न पूर्ण प्रतिबंध होगा, न 24 घंटे आतिशबाजी की छूट; तय समय में चुनिंदा पटाखों की अनुमति के संकेत, CPCB रिपोर्ट के बाद अंतिम फैसला
भारत 19
नई दिल्ली। दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर में पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इस बार पूर्ण प्रतिबंध और पूरी तरह खुली छूट के बीच का रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि वह पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन पूरे दिन आतिशबाजी की अनुमति भी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय कुछ अनुमत पटाखों को निर्धारित समय-सीमा में चलाने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से दिवाली से जुड़ी लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जबकि पूरे दिन पटाखे चलाने की अनुमति देने से वायु प्रदूषण बढ़ेगा और बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों तथा अन्य जीवों पर असर पड़ेगा। इसलिए अदालत ने पटाखों के प्रकार और उनके इस्तेमाल के लिए निश्चित समय तय करने की जरूरत बताई है।
अभी अंतिम समय तय नहीं, 15 अक्टूबर अहम तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि दिल्ली में दिवाली के दिन पटाखे कितने बजे से कितने बजे तक चलाए जा सकेंगे। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बेरियम आधारित पटाखों के पर्यावरणीय प्रभाव पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक समय मांगा था। अदालत ने यह समय दे दिया है। रिपोर्ट मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन श्रेणियों के पटाखों की अनुमति दी जा सकती है। इसका मतलब यह है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दिवाली पर दिल्ली में पटाखे चलाने का अंतिम समय तय हो गया है। फिलहाल अदालत ने अपना रुख और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की है।
नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों पर भी रास्ता खुला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले नेक्स्ट-जेनरेशन जॉइंट ग्रीन क्रैकर्स, जिन्हें आम तौर पर ‘लड़ी’ कहा जाता है, के निर्माण और बिक्री की अनुमति के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार करने की दिशा में सहमति जताई। हालांकि इन पटाखों को निर्धारित उत्सर्जन, शोर और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। इससे यह स्पष्ट है कि अदालत का मौजूदा रुख सभी पटाखों को एक साथ प्रतिबंधित करने के बजाय कम प्रदूषण वाले और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले पटाखों को नियंत्रित तरीके से अनुमति देने की दिशा में है।
2015 से चल रहा है पटाखों और प्रदूषण का मामला
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कोई नई बात नहीं है। पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण को लेकर मामला वर्ष 2015 से अदालत के सामने है। इसके बाद अलग-अलग वर्षों में पटाखों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किए गए। 2025 में भी अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रीन पटाखों और उनके इस्तेमाल को लेकर कई शर्तें तय की थीं। अदालत ने प्रदूषण में पटाखों के योगदान का वैज्ञानिक आकलन कराने के लिए CPCB और CSIR-NEERI जैसी संस्थाओं की भूमिका पर भी जोर दिया था।
प्रदूषण बनाम दिवाली की परंपरा, संतुलन पर जोर
इस बार सुनवाई में अदालत के सामने मूल सवाल यही है कि दिवाली की आतिशबाजी और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। कोर्ट ने एक तरफ धार्मिक और सामाजिक भावनाओं का उल्लेख किया, तो दूसरी तरफ बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर प्रदूषण के प्रभाव को भी महत्वपूर्ण माना। यही वजह है कि अदालत ने न तो पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता चुना है और न ही 24 घंटे पटाखे चलाने की छूट देने का। आगे की व्यवस्था में कौन से पटाखे, कितनी देर और किन शर्तों के साथ चलेंगे, इसका निर्धारण CPCB की रिपोर्ट और अदालत के अगले आदेश के बाद स्पष्ट होगा।
दिल्ली-एनसीआर के लिए क्या बदलेगा?
अगर अदालत का प्रस्तावित मॉडल अंतिम आदेश में लागू होता है तो दिवाली पर पटाखों के इस्तेमाल को समय-सीमा और पटाखों की निर्धारित श्रेणियों से बांधा जा सकता है। इसका सीधा असर पटाखा निर्माताओं, विक्रेताओं और दिल्ली-एनसीआर के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होगा। अंतिम नियम CPCB की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आगामी आदेश के बाद सामने आएंगे।


