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ग्रेट वॉल ऑफ चाइना में खनन कंपनी ने लगाई सेंध

  • शांक्सी के निंगवू में मिंगकालीन दीवार में करीब छह मीटर का गैप का कोयला खनन के मलबे के लिए करीब 20 साल इस्तेमाल किया गया, 2015 से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, कंपनी पर 10 लाख युआन जुर्माना और दो जिम्मेदार अधिकारी गिरफ्तार

भारत 19

चीन की ऐतिहासिक ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के शांक्सी प्रांत स्थित एक हिस्से में करीब छह मीटर चौड़ी मानव निर्मित सेंध सामने आई है। यह किसी प्राकृतिक क्षरण का नतीजा नहीं, बल्कि कोयला खनन से निकलने वाले मलबे को ले जाने के लिए बनाई गई राह का परिणाम है। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV की जांच के मुताबिक, निंगवू काउंटी के गुओजियायाओ इलाके में मिंग राजवंश के समय की ग्रेट वॉल को करीब दो दशक तक नुकसान पहुंचाया गया। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शुरुआती दौर में दीवार में बना गैप करीब 18 मीटर तक चौड़ा हो गया था। बाद में उसे मलबे से भरने की कोशिश की गई और करीब 12 मीटर हिस्सा भरने के बाद भी लगभग छह मीटर चौड़ा गैप बना रहा।

मलबा ढोने के लिए काट दी गई दीवार

गुओजियायाओ सेक्शन शांक्सी के शिनझोउ शहर के निंगवू काउंटी में स्थित है और इसे प्रांतीय स्तर की सांस्कृतिक विरासत के रूप में संरक्षित किया गया है। CCTV की जांच के अनुसार 2007 में Ningwu Chaokai Coal Industry ने दीवार में एक रास्ता काट दिया था। इसका उद्देश्य खनन से निकलने वाले मलबे को पास के डंपिंग क्षेत्र तक पहुंचाना था। दीवार के एक तरफ खनन क्षेत्र और दूसरी तरफ मलबा डालने की जगह थी। इस रास्ते से कंपनी को पहाड़ी रास्ते से लंबा चक्कर लगाने से बचने में मदद मिलती थी। यानी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाकर परिवहन की दूरी और लागत कम की गई।

2013 के बाद दूसरी कंपनी ने भी इस्तेमाल किया

2013 में कई खनन टीमों के विलय से Shenda Chaokai Coal Industry बनी। CCTV के मुताबिक इसके बाद भी ग्रेट वॉल में बने रास्ते का इस्तेमाल माइनिंग स्लैग को ले जाने और डंप करने के लिए जारी रहा। जांच में यह भी सामने आया कि 2013 से पहले संबंधित खनन गतिविधियां आवश्यक कारोबारी और खनन अनुमति के बिना चल रही थीं। बाद में कंपनी ने दीवार में बने बड़े गैप को मलबे से भरने की कोशिश की, लेकिन करीब छह मीटर का हिस्सा फिर भी खुला रह गया।

2015 से शिकायतें, कार्रवाई में दस साल की देरी

मामले का दूसरा बड़ा पहलू शिकायतों की लंबी अवधि है। CCTV की जांच के अनुसार 2015 से स्थानीय स्तर पर लोगों और शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों को दीवार को हो रहे नुकसान की जानकारी देना शुरू किया। इसके बावजूद वर्षों तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक 2019 के बाद स्थानीय अधिकारियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि कंपनी की गतिविधियां ग्रेट वॉल की निर्धारित सुरक्षा सीमा से बाहर चली गई थीं और नई क्षति नहीं हो रही थी। बाद में निंगवू के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विभाग के अधिकारी ने जांच में स्वीकार किया कि ऐतिहासिक मामलों में कार्रवाई को लेकर कमी रही।

मार्च 2026 में शुरू हुई व्यापक जांच

लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्टों के बाद मार्च 2026 में शांक्सी प्रांत ने मामले की व्यापक जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया। इसमें कंपनी की कथित अवैध खनन गतिविधियों और ग्रेट वॉल को हुए नुकसान दोनों की जांच की गई। जांच के बाद मार्च और अप्रैल में निंगवू के सांस्कृतिक एवं पर्यटन विभाग ने कंपनी पर दो प्रशासनिक कार्रवाई कीं। अधिकारियों के मुताबिक संरक्षित क्षेत्र में बिना आवश्यक मंजूरी के निर्माण गतिविधि और ऐतिहासिक स्थल के स्वरूप को नुकसान पहुंचाने के मामले में कंपनी पर कुल 10 लाख युआन का जुर्माना लगाया गया।

कंपनी के जिम्मेदार लोगों पर आपराधिक कार्रवाई

मामला केवल प्रशासनिक जुर्माने तक सीमित नहीं रहा। मई 2026 में Shenda Chaokai Coal Industry के वास्तविक नियंत्रक और पूर्व अध्यक्ष को कथित अवैध खनन तथा सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचाने के मामलों में हिरासत में लिया गया। निंगवू प्रशासन ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच शुरू की है। स्थानीय अधिकारियों ने माना है कि घटना ने सांस्कृतिक विरासत की निगरानी और संरक्षण व्यवस्था में कमियां उजागर की हैं।

अब क्षतिग्रस्त हिस्से के संरक्षण पर जोर

प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और आसपास के खनन मलबे वाले क्षेत्र की बहाली की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। हालांकि, विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने चुनौती यह है कि मिंगकालीन दीवार के मूल स्वरूप को कितना बहाल किया जा सकता है। यह हिस्सा बीजिंग के लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्रों से दूर है। इसी वजह से लंबे समय तक इसकी निगरानी अपेक्षाकृत सीमित रही। घटना ने ग्रेट वॉल के दूरदराज हिस्सों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

मिंगकालीन ग्रेट वॉल का महत्वपूर्ण हिस्सा

ग्रेट वॉल चीन की अलग-अलग ऐतिहासिक अवधियों में बनाई गई दीवारों और सैन्य संरचनाओं का विशाल नेटवर्क है। मिंग राजवंश के दौरान इसका बड़ा हिस्सा बनाया और मजबूत किया गया। चीन की पूरी ग्रेट वॉल प्रणाली की लंबाई 21 हजार किलोमीटर से अधिक मानी जाती है। 1987 में ग्रेट वॉल को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। निंगवू का गुओजियायाओ सेक्शन भले ही दुनिया के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल न हो, लेकिन यह मिंगकालीन ग्रेट वॉल की ऐतिहासिक संरचना का हिस्सा है।

करीब 20 साल तक चली इस क्षति में सबसे बड़ा तथ्य यह है कि दीवार में बना रास्ता किसी प्राकृतिक वजह से नहीं बना था। खनन मलबे के परिवहन को आसान बनाने के लिए मानव निर्मित रास्ते के रूप में इसका इस्तेमाल किया गया। अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल छह मीटर के गैप की मरम्मत की नहीं, बल्कि ऐसे दूरदराज ऐतिहासिक स्थलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की भी है।

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