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निफ्टी के भरोसे पर दो साल में पड़ी 12 प्रतिशत की चोट

  • सबसे प्रमुख निवेश बेंचमार्क भी नहीं दे पाया सकारात्मक रिटर्न, एक लाख रुपये पर करीब 12 हजार रुपये की सीधी कमी

भारत 19

नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों के बीच Nifty 50 को प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है। अलग-अलग कंपनियों में निवेश के बजाय निफ्टी की 50 प्रमुख कंपनियों पर आधारित इंडेक्स फंड या ETF के जरिये निवेश करना जोखिम बांटने का एक तरीका माना जाता है। हालांकि पिछले दो वर्षों में निफ्टी 50 का प्रदर्शन निवेशकों की इस उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। 30 सितंबर 2024 से 29 सितंबर 2026 के बीच Nifty 50 करीब 12 प्रतिशत नीचे आ गया। यानी इस अवधि में सूचकांक से जुड़े निवेश में पूंजी बढ़ने के बजाय घट गई।

30 सितंबर 2024 को Nifty 50 का बंद स्तर 25,810.85 अंक था। 29 सितंबर 2026 को यह 22,716.20 अंक पर बंद हुआ। इस तरह दो वर्षों में निफ्टी 3,094.65 अंक यानी 11.99 प्रतिशत गिर गया। यदि 30 सितंबर 2024 को निफ्टी को ट्रैक करने वाले किसी निवेश उत्पाद में एक लाख रुपये लगाए गए होते तो केवल सूचकांक की चाल के हिसाब से उसकी कीमत करीब 88,010 रुपये होती। यानी करीब 11,990 रुपये की कमी आती। वास्तविक इंडेक्स फंड या ETF का रिटर्न खर्च, ट्रैकिंग एरर और अन्य कारणों से अलग हो सकता है।

पहले तेजी, फिर ऊंचाई से लगातार दूरी

निफ्टी के दो साल के सफर को देखें तो तस्वीर और स्पष्ट होती है। सितंबर 2024 में बाजार मजबूत स्थिति में था। इसके बाद उतार-चढ़ाव बढ़ा और निफ्टी अपनी ऊंचाई से नीचे आया। बाजार कई बार संभला, लेकिन 2024 में बनी ऊंचाई को टिकाऊ तरीके से पार नहीं कर सका। 29 सितंबर 2026 को Nifty 50 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 अंक पर बंद हुआ। यह अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर 26,373.20 अंक से करीब 13.87 प्रतिशत नीचे था। वहीं अगस्त के अंतिम कारोबारी दिन 24,080.40 अंक के बंद स्तर की तुलना में सितंबर में 29 सितंबर तक निफ्टी 5.67 प्रतिशत गिर चुका था। यानी निवेशकों के लिए चुनौती केवल दो साल के नकारात्मक रिटर्न की नहीं है। बाजार जिस ऊंचाई तक पहुंचा था, वहां से भी निफ्टी अभी काफी नीचे है। जिन निवेशकों ने बाजार की बड़ी कंपनियों में व्यापक भागीदारी के लिए निफ्टी आधारित निवेश चुना, उनके लिए यह अवधि पूंजी वृद्धि के लिहाज से कमजोर रही।

इंडेक्स बाजार का जोखिम खत्म नहीं करता

Nifty 50 में शामिल कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों की होती हैं। इसलिए किसी एक कंपनी के खराब प्रदर्शन का असर पूरे निवेश पर उतना नहीं पड़ता, जितना किसी एक शेयर में निवेश करने पर पड़ सकता है। लेकिन इससे बाजार का जोखिम खत्म नहीं होता। पिछले दो वर्षों का प्रदर्शन इसी अंतर को दिखाता है। कंपनियों के बीच जोखिम बांटने के बावजूद पूरे बाजार में गिरावट आने पर इंडेक्स भी नीचे जाता है। यानी निफ्टी में निवेश किसी एक कंपनी से जुड़े जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन बाजार की व्यापक गिरावट से निवेशक पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। सितंबर 2026 में निफ्टी पर दबाव के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारकों का असर बताया गया है। इससे भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।

डिविडेंड जोड़ने पर तस्वीर कुछ बेहतर

निफ्टी के ऊपर दिए गए 11.99 प्रतिशत के रिटर्न की गणना Price Index के आधार पर है। इसमें निफ्टी की कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड शामिल नहीं होता। डिविडेंड को दोबारा निवेश मानकर Nifty 50 Total Return Index यानी TRI देखा जाए तो निवेशक का रिटर्न Price Index की तुलना में बेहतर रहता है। सितंबर 2024 के अंत में Nifty 50 TRI का स्तर 38,315 के आसपास था और उस समय एक साल का TRI रिटर्न करीब 33 प्रतिशत था। इसलिए केवल Nifty 50 Price Index की दो साल की 11.99 प्रतिशत गिरावट को डिविडेंड सहित निवेश के वास्तविक रिटर्न के बराबर नहीं माना जा सकता। इंडेक्स फंड या ETF में निवेश करने वाले व्यक्ति का वास्तविक रिटर्न संबंधित उत्पाद के खर्च, ट्रैकिंग एरर, डिविडेंड और निवेश की तारीख जैसे कारकों से भी प्रभावित होता है।

एक लाख रुपये के निवेश में दिखता है असर

निफ्टी की दो साल की चाल को समझने के लिए एक लाख रुपये का उदाहरण तस्वीर को आसान बनाता है। 30 सितंबर 2024 के 25,810.85 अंक के स्तर को आधार मानें और 29 सितंबर 2026 के 22,716.20 अंक पर तुलना करें तो इंडेक्स की चाल के अनुपात में एक लाख रुपये की कीमत करीब 88,010 रुपये रह जाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर Nifty 50 इंडेक्स फंड या ETF में निवेश करने वाले व्यक्ति को ठीक 11,990 रुपये का नुकसान हुआ होगा। वास्तविक रिटर्न संबंधित उत्पाद की लागत, ट्रैकिंग अंतर और डिविडेंड के प्रभाव से अलग हो सकता है।

दो साल का प्रदर्शन बाजार जोखिम की तस्वीर

Nifty 50 का दो साल का प्रदर्शन यह दिखाता है कि प्रमुख कंपनियों में निवेश को एक इंडेक्स में बांट देने से किसी एक शेयर का जोखिम कम हो सकता है, लेकिन बाजार में गिरावट का जोखिम बना रहता है। 30 सितंबर 2024 से 29 सितंबर 2026 के बीच निफ्टी का Price Index करीब 12 प्रतिशत नीचे रहा। हालांकि डिविडेंड को शामिल करने वाले Nifty 50 TRI की तस्वीर इससे अलग होगी। इसलिए निफ्टी आधारित निवेश के प्रदर्शन को समझने के लिए Price Return और Total Return दोनों को देखना जरूरी है। पिछले दो वर्षों का आंकड़ा ऐसे समय में आया है जब निफ्टी आधारित निवेश छोटे और खुदरा निवेशकों के बीच महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में निफ्टी की यह अवधि बाजार के व्यापक जोखिम और इंडेक्स निवेश की सीमाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ देती है।

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