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विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों ने थामा भारतीय बाजार

  • एशियाई बाजारों की तेजी से भारत भले पीछे रहा, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की भारी खरीदारी बनी बाजार की ताकत; महंगे तेल और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच भी उम्मीद कायम

भारत 19
नई दिल्ली
। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में सोमवार को तेजी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। जापान का Nikkei करीब 2.2 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 3.1 प्रतिशत चढ़ा, जबकि Sensex 0.24 प्रतिशत गिरकर 76,335.07 और Nifty 50 0.25 प्रतिशत टूट गया। हालांकि बाजार की तस्वीर का सबसे अहम पहलू गिरावट नहीं, बल्कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी रही। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब तीन गुना रकम बाजार में लगाई।

घरेलू निवेशकों ने विदेशी बिकवाली को संभाला

पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3,111.94 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 8,930.12 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस अंतर ने बाजार में गिरावट के दबाव को सीमित करने में मदद की। इससे यह संकेत भी मिलता है कि भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

एशिया की तेजी में भारत क्यों पीछे रहा

जापान और दक्षिण कोरिया में सोमवार की तेजी मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी, AI और सेमीकंडक्टर शेयरों में खरीदारी से आई। दक्षिण कोरिया में Samsung Electronics करीब 4.5 प्रतिशत और SK Hynix करीब 6.2 प्रतिशत चढ़े। जापान में भी टेक शेयरों को AI निवेश की उम्मीदों का फायदा मिला। भारतीय बाजार की संरचना इससे अलग है। Sensex और Nifty में बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, IT, ऑटो और घरेलू खपत से जुड़ी कंपनियों का बड़ा वजन है। इसलिए AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों की तेजी का सीधा फायदा भारत को जापान और दक्षिण कोरिया जितना नहीं मिला।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से बढ़ी ब्याज दर की चिंता

अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 1.62 लाख नौकरियां बढ़ीं। मजबूत रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दिया, लेकिन इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद भी प्रभावित हो सकती है। ऊंची अमेरिकी दरें उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव बनाए रख सकती हैं।

IT शेयरों पर अमेरिका का दोहरा असर

अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती भारतीय IT कंपनियों के लिए सकारात्मक भी है, क्योंकि इससे तकनीकी सेवाओं की मांग बनी रह सकती है। लेकिन ऊंची ब्याज दरों के कारण अमेरिकी कंपनियां खर्च घटाती हैं तो नई IT परियोजनाओं और discretionary spending पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का भारतीय IT शेयरों पर असर एकतरफा नहीं रहा।

महंगा कच्चा तेल बढ़ा रहा भारत की चिंता

भारतीय बाजार के सामने कच्चे तेल की तेजी भी बड़ी चुनौती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव तथा Hormuz जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच Brent crude करीब 96.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता के कारण महंगा कच्चा तेल आयात बिल, रुपये और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकता है।

विदेशी निवेश की वापसी अभी टिकाऊ नहीं

अगस्त में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया था। करीब दो साल में यह उनका सबसे बड़ा मासिक निवेश रहा। लेकिन सितंबर के पहले सप्ताह में करीब 7,443 करोड़ रुपये की निकासी से साफ है कि विदेशी निवेशकों का रुख अभी स्थायी रूप से नहीं बदला है। 2026 में उनकी कुल निकासी करीब 2.32 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 24.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

घरेलू पूंजी बनी बाजार की बड़ी उम्मीद

विदेशी निवेशकों के अस्थिर रुख के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे मजबूत सकारात्मक संकेत है। इससे बाजार की विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम होने और घरेलू बचत के इक्विटी बाजार में बढ़ते प्रवाह का संकेत मिलता है। अगर घरेलू निवेशकों की यह भागीदारी बनी रहती है और विदेशी बिकवाली की रफ्तार घटती है, तो वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में मजबूती लौटने की गुंजाइश बढ़ सकती है। यानी एशियाई तेजी में भारत भले पीछे रहा हो, लेकिन घरेलू पूंजी बाजार को थामे हुए है।

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