- सुशांत गोल्फ सिटी में कंसोर्टियम नियमों के उल्लंघन और डबल सेलिंग से जुड़े 846 भूखंडों के आवंटन-बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू; 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री जांच के दायरे में
भारत 19
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की हाईटेक टाउनशिप सुशांत गोल्फ सिटी में जमीन खरीदने वाले 846 लोगों की रजिस्ट्री पर अब निरस्तीकरण का संकट खड़ा हो गया है। कंसोर्टियम के नियमों के कथित उल्लंघन और डबल सेलिंग से जुड़े मामले में इन भूखंडों के आवंटन और बैनामे निरस्त कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन के आदेश के मुताबिक इन बैनामों को सक्षम न्यायालय में चुनौती देकर ‘विधि शून्य’ घोषित कराने की कार्रवाई की जाएगी। खरीदारों को एलडीए की ओर से मुआवजा नहीं दिए जाने की बात भी सामने आई है।
कंसोर्टियम व्यवस्था से जुड़ा है पूरा मामला
कंसोर्टियम (Consortium) किसी एक परियोजना या व्यावसायिक उद्देश्य के लिए दो या अधिक पक्षों का मिलकर बनाया गया समूह या समझौता होता है। सुशांत गोल्फ सिटी के मामले में अलग-अलग भूमिधरों की जमीन को एक साझा परियोजना व्यवस्था के तहत लाकर टाउनशिप विकसित करने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। जमीन के अलग-अलग मालिकों और परियोजना से जुड़े पक्षों के बीच समझौते के आधार पर जमीन का इस्तेमाल और उसका विकास किया जाना था। रिपोर्ट के मुताबिक इसी व्यवस्था के तहत कंसोर्टियम में शामिल भूमिधरों की जमीन परियोजना में शामिल की गई थी। आरोप है कि अंसल बिल्डर की ओर से कंसोर्टियम सदस्यों को जमीन का भुगतान किए जाने के बावजूद कुछ सदस्यों ने उसी जमीन के हिस्से अन्य लोगों को बेच दिए। इसी कथित डबल सेलिंग और कंसोर्टियम एग्रीमेंट के उल्लंघन ने विवाद को जन्म दिया।
846 भूखंडों की बिक्री जांच के घेरे में
मामले में अब उन 846 भूखंडों के आवंटन और बैनामों की जांच की जा रही है, जिन्हें कंसोर्टियम की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ा माना गया है। शासन के निर्देश के बाद एलडीए इन बैनामों को सक्षम न्यायालय में चुनौती देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संबंधित खरीदारों ने रजिस्ट्री के माध्यम से इन भूखंडों पर अपना अधिकार हासिल किया था। अब यदि सक्षम न्यायालय संबंधित बैनामों को विधि शून्य घोषित करता है तो इन खरीदारों के जमीन पर अधिकार पर सीधा असर पड़ेगा।
1000 करोड़ की जमीन और 149.459 हेक्टेयर बिक्री
कंसोर्टियम के पास कुल करीब 163.18 हेक्टेयर जमीन बताई गई है। इसमें से लगभग 149.459 हेक्टेयर जमीन की बिक्री जांच के दायरे में है। एलडीए को परियोजना का हैंडओवर मिलने के बाद इस जमीन की बिक्री और उससे जुड़े बैनामों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। 846 विवादित भूखंडों का औसत आकार करीब 19,008 वर्ग फुट बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इतने बड़े भूखंडों का इस्तेमाल फार्म हाउस बनाने अथवा निवेश के उद्देश्य से किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, संबंधित भूखंडों के वास्तविक उपयोग की स्थिति दस्तावेजों और स्थल जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
12 गांवों में फैले हैं 846 विवादित भूखंड
ये 846 भूखंड सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप के भीतर आने वाले 12 गांवों में बताए गए हैं। इनमें बरौना में 243, पहाड़नगर टिकरिया में 156, सोनेई कजेहरा में 131, हसनपुर खेवली में 66, दाउदनगर में 64, निजामपुर मजिगांव में 59, माढर मऊ कला में 51, अहमामऊ में 24, मुजफ्फरनगर घुसवल में 22, यूसुफनगर बगियामऊ में 17, हरिहरपुर में 8 और देवामऊ में 5 भूखंड शामिल हैं। इन सभी गांवों के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल संख्या 846 होती है।
खरीदारों में अधिकारी, कारोबारी और जनप्रतिनिधि
रिपोर्ट के मुताबिक इन बड़े भूखंडों के खरीदारों में आईएएस अधिकारियों, कारोबारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति की भूमिका या जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित दस्तावेज और सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई को अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
बैनामे निरस्त कराने की न्यायिक प्रक्रिया
शासन ने एलडीए को इन कथित अवैध बैनामों को सक्षम न्यायालय में चुनौती देने के निर्देश दिए हैं। इसका अर्थ यह है कि मौजूदा कार्रवाई केवल प्रशासनिक स्तर पर रजिस्ट्री रद्द करने तक सीमित नहीं है। संबंधित बैनामों की वैधानिक स्थिति को अदालत के समक्ष चुनौती दी जाएगी और न्यायालय के निर्णय के बाद उनकी अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
846 खरीदारों के मुआवजे पर स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक शासन के निर्देश में इन 846 खरीदारों को एलडीए की ओर से किसी प्रकार का मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं है। कार्रवाई उन भूखंडों पर हो रही है जिन्हें कंसोर्टियम की शर्तों के उल्लंघन और कथित डबल सेलिंग से जुड़ा माना गया है। हालांकि, खरीदारों के अधिकार और उनके द्वारा किए गए भुगतान से जुड़े अलग-अलग कानूनी दावों की स्थिति संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में तय हो सकती है।
परियोजना की संपत्तियों और देनदारियों की जांच
शासन ने परियोजना की संपत्तियों और देनदारियों का अध्ययन करने के लिए पेशेवर ट्रांजेक्शन एडवाइजर रखने के निर्देश भी दिए हैं। एलडीए को इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया से जुड़े पक्षों और एनसीएलटी के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने को कहा गया है। इसका उद्देश्य परियोजना की संपत्तियों और देनदारियों की स्थिति स्पष्ट करते हुए आगे के टेकओवर और विकास की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
2747 बंधक भूखंडों का मामला अलग
सुशांत गोल्फ सिटी से जुड़ी खबरों में 2,747 भूखंडों का आंकड़ा भी सामने आया था, जिससे भ्रम की स्थिति बन सकती है। सितंबर के मध्य में एलडीए ने इन बंधक भूखंडों की रजिस्ट्री निरस्त करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन 15 सितंबर की कैबिनेट मंजूरी के बाद एलडीए ने खरीदारों के हित में इन 2,747 भूखंडों की रजिस्ट्री निरस्त करने के बजाय उन्हें चरणबद्ध तरीके से अवमुक्त करने का फैसला किया। इसलिए 2,747 बंधक भूखंड और कंसोर्टियम नियमों के उल्लंघन से जुड़े 846 भूखंड एक ही श्रेणी का मामला नहीं हैं।** दोनों मामलों में जमीन की स्थिति और प्रस्तावित कार्रवाई अलग-अलग है।
एलडीए के हैंडओवर के बाद बढ़ेगी जांच
एलडीए को परियोजना का हैंडओवर मिलने के बाद 846 भूखंडों से संबंधित जमीन की बिक्री, आवंटन और बैनामों की जांच आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद सक्षम न्यायालय में संबंधित बैनामों को चुनौती देने की प्रक्रिया होगी। साथ ही एनसीएलटी और इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया के स्तर पर परियोजना की संपत्तियों और देनदारियों को लेकर एलडीए अपना पक्ष रखेगा।


