Hot Topics

4000 करोड़ के लीजबैक मामले में PCS अफसर बर्खास्त

  • शहदरा की जमीन के लीजबैक में नियमों की अनदेखी और भ्रामक रिपोर्ट के आरोप; विभागीय जांच में आरोप सिद्ध, लोक सेवा आयोग की सहमति और हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने हरीश चंद्र को सेवा से किया बर्खास्त

भारत 19

लखनऊ। नोएडा के करीब 4000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। हरीश चंद्र वर्ष 2011-12 में नोएडा प्राधिकरण के सचिव थे। इसी दौरान शहदरा गांव से जुड़ी प्राधिकरण की अर्जित और कब्जे वाली जमीन के लीजबैक में नियमों के उल्लंघन और भ्रामक रिपोर्ट पेश करने के आरोप लगे थे। शासन के बर्खास्तगी आदेश के अनुसार विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में आरोप सिद्ध पाए गए थे। उसके बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

शहदरा की 3.81 लाख वर्गमीटर जमीन से जुड़ा मामला

मामला शहदरा गांव में सेक्टर 140-ए, 141, 142 और 143 के आसपास की जमीन से जुड़ा है। विभागीय कार्रवाई के रिकॉर्ड के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण के कब्जे में करीब 3,81,527 वर्गमीटर जमीन के लीजबैक में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 27 सितंबर 2013 को हरीश चंद्र के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जांच मेरठ के मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। जांच से जुड़े रिकॉर्ड में लीजबैक के लिए करीब 4,00,447 वर्गमीटर जमीन का भी उल्लेख है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया। यही आंकड़ा मौजूदा बर्खास्तगी की खबरों में 4000 करोड़ रुपये के मामले के रूप में सामने आया है।

लीजबैक में स्थानीय पात्र लोगों के लिए थी व्यवस्था

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक लीजबैक की व्यवस्था संबंधित गांव के पात्र किसानों की आबादी से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए थी। एक परिवार के लिए अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन लीजबैक किए जाने का प्रावधान बताया गया है। जांच में आरोप लगा कि इस व्यवस्था के विपरीत शहदरा से बाहर के लोगों और निजी कंपनियों के पक्ष में भी जमीन का लीजबैक किया गया। कुछ मामलों में भूखंडों का आकार 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक बताया गया है।

सर्वे में सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल नहीं हुआ

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज विभागीय आरोप के मुताबिक शहदरा की आबादी के निर्धारण के लिए सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल किया जाना था। आरोप था कि ऐसा नहीं किया गया और तैयार सर्वे रिपोर्ट में कई भू-मालिकों, निजी कंपनियों और गांव के बाहर के लोगों को आबादी क्षेत्र में शामिल किया गया। जांच में सर्वे रिपोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण कॉलम में भी तथ्यों के छिपाए जाने का आरोप दर्ज है। मसलन, कॉलम नंबर-9 में मूल काश्तकार का नाम और कॉलम नंबर-13 में विनियमितीकरण समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किए जाने की बात कही गई।

भ्रामक रिपोर्ट के आधार पर लीजबैक का आरोप

विभागीय जांच में आरोप था कि जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत अधिकारियों की समिति, नोएडा प्राधिकरण बोर्ड और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने ऐसी रिपोर्ट रखी गई, जिसमें महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया। आरोप के मुताबिक इससे शहदरा के बाहर के व्यक्तियों और निजी कंपनियों के पक्ष में लीजबैक का रास्ता बना। जांच रिपोर्ट में एस्टर इलेक्ट्रिक प्राइवेट लिमिटेड, महानंदा इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड और प्रयास गारमेंट लिमिटेड से जुड़े रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है।

विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद कार्रवाई

हरीश चंद्र के खिलाफ 7 अप्रैल 2014 को चार आरोपों वाली चार्जशीट जारी की गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में इन आरोपों का विवरण दर्ज है। शासन के बर्खास्तगी आदेश के मुताबिक विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी। बर्खास्तगी आदेश में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की 6 जनवरी 2022 की सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में दर्ज तथ्यों को भी आधार बनाया गया है।

2013 से चल रही थी अनुशासनिक कार्रवाई

इस मामले में विभागीय कार्रवाई करीब 13 साल पहले शुरू हुई थी। 27 सितंबर 2013 को जांच मेरठ के मंडलायुक्त को सौंपी गई थी। बाद में कार्रवाई में हुई देरी को लेकर मामला न्यायिक स्तर तक पहुंचा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 3 सितंबर 2026 के आदेश में अनुशासनिक कार्रवाई पूरी करने के लिए अनुशासनिक प्राधिकारी को समय दिया था। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार राज्य सरकार ने पहले के आदेशों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। सुनवाई के दौरान विभागीय कार्रवाई से संबंधित कई दस्तावेज और लोक सेवा आयोग के साथ हुए पत्राचार भी अदालत के सामने रखे गए।

विभागीय कार्रवाई के चलते IAS प्रमोशन भी अटका

न्यायिक रिकॉर्ड के मुताबिक हरीश चंद्र को वर्ष 2019 में IAS कैडर में पदोन्नति के लिए चयन समिति की बैठक में अनुशंसित किया गया था। हालांकि विभागीय कार्रवाई लंबित होने के कारण उनकी पदोन्नति से संबंधित सिफारिश को सीलबंद लिफाफे में रखा गया था।

बर्खास्तगी के समय कोलकाता में तैनात थे

बर्खास्तगी के समय हरीश चंद्र पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में सचिव पद पर कार्यरत थे और इसी कार्यकाल से शहदरा लीजबैक मामला जुड़ा है।

कार्रवाई में 4000 करोड़ के नुकसान का उल्लेख

शासन और जांच से संबंधित रिपोर्टों में करीब 4,00,447 वर्गमीटर जमीन का बाजार मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि भ्रामक रिपोर्ट और तथ्यों के छिपाव के कारण जमीन का अनियमित लीजबैक हुआ। हालांकि जमीन के आंकड़े अलग-अलग दस्तावेजी संदर्भों में 3,81,527 वर्गमीटर और 4,00,447 वर्गमीटर के रूप में सामने आते हैं, इसलिए दोनों को एक ही आंकड़ा मानकर पेश करने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड के संदर्भ में देखना जरूरी है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News