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IIT Kanpur के एक साथ पांच वैज्ञानिक बने INSA फेलो

  • रसायन, गणित, विद्युत, पदार्थ विज्ञान और जैविक विज्ञान में शोध के लिए सम्मान; पांचों का चयन जनवरी 2027 से होगा प्रभावी

भारत 19

कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के शोध जगत में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संस्थान के एक साथ पांच प्रोफेसरों को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) का फेलो चुना गया है। रसायन अभियांत्रिकी, गणित, विद्युत अभियांत्रिकी, पदार्थ विज्ञान और जैविक विज्ञान के इन वैज्ञानिकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध किया है। इनका फेलो के रूप में चयन जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। एक ही संस्थान के पांच वैज्ञानिकों का चयन IIT कानपुर की मजबूत शोध क्षमता और देश के वैज्ञानिक जगत में उसके बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है।

जटिल द्रवों के प्रवाह पर प्रो. शंकर का शोध

रसायन अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. विश्वनाथन शंकर को जटिल द्रवों के प्रवाह और अस्थिरता पर उनके महत्वपूर्ण शोध के लिए INSA फेलो चुना गया है। उनके शोध ने कम रेनॉल्ड्स संख्या पर प्रत्यास्थ अशांति और अधिक रेनॉल्ड्स संख्या पर इलास्टोइनर्शियल अशांति को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके काम से प्रवाह संक्रमण, प्रत्यास्थ अस्थिरता और घर्षण कम करने वाली तकनीकों की समझ को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

गणितीय मॉडल और AI पर प्रो. रथीश कुमार का काम

गणित विभाग के प्रो. रथीश कुमार बी.वी. को अनुप्रयुक्त गणित में योगदान के लिए यह सम्मान मिला है। उन्होंने जटिल प्रवाह विश्लेषण, आंशिक अवकल समीकरणों और प्रतिलोम समस्याओं के लिए नई गणितीय विधियों पर काम किया है। उनका शोध हृदय में रक्त प्रवाह, हृदय की विद्युत गतिविधि, तंत्रिका चित्रण और कैंसर के प्रतिरूपण जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन आधारित तकनीकों के इस्तेमाल तक फैला है।

अर्धचालक तकनीक में प्रो. चौहान का अहम योगदान

विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. योगेश सिंह चौहान को अर्धचालक तकनीक में उल्लेखनीय योगदान के लिए INSA फेलो चुना गया है। उन्होंने उन्नत सिलिकॉन ट्रांजिस्टर के लिए ऐसे मॉडल विकसित किए हैं, जिनका इस्तेमाल उद्योग में किया जाता है। गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड आधारित उच्च गतिशीलता वाले ट्रांजिस्टर के मॉडलिंग में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके विकसित मॉडल अर्धचालक कंपनियों द्वारा परिपथ डिजाइन में इस्तेमाल किए जाने वाले वाणिज्यिक सॉफ्टवेयर में शामिल हैं।

जैव-चिकित्सा सामग्री पर प्रो. बालानी का शोध

पदार्थ विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. कांतेश बालानी को जैव-चिकित्सा सामग्री और जैव-सतहों पर उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने प्रोटीन के जैव-सतहों से जुड़ाव, बहु-कार्यात्मक सामग्रियों और प्रोटीन के अलग होने की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा छिद्रयुक्त और बहु-कार्यात्मक हाइड्रॉक्सीएपेटाइट तथा बायोग्लास आधारित संरचनाओं और जैव-चिकित्सकीय उपयोग वाली मजबूत मिश्रित सामग्रियों के विकास में भी उनका शोध महत्वपूर्ण रहा है।

प्रोटीन संरचना से दवा विकास तक शोध

जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रो. रामसुब्बु शंकररामकृष्णन को प्रोटीन के जैव-भौतिकी संबंधी शोध के लिए INSA फेलो चुना गया है। उन्होंने झिल्ली प्रोटीन, प्रोटीन की संरचना और उनके विकासक्रम के बीच संबंधों पर महत्वपूर्ण शोध किया है। उनके अध्ययन में प्रोटीन की स्थिरता और आणविक अंतःक्रियाओं को समझने के साथ दवा विकास और कैंसर अनुसंधान से जुड़े उपयोगी निष्कर्ष भी सामने आए हैं।

पांचों वैज्ञानिकों का चयन संस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि

IIT कानपुर के पांच वैज्ञानिकों का एक साथ INSA फेलो चुना जाना संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अलग-अलग वैज्ञानिक क्षेत्रों में इनका शोध मूलभूत विज्ञान के साथ स्वास्थ्य, अर्धचालक, जैव-चिकित्सा और औद्योगिक तकनीक जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों में भी नई संभावनाओं को आगे बढ़ा रहा है। एक ही संस्थान के पांच प्रोफेसरों को प्रतिष्ठित अकादमी की फेलोशिप मिलना IIT कानपुर की बहुविषयक शोध क्षमता और वैज्ञानिक योगदान को साबित करता है।

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