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चढ़ावा चोरी के बाद राम मंदिर में कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य

  • पुलिस वेरिफिकेशन और चरित्र प्रमाणपत्र जरूरी, परिवार-रिश्तेदारों की जानकारी भी मांगी; जून की चढ़ावा चोरी के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

भारत 19

अयोध्या। राम मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों की पृष्ठभूमि अब पूरी तरह जांची जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के सभी कर्मचारियों का 100 प्रतिशत पुलिस वेरिफिकेशन कराने का फैसला किया है। इसके साथ पुलिस का चरित्र प्रमाणपत्र भी अनिवार्य किया गया है। कर्मचारियों से उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों की विस्तृत जानकारी भी मांगी जा रही है। ट्रस्ट का यह फैसला ऐसे समय आया है जब मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा चल रही है।

जून की चढ़ावा चोरी के बाद क्यों बढ़ी सख्ती?

कर्मचारियों के शत-प्रतिशत सत्यापन की जरूरत की सबसे बड़ी वजह राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का वह मामला है, जो जून में सामने आया था। इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था और सभी आरोपी जेल में हैं। मामले में पिछले सप्ताह करीब 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। यानी मंदिर प्रशासन अब केवल बाहरी सुरक्षा घेरे को मजबूत करने के बजाय अंदर काम करने वाले कर्मचारियों की पृष्ठभूमि और उनकी पहुंच को भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बना रहा है।

कैश काउंटिंग व्यवस्था पर भी उठे थे सवाल

चढ़ावे की चोरी की जांच के दौरान मंदिर की आंतरिक व्यवस्था से जुड़े कई सवाल सामने आए। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, कैश काउंटिंग से जुड़े कुछ कर्मचारियों को आधिकारिक पहचान-पत्र जारी नहीं किए गए थे और प्रवेश के लिए ड्यूटी शीट का इस्तेमाल किया जा रहा था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ कर्मचारियों को पर्याप्त पृष्ठभूमि जांच के बिना संवेदनशील काउंटिंग क्षेत्र तक पहुंच मिल रही थी। इसी संदर्भ में अब ट्रस्ट ने कर्मचारियों के सत्यापन को व्यापक बनाने का फैसला किया है। इसका दायरा सिर्फ नाम और पुलिस रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। परिवार और रिश्तेदारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि कर्मचारियों की पृष्ठभूमि का विस्तृत रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध रहे।

अब पुलिस वेरिफिकेशन के साथ चरित्र प्रमाणपत्र भी जरूरी

नई व्यवस्था में मंदिर के प्रत्येक कर्मचारी के लिए पुलिस वेरिफिकेशन और पुलिस की ओर से जारी चरित्र प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। ट्रस्ट कर्मचारियों की व्यक्तिगत और पारिवारिक जानकारी भी संकलित करेगा। यह प्रक्रिया मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने पिछले महीने ही पदभार संभाला है।

चढ़ावे की गिनती वाले कर्मचारियों पर पहले ही बढ़ी निगरानी

चढ़ावा चोरी के बाद मंदिर के कैश-काउंटिंग क्षेत्र में सुरक्षा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, गणना कक्ष के आसपास निजी सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई और प्रवेश-निकास पर जांच कड़ी की गई। सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के साथ निजी सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई गई थी। अब कर्मचारियों के 100 प्रतिशत सत्यापन का फैसला इसी सुरक्षा श्रृंखला की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

मंदिर प्रशासन में भी हो रहा बदलाव

कर्मचारी सत्यापन अकेला बदलाव नहीं है। ट्रस्ट ने हाल में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा तथा गोपाल राव को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ कर्मचारियों की निगरानी बढ़ाने और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है। 
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और चढ़ावे की राशि भी बड़ी मात्रा में आती है। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा केवल बाहरी सुरक्षा घेरे तक सीमित नहीं रह सकती। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद अब प्रशासन का फोकस मंदिर के भीतर काम करने वाले हर व्यक्ति की पहचान, पृष्ठभूमि और जवाबदेही तय करने पर है। 100 प्रतिशत पुलिस वेरिफिकेशन इसी बदली हुई सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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