने मामले का राजनीतिकरण नहीं करने और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की बात कही है। इस बीच जांच का वास्तविक निष्कर्ष अदालत के सामने आने वाले साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगा।
2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होनी है। इससे पहले SIT की जांच और फोरेंसिक ऑडिट की प्रक्रिया मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है। फिलहाल 105 संदिग्ध घटनाओं ने एक बुनियादी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है, अगर काउंटिंग रूम में लगातार ऐसी घटनाएं हुईं, तो मंदिर की निगरानी व्यवस्था इन्हें समय रहते क्यों नहीं रोक सकी? यही सवाल इस पूरे विवाद को केवल कथित चोरी के आरोप से आगे ले जाकर जवाबदेही और व्यवस्था की जांच का मुद्दा बना रहा है।


