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रूस में 70 हजार भारतीयों के लिए नौकरी का रास्ता

  • जयशंकर ने संसदीय समिति को दी जानकारी, निर्माण और लॉजिस्टिक्स में कुशल कामगारों की मांग, भारत-रूस श्रम समझौते से वैध भर्ती का रास्ता मजबूत, सेना से जुड़े भारतीयों की वापसी का मुद्दा भी उठा

भारत 19/ नई दिल्ली। रूस ने इस साल करीब 70 हजार भारतीय कुशल कामगारों को लेने पर सहमति जताई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों पर संसदीय परामर्श समिति की बैठक में यह जानकारी दी। रूस में भारतीय कामगारों की जरूरत खास तौर पर निर्माण और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बताई गई है। हालांकि, 70 हजार का आंकड़ा तत्काल 70 हजार नियुक्तियों की गारंटी नहीं है। रूस की ओर से इस साल इतने भारतीय कुशल कामगारों को लेने की सहमति को दर्शाता है। वास्तविक भर्ती संबंधित क्षेत्रों की जरूरत, नियोक्ता, वीजा और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर होगी।

रूस में श्रमिकों की कमी बनी बड़ा कारण

रूस के सामने लंबे समय से कुशल और अर्धकुशल कामगारों की कमी चुनौती बनी हुई है। यूक्रेन युद्ध, जनसांख्यिकीय दबाव और विदेशी श्रमिकों की उपलब्धता में बदलाव ने वहां के श्रम बाजार पर असर डाला है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार रूस में लाखों कर्मचारियों की कमी का अनुमान लगाया गया है। निर्माण और बुनियादी ढांचे से लेकर लॉजिस्टिक्स तक कई क्षेत्रों में अतिरिक्त श्रम की जरूरत ने भारत जैसे देशों के लिए अवसर पैदा किया है। भारत की बड़ी युवा आबादी और तकनीकी तथा व्यावसायिक कौशल रखने वाले कामगारों को देखते हुए रूस अब भारतीय श्रम बाजार को महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में देख रहा है।

श्रम समझौते ने बनाया कानूनी आधार

भारत-रूस के बीच श्रमिकों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए अस्थायी श्रम गतिविधियों से जुड़ा समझौता दिसंबर 2025 में हुआ था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुए इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के दूसरे देश में अस्थायी रोजगार से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करना है। इससे भारतीयों की रूस में भर्ती को अधिक औपचारिक व्यवस्था मिलने की उम्मीद है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नागरिकों के लिए रूसी वर्क परमिट की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

किन क्षेत्रों में मिल सकता है ज्यादा काम

रूस में भारतीयों के लिए अवसर सिर्फ निर्माण तक सीमित नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक लॉजिस्टिक्स, कपड़ा, डिलीवरी सेवाओं और अन्य तकनीकी कामों में भी भारतीय श्रमिकों की मांग रही है। 70 हजार के प्रस्ताव का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि भर्ती में किस कौशल को प्राथमिकता मिलती है और भारतीय कामगारों के लिए किस तरह के रोजगार अनुबंध उपलब्ध कराए जाते हैं। यही कारण है कि रूस जाने वाले कामगारों के लिए नियोक्ता की वैधता, वर्क परमिट, वेतन, काम की प्रकृति और अनुबंध की शर्तों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

रोजगार के साथ भारत का व्यापारिक दांव

संसदीय समिति की बैठक में जयशंकर ने भारत-रूस आर्थिक रिश्तों के दूसरे पहलुओं की भी जानकारी दी। भारत रूस को ऑटोमोबाइल, फार्मा, खाद्य, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन मुक्त व्यापार समझौता और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर जैसी पहल भी दोनों देशों के आर्थिक संपर्क को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हैं। इस तरह भारतीय कामगारों के लिए रूस में बढ़ता रोजगार अवसर दोनों देशों के व्यापक आर्थिक रिश्तों से भी जुड़ रहा है।

रूस की सेना में पहुंचे भारतीयों का मुद्दा

बैठक में रूस की सेना से जुड़े भारतीय नागरिकों की वापसी का मामला भी उठा। जयशंकर ने बताया कि भारत सरकार रूसी अधिकारियों के साथ संपर्क में है और ऐसे भारतीयों की रिहाई तथा स्वदेश वापसी के प्रयास जारी हैं। सरकार के अनुसार करीब 140 भारतीय वापस लौट चुके हैं, जबकि लगभग 55 भारतीयों के रूस की सेना से जुड़े होने की जानकारी पर रूसी पक्ष से बातचीत चल रही है। भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर गलत तरीके से रूसी सेना में भेजने वाले एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने रूस में रोजगार के नाम पर होने वाली भर्ती में सुरक्षित और अधिकृत चैनल की जरूरत को भी रेखांकित किया है।

भारतीय कामगारों के लिए अवसर के साथ सावधानी

रूस का यह फैसला निर्माण, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी क्षेत्र में अनुभव रखने वाले भारतीयों के लिए नए अवसर खोल सकता है। लेकिन विदेश में नौकरी को केवल वेतन या भर्ती संख्या के आधार पर देखना जोखिमपूर्ण हो सकता है। कामगारों को नियुक्ति से पहले वीजा, रोजगार अनुबंध, नियोक्ता, बीमा, रहने की व्यवस्था और काम की वास्तविक प्रकृति की पुष्टि करनी होगी। खासकर रूस से जुड़े हालिया मामलों को देखते हुए किसी अनधिकृत एजेंट के झांसे में आने से बचना जरूरी होगा।

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