- एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस का देशव्यापी विरोध; अजय राय और राजेंद्र पाल गौतम समेत कई नेता प्रदर्शन में शामिल, राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय तक मार्च की तैयारी
भारत 19
लखनऊ। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच शुक्रवार, 25 सितंबर को लखनऊ में कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता जुटे। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम समेत कई नेता मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन के बाद राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय तक मार्च का कार्यक्रम भी रखा गया। पार्टी का यह आंदोलन देशभर में प्रदेश निर्वाचन आयोग कार्यालयों तक मार्च के उसके आह्वान का हिस्सा है।
चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों से क्यों गरमाया विवाद
लखनऊ का कांग्रेस प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर 14 औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में एसआईआर, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन रिपोर्टों के बीच चुनाव आयोग ने संस्थागत मतभेद या अंतिम निर्णयों में असहमति की व्याख्या को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
फॉर्म-6 में बदलाव पर भी उठे सवाल
विवाद के प्रमुख बिंदुओं में फॉर्म-6 में किए गए बदलाव का मुद्दा भी शामिल है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए मतदाता के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म में आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम पिछली एसआईआर मतदाता सूची में होने संबंधी जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। बाद में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू की ओर से भी इस विषय पर आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख रिपोर्ट में है।
मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी सामने आई आपत्ति
रिपोर्ट में मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस और ईआरओनेट से जुड़े संचालन को लेकर भी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इसमें स्थानीय स्तर पर काम करने वाले निर्वाचन अधिकारियों की डेटाबेस तक पहुंच और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका से संबंधित चिंताओं का जिक्र है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची के सत्यापन, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया सीधे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ती है।
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी राजनीतिक हमला तेज किया है। पार्टी ने 25 सितंबर को देशभर में निर्वाचन आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च का आह्वान किया। कांग्रेस की घोषित मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों तथा मतदाता सूची से जुड़े बदलावों की समीक्षा की मांग शामिल है। लखनऊ में इसी कार्यक्रम के तहत प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पर प्रदर्शन हुआ और राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय की ओर मार्च की तैयारी की गई।
प्रदर्शन में सपा शामिल नहीं, लेकिन मुद्दे पर सवाल
लखनऊ में कांग्रेस के इस प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी शामिल नहीं हुई। हालांकि, चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सपा का रुख अलग से सामने आया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। 23 सितंबर को सामने आई चुनाव आयोग से जुड़ी रिपोर्ट के बाद भी सपा की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। इसलिए कांग्रेस और सपा दोनों की ओर से चुनाव आयोग से जुड़े सवाल उठाए जाने के बावजूद 25 सितंबर का लखनऊ प्रदर्शन कांग्रेस का अपना संगठनात्मक कार्यक्रम रहा।
कांग्रेस-सपा की अलग राह ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और सपा दोनों विपक्षी राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस के इस प्रदर्शन में सपा की भागीदारी नहीं दिखाई दी। ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां तेज हो रही हैं, दोनों दलों की अलग-अलग गतिविधियां राज्य की विपक्षी राजनीति के मौजूदा समीकरणों को भी सामने लाती हैं। हालांकि, केवल इस एक प्रदर्शन के आधार पर कांग्रेस-सपा संबंधों को लेकर कोई व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
चुनाव आयोग की सफाई से विवाद का दूसरा पक्ष
पूरे विवाद में दो महत्वपूर्ण तथ्य सामने हैं। पहला, द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई 14 आपत्तियों का विवरण दिया गया है। दूसरा, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इस बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर अपना राजनीतिक आंदोलन तेज कर दिया है। लखनऊ में शुक्रवार का प्रदर्शन इसी अभियान की उत्तर प्रदेश कड़ी है। आने वाले दिनों में एसआईआर, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।


