- 135.200 मीटर पहुंचा नदी का जलस्तर, रामघाट से बस्तियों तक घुसा पानी, पुल-पुलिया और सड़कें क्षतिग्रस्त, रेस्क्यू के बाद अब तबाही का आकलन
भारत 19
चित्रकूट / चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने 23 साल पुराना बाढ़ का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लगातार बारिश और जलग्रहण क्षेत्र से आए पानी के बाद शनिवार को नदी का जलस्तर 135.200 मीटर तक पहुंच गया। वर्ष 2003 में दर्ज 134.500 मीटर का पिछला रिकॉर्ड इस बार 70 सेंटीमीटर पीछे छूट गया। खतरे का निशान 126.500 मीटर है। नदी के उफान ने रामघाट समेत आसपास के निचले इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। घरों, दुकानों, मंदिरों और आश्रमों में पानी भरने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
रामघाट समेत निचले इलाकों में भारी जलभराव
बाढ़ का असर रामघाट, नयागांव, कामता, जानकीकुंड और आरोग्यधाम समेत कई इलाकों में रहा। धार्मिक स्थलों और आश्रमों तक पानी पहुंचने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। रामघाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानें भी जलमग्न हो गईं। हालात पर नजर रखने के लिए प्रशासन ने ड्रोन से निगरानी कराई। पानी बढ़ने के दौरान प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए NDRF, SDRF, पुलिस और अन्य राहत दलों को लगाया गया। नाव और स्टीमर से रेस्क्यू किया गया, जबकि मध्य प्रदेश की ओर हेलीकॉप्टर की मदद भी ली गई। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया।
मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त
बाढ़ का असर सड़क संपर्क पर भी पड़ा। मंदाकिनी पुल की एप्रोच रोड का एक हिस्सा तेज बहाव में बह गया। इसके बाद प्रशासन ने पुल से भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी। इससे प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ। चित्रकूट-सतना और मानिकपुर-सतना मार्ग के कई हिस्सों में भी पानी और क्षति के कारण आवागमन बाधित रहा। पुल-पुलियों को नुकसान पहुंचने के अलावा जलभराव का असर सतना-मानिकपुर रेलखंड पर भी पड़ा और ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ।
पानी उतरने के साथ सामने आ रहा नुकसान
मंदाकिनी का जलस्तर घटने के बाद अब बाढ़ से हुए नुकसान की तस्वीर साफ होने लगी है। घरों और दुकानों से पानी निकलने के साथ कीचड़, मलबा और खराब सामान सामने आ रहा है। कई इलाकों में सफाई और जरूरी सेवाओं की बहाली की जरूरत है। प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों के नुकसान का सर्वे कराने के साथ पेयजल और बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की चुनौती है। लंबे समय तक जलभराव वाले इलाकों में दूषित पानी और संक्रमण से बचाव के लिए भी जरूरी कदम उठाने होंगे।
रिकॉर्ड बाढ़ ने सुरक्षा इंतजामों पर उठाए सवाल
मंदाकिनी का इस स्तर तक पहुंचना चित्रकूट के लिए सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी परीक्षा भी है। नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ से बचाव, संपर्क मार्गों की मजबूती और आपदा के दौरान त्वरित रेस्क्यू व्यवस्था की कमियां इस दौरान सामने आई हैं। अब प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ क्षतिग्रस्त ढांचे को बहाल करने की चुनौती है। वहीं, भविष्य में ऐसे हालात दोबारा बनने पर नुकसान कम करने के लिए नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों और बुनियादी ढांचे की स्थायी सुरक्षा व्यवस्था पर भी काम करना होगा।


