- सूरज की सीधी किरणों की लैब में होगी नकल, NexPV Energy Systems के साथ करार; CPV मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता जांच का रास्ता खुलेगा
भारत 19
कानपुर। सूरज की सीधी किरणों को बिजली में बदलने वाली अगली पीढ़ी की सौर तकनीक के परीक्षण के लिए आईआईटी कानपुर देश में नई सुविधा विकसित करने जा रहा है। बेंगलुरु स्थित NexPV Energy Systems के साथ मिलकर संस्थान भारत का पहला CPV Sun Simulator तैयार करेगा। इसके जरिए प्रयोगशाला में सूर्य की सीधी रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार कर Concentrated Photovoltaic (CPV) मॉड्यूल की क्षमता, प्रदर्शन और गुणवत्ता का परीक्षण किया जा सकेगा। परियोजना के लिए आईआईटी कानपुर और NexPV Energy Systems में MoU) हुआ है। आईआईटी कानपुर के रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी पार्क फाउंडेशन Technopark@IITK की सदस्य कंपनी Invariance Automation भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी। परियोजना का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है।
सामान्य सोलर पैनल से अलग है CPV तकनीक
CPV तकनीक सामान्य सोलर पैनलों से अलग तरीके से काम करती है। इसमें बड़े क्षेत्र में सोलर सेल लगाने के बजाय लेंस की मदद से सूर्य की रोशनी को छोटे और अधिक क्षमता वाले सेल पर केंद्रित किया जाता है। इन सेल में अर्धचालक की कई परतें होती हैं। सूर्य के प्रकाश का अलग-अलग हिस्सा इन परतों द्वारा ग्रहण किया जाता है, जिससे प्रकाश को बिजली में बदलने की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। CPV की एक खासियत यह है कि मॉड्यूल में सोलर सेल के लिए बहुत कम जगह की जरूरत होती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, CPV सेल मॉड्यूल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में होते हैं। NexPV के अनुसार, उसकी CPV प्रणालियों को लगाने में सामान्य सौर तकनीक की तुलना में करीब आधी जमीन की जरूरत पड़ सकती है।
CPV के परीक्षण में रोशनी सबसे अहम
CPV मॉड्यूल की जांच सामान्य सोलर पैनलों की तरह साधारण Sun Simulator से नहीं की जा सकती। CPV सिस्टम सूर्य की सीधी और लगभग समानांतर किरणों पर काम करते हैं। लेंस इन किरणों को बेहद सीमित क्षेत्र में केंद्रित करते हैं। ऐसे में परीक्षण के दौरान रोशनी की दिशा, तीव्रता और सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्सों का संतुलन सटीक रखना जरूरी होता है। आईआईटी कानपुर की टीम जिस सिमुलेटर पर काम करेगी, वह प्रयोगशाला में इन परिस्थितियों को नियंत्रित तरीके से दोहराने के लिए तैयार किया जाएगा। इससे CPV मॉड्यूल के प्रदर्शन का नियंत्रित परिस्थितियों में अधिक सटीक आकलन किया जा सकेगा।
लैब से फैक्टरी तक पहुंचेगी तकनीक
प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कहा कि भारत को 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने के लिए सौर ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा। इसके लिए नई सौर तकनीक विकसित करने के साथ उनके परीक्षण और प्रदर्शन को मापने की देश के भीतर क्षमता भी बढ़ानी होगी। CPV मॉड्यूल सामान्य सौर पैनलों से अलग तरीके से काम करते हैं। इसलिए इनके लिए विशेष परीक्षण सुविधा जरूरी है। परियोजना इसी जरूरत को पूरा करने और नई तकनीक को प्रयोगशाला से वास्तविक उपयोग तथा बड़े पैमाने के उत्पादन तक पहुंचाने की दिशा में काम करेगी।
कम सेल और कम जमीन पर तकनीक का फोकस
NexPV Energy Systems के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर. ने बताया कि भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 168 GW से अधिक हो चुकी है, लेकिन देश में सोलर सेल का उत्पादन अभी भी मॉड्यूल उत्पादन की तुलना में कम है। उनके अनुसार, सोलर सेल से जुड़े अनिवार्य प्रावधान लागू होने के बाद यह अंतर सौर ऊर्जा के विस्तार को प्रभावित कर सकता है। CPV में सामान्य सौर पैनलों की तुलना में सोलर सेल के लिए बहुत कम क्षेत्र की जरूरत होती है। NexPV के मुताबिक, उसकी प्रणालियों के लिए सामान्य सौर तकनीक की तुलना में करीब आधी जमीन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त सीधी धूप वाले क्षेत्रों में CPV सौर ऊर्जा के एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
भारत में ही होगी मॉड्यूल की गुणवत्ता जांच
नई परीक्षण सुविधा उपलब्ध होने के बाद उत्पादन के अंतिम चरण में कंपनियां CPV मॉड्यूल की क्षमता और गुणवत्ता की जांच देश में ही कर सकेंगी। इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन और तैनाती के लिए जरूरी गुणवत्ता आकलन की घरेलू क्षमता विकसित हो सकती है। परियोजना में Invariance Automation शुरुआती मॉडल से लेकर उत्पादन स्तर तक सिमुलेटर विकसित करने में निर्माण साझेदार के रूप में काम करेगी। इस तरह आईआईटी कानपुर की शोध क्षमता, NexPV की CPV विशेषज्ञता और Technopark@IITK से जुड़े औद्योगिक सहयोग को एक साथ लाया जाएगा।
क्या है CPV Sun Simulator
CPV Sun Simulator ऐसी विशेष परीक्षण मशीन है, जो प्रयोगशाला के भीतर सूर्य की सीधी रोशनी जैसी परिस्थितियां तैयार करती है। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि प्रकाश की दिशा और तीव्रता को नियंत्रित किया जा सके। इसका इस्तेमाल Concentrated Photovoltaic सिस्टम की क्षमता और प्रदर्शन को नियंत्रित परिस्थितियों में परखने के लिए किया जाता है। सामान्य सोलर पैनलों के परीक्षण से अलग, CPV के लिए प्रकाश की दिशा और समानांतर किरणों की गुणवत्ता विशेष महत्व रखती है।
आईआईटी कानपुर और NexPV की यह परियोजना देश में CPV तकनीक के परीक्षण और गुणवत्ता आकलन की घरेलू क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है। आगे यह सुविधा इस तकनीक को शोध से औद्योगिक उत्पादन तक ले जाने के लिए जरूरी परीक्षण ढांचा तैयार करने में मदद कर सकती है।


