- नाइम कासिम ने मई में हथियार सौंपने को विनाश से जोड़ा था, 27 सितंबर को फिर निरस्त्रीकरण से इनकार; कहा- पहले दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना हटे
भारत 19 डेस्क
हिजबुल्लाह के प्रमुख नाइम कासिम ने एक बार फिर संगठन के हथियार छोड़ने की मांग को खारिज कर दिया। 27 सितंबर को पूर्व प्रमुख हसन नसरल्लाह की दूसरी बरसी के मौके पर कासिम ने कहा कि हिजबुल्लाह निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर लेबनान सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पहले दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी होनी चाहिए और वहां के लोगों को अपने घर लौटने दिया जाना चाहिए। कासिम ने कहा कि इजरायल हिजबुल्लाह की प्रतिरोध क्षमता खत्म करने और लेबनान में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के मंशा पूरी नहीं कर सका है। उन्होंने समर्थकों से कहा कि संगठन दबाव के बावजूद अपने रास्ते पर कायम रहेगा।
मई में हथियार छोड़ने को बताया था विनाश
हथियारों के सवाल पर कासिम का इससे भी स्पष्ट बयान 24 मई को आया था। उस समय उन्होंने कहा था कि हिजबुल्लाह के हथियार सौंपना “विनाश के समान” होगा और संगठन अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहा है। उन्होंने लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद हथियार रखने की बात कही थी। कासिम का मई का तर्क था कि हिजबुल्लाह का हथियारबंद रहना लेबनान की रक्षा से जुड़ा है और संगठन तब तक अपने हथियार नहीं छोड़ेगा, जब तक लेबनानी सरकार देश और उसकी जनता की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं हो जाती।
पहले दक्षिण खाली हो, फिर हथियारों पर बातचीत
27 सितंबर के भाषण में कासिम ने कहा कि हिजबुल्लाह लेबनान सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पहले दक्षिणी लेबनान को मुक्त कराया जाए और वहां विस्थापित लोगों को लौटने दिया जाए। इसके बाद ही हथियारों के मुद्दे पर किसी समझौते की दिशा में बढ़ने की बात कही गई। कासिम ने लेबनान और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही प्रत्यक्ष बातचीत को भी रोकने की मांग की और अप्रत्यक्ष बातचीत का समर्थन किया। उनके मुताबिक मौजूदा प्रक्रिया से लेबनान पर इजरायल और अमेरिका का दबाव बढ़ रहा है।
लेबनान सरकार पर भी बढ़ रहा हथियारों का दबाव
हिजबुल्लाह के रुख के समानांतर लेबनान सरकार पर देश में हथियारों का नियंत्रण राज्य के हाथ में लाने का दबाव बढ़ रहा है। जून में लेबनान और इजरायल के बीच बने ढांचे में हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को जोड़ा गया था। हालांकि, इस व्यवस्था की प्रगति काफी धीमी रही है। इजरायल का कहना है कि दक्षिणी लेबनान से उसकी सैन्य मौजूदगी का सवाल हिजबुल्लाह के खतरे से जुड़ा है। दूसरी ओर हिजबुल्लाह पहले इजरायली सेना की वापसी की मांग कर रहा है। यही विरोधी शर्तें निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया में सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई हैं।
नसरल्लाह की बरसी पर शक्ति प्रदर्शन
कासिम का 27 सितंबर का भाषण हसन नसरल्लाह की हत्या की दूसरी बरसी के मौके पर हुआ। बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में नसरल्लाह की कब्र के पास आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिजबुल्लाह समर्थक जुटे। कासिम ने अपने भाषण में कहा कि इजरायल संगठन के प्रतिरोध को तोड़ने और उसका अस्तित्व खत्म करने में सफल नहीं हुआ। नसरल्लाह को 27 सितंबर 2024 को बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में इजरायली हवाई हमले में मारा गया था। उनके उत्तराधिकारी के रूप में सामने आए हाशेम सफीद्दीन भी अक्टूबर 2024 में इजरायली हमले में मारे गए थे। इसके बाद नाइम कासिम ने संगठन की कमान संभाली।
निरस्त्रीकरण पर टकराव अब भी बरकरार
मौजूदा स्थिति में हिजबुल्लाह तत्काल और बिना शर्त हथियार छोड़ने को तैयार नहीं है। कासिम ने बातचीत का दरवाजा खुला रखने की बात कही है, लेकिन उसकी पहली शर्त दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी है। दूसरी ओर इजरायल और लेबनान सरकार की प्रक्रिया हिजबुल्लाह के हथियारों को राज्य के नियंत्रण में लाने पर जोर देती है। हिजबुल्लाह के हथियारों का मुद्दा अब केवल संगठन और इजरायल के बीच सुरक्षा विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह लेबनान की संप्रभुता, राज्य के सैन्य नियंत्रण और दक्षिणी लेबनान से इजरायली वापसी से भी सीधे जुड़ गया है।


