- शंभूपुर हत्याकांड के बाद मां-बाप और भाई को खो चुकीं दोनों बच्चियों के लिए एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने पढ़ाई से भविष्य तक मदद का ऐलान किया; करीब पांच हजार पुलिसकर्मी भी एक दिन का वेतन देंगे
भारत 19
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुए हत्याकांड के बाद अनाथ हुईं दो बच्चियों के भविष्य के लिए पुलिस प्रशासन आगे आया है। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अरविंद की दोनों बेटियों को गोद लेने और उनकी पढ़ाई-लिखाई से लेकर भविष्य की जरूरतों तक जिम्मेदारी उठाने का ऐलान किया है। एसएसपी ने अपने एक महीने का वेतन बच्चियों के भविष्य के लिए देने की बात कही है। वहीं, आजमगढ़ में तैनात करीब पांच हजार पुलिसकर्मी एक-एक दिन का वेतन देने की घोषणा कर चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस धनराशि को दोनों बच्चियों के नाम सावधि जमा कराने की योजना है।
मां-बाप और भाई को खो चुकी हैं दोनों बच्चियां
शंभूपुर हत्याकांड के बाद दोनों बच्चियां परिवार में अकेली रह गई हैं। घटना में अरविंद सिंह, उसकी पत्नी बबीता और बेटे शौर्य की मौत हुई। पुलिस कार्रवाई के दौरान अरविंद की भी मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम के बाद दोनों बच्चियों के सिर से माता-पिता और भाई का साया उठ गया। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी बेटी परी करीब 10 वर्ष की है, जबकि छोटी बेटी शानवी करीब 11 माह की है। दोनों बच्चियों की देखभाल और भविष्य को लेकर पुलिस प्रशासन ने आर्थिक सहायता की पहल की है।
एसएसपी देंगे एक महीने का वेतन
एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने कहा है कि वह अपनी एक महीने की सैलरी बच्चियों के भविष्य के लिए देंगे। इसके साथ ही जिले के पुलिसकर्मियों से भी एक दिन का वेतन देने की अपील की गई है। पुलिस की ओर से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल बच्चियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए किया जाएगा। रिपोर्टों में दोनों के नाम एफडी कराने की बात कही गई है।
पढ़ाई से शादी तक की जिम्मेदारी का ऐलान
एसएसपी ने बच्चियों की पढ़ाई और देखभाल से लेकर आगे की जरूरतों में मदद करने की बात कही है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब उनके परिवार में एक बेटा और तीन बेटियां हैं। यह पहल ऐसे समय हुई है जब दोनों बच्चियां बेहद कम उम्र में परिवार के कई सदस्यों को खो चुकी हैं।
पीड़ित परिवारों की भी मदद करेगी पुलिस
पुलिस प्रशासन ने केवल अरविंद की बेटियों तक मदद सीमित रखने की बात नहीं कही है। शंभूपुर कांड में प्रभावित अन्य परिवारों के बच्चों और परिजनों को भी सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है। जिलाधिकारी के सहयोग से पीड़ित परिवारों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की बात भी कही गई है।
शंभूपुर में हुई थी कई लोगों की मौत
अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में हुई इस घटना में अरविंद की पत्नी बबीता और दो पुजारियों की गोली लगने से मौत हुई थी। इसके बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान अरविंद की भी मौत हुई। उसके बेटे शौर्य की मौत को लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जांच पुलिस कर रही है। घटना के बाद गांव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।
बच्चियों के भविष्य के लिए बनी आर्थिक सुरक्षा
पुलिस की यह पहल तत्काल आर्थिक सहायता के साथ दोनों बच्चियों के भविष्य के लिए दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा तैयार करने पर केंद्रित है। एसएसपी के एक महीने के वेतन और पुलिसकर्मियों के एक दिन के वेतन से जुटने वाली राशि को सुरक्षित निवेश के रूप में रखने की योजना बताई गई है।


