- सीएसजेएमयू के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विशेषज्ञों ने बताया महत्व; 15.71 अरब नहीं, दुनियाभर में 1.71 अरब लोग मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं से प्रभावित, अब एआई, रोबोट और वर्चुअल तकनीक से हाईटेक हो रहा उपचार
भारत 19
कानपुर। चोट के बाद लड़खड़ाते कदम हों, दर्द के कारण थम गई दिनचर्या या उम्र के साथ कमजोर पड़ती मांसपेशियां… फिजियोथेरेपी सिर्फ दर्द कम करने का जरिया नहीं, बल्कि शरीर की गति, क्षमता और आत्मनिर्भरता लौटाने की राह है। बदलती जीवनशैली में इसकी बढ़ती जरूरत और भूमिका पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि फिजियोथेरेपी रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी या चोट के बाद व्यक्ति को सामान्य जीवन की ओर लौटाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। तेजी से बदलती तकनीक ने इसके उपचार और पुनर्वास के तरीकों को भी हाईटेक बना दिया है।

जोड़ों-मांसपेशियों की समस्याओं में अहम भूमिका
वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि फिजियोथेरेपी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें स्वयं फिजियोथेरेपी उपचार से लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं के साथ रोजमर्रा की शारीरिक परेशानियों में भी फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रो. प्रवीन कटियार ने कहा कि फिजियोथेरेपी व्यक्ति को बीमारी या चोट के बाद सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करती है। इसका उद्देश्य केवल उपचार नहीं, बल्कि व्यक्ति की शारीरिक क्षमता, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी भूमिका को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ निभाने का आह्वान किया।
मरीज की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता जरूरी
एसोसिएट डीन प्रशासन प्रो. दिग्विजय शर्मा ने फिजियोथेरेपी में प्रोफेशनल एथिक्स और एविडेंस-बेस्ड प्रैक्टिस को जरूरी बताया। कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट को मरीज की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता का सम्मान करते हुए पूरी जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिसर्च को बढ़ावा देकर वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर उपचार की नई और प्रभावी तकनीकों को विकसित करने की आवश्यकता है।
शारीरिक क्षमता वापस पाने का कारगर तरीका
संस्थान के निदेशक प्रो. मुनीश रस्तोगी ने कहा कि फिजियोथेरेपी व्यक्ति को उसकी शारीरिक क्षमता वापस हासिल करने और बेहतर जीवन जीने में महत्वपूर्ण मदद देती है। उन्होंने फिजियोथेरेपिस्टों की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण देने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशिका डॉ. हिना वैश्य ने किया। इस अवसर पर सहायक निदेशक धीरज कुमार, नेहा शुक्ला, चंद्रशेखर कुमार, डॉ. आदर्श कुमार श्रीवास्तव, उमेश कुमार मौर्या, डॉ. मंजीत, अमिल अग्रवाल, विनय शाह, कल्पना, खुश्बू अंजुम, पूजा घोष, तारूष समेत शिक्षकगण उपस्थित रहे।
आंकड़े बताते हैं, फिजियोथेरेपी समय की मांग
- दुनिया भर में करीब 1.71 अरब लोग हड्डियों, जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं से प्रभावित हैं।
- करीब 57 करोड़ लोग कमर के निचले हिस्से के दर्द से परेशान हैं। यह शारीरिक अक्षमता के प्रमुख कारणों में शामिल है।
- दुनिया में लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति ऐसी स्वास्थ्य समस्या के साथ जीवन जी रहा है, जिसमें इस चिकित्सा से लाभ मिल सकता है।
- वर्ष 1990 से 2019 के बीच पुनर्वास सेवाओं की जरूरत वाली आबादी में करीब 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
अब हाईटेक हो रही फिजियोथेरेपी
तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने फिजियोथेरेपी को भी नए दौर में पहुंचा दिया है। अब मरीज की गतिविधियों का कंप्यूटर आधारित विश्लेषण, रोबोटिक उपकरण और आभासी तकनीक के जरिए पुनर्वास को अधिक सटीक, सक्रिय और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।
- शरीर के चलने-फिरने और कदमों के संतुलन का कंप्यूटर आधारित विश्लेषण कर उपचार को अधिक सटीक बनाया गया है।
- रोबोट आधारित उपकरणों की मदद से चोट, स्ट्रोक या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं के बाद शरीर की गतिविधियों को दोबारा प्रशिक्षित करने में सहायता मिलती है।
- आभासी तकनीक के माध्यम से मरीजों को खेल और गतिविधि आधारित अभ्यास कराए जाते हैं, जिससे पुनर्वास को अधिक रोचक और सक्रिय बनाया जा सकता है।
- विशेष परिस्थितियों में हल्के विद्युत संकेतों के माध्यम से मांसपेशियों को सक्रिय करने और पुनर्वास में सहायता ली जाती है।


