- 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा भाजपा का सेवा संकल्प अभियान; लाभार्थियों, Gen-Z और सामाजिक वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के साथ बूथ स्तर पर संगठन सक्रिय करने की तैयारी
भारत 19
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर हर वर्ष होने वाला भाजपा का सेवा संकल्प अभियान इस बार सिर्फ सेवा गतिविधियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सामने उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव है और 2022 के मुकाबले इस बार राजनीतिक परिस्थितियां भी बदली हुई हैं। ऐसे में 17 सितंबर से शुरू होने जा रहा एक माह का अभियान भाजपा के लिए सेवा के साथ जनसंपर्क और चुनावी जमीन मजबूत करने का बड़ा जरिया बनने जा रहा है।
हर वर्ष होने वाले इस अभियान में स्वच्छता, रक्तदान, पौधारोपण और स्वास्थ्य शिविर जैसे सेवा कार्य होते रहे हैं। इन कार्यक्रमों की तस्वीरें पार्टी एप पर अपलोड करने की जिम्मेदारी भी कार्यकर्ताओं पर रहती थी। लेकिन इस बार अभियान का फोकस इससे आगे बढ़ता दिख रहा है। पार्टी की कोशिश है कि सेवा संकल्प को जनता से सीधे जुड़ाव और सत्ता की सीढ़ी तक पहुंचने वाली राजनीतिक रणनीति से जोड़ा जाए।
एक महीने का अभियान, बीच में आएगा मोदी के सार्वजनिक सेवा का पड़ाव
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन से होगी। इसी दौरान सात अक्टूबर को प्रधानमंत्री के सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष भी पूरे होंगे। इसी वजह से भाजपा ने पहले चलने वाले सेवा पखवाड़े को इस बार एक माह तक विस्तार दिया है, ताकि सात अक्टूबर को अभियान के बीच में रखा जा सके> उत्तर प्रदेश में पार्टी इस पूरे अभियान को जनसंपर्क बढ़ाने और संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने के अवसर के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है।
सेवा सेतु बनेगा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच
अभियान का प्रमुख हिस्सा ‘सेवा सेतु’ होगा। इसके तहत विशेष शिविर लगाकर ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी जो सरकारी योजनाओं के पात्र हैं, लेकिन अभी तक उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। इसके लिए विकासखंड स्तर पर शिविर लगाने की तैयारी है। हालांकि पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का फिलहाल कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि इस पहल में इस पहलू को भी जोड़ा जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो तो जनता के बीच इसका संदेश और मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा। विधानसभा चुनाव के लिहाज से यह कनेक्ट बेहद अहम है, क्योंकि इसके जरिए पार्टी सीधे उन परिवारों तक पहुंच बना सकेगी जो किसी न किसी सरकारी योजना के लाभार्थी हैं।
Gen-Z से संवाद, सुशासन और विकास का संदेश
सेवा गतिविधियों के साथ सामाजिक संवाद का मोर्चा भी संभालने की तैयारी है। अभियान के दौरान जेन जी से जुड़ने वाले कार्यक्रम होंगे। इसके अलावा सुशासन, विकास और अंत्योदय जैसे विषयों पर प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। युवाओं के साथ-साथ समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ संवाद कार्यक्रम भी होंगे। यानी अभियान का फोकस सिर्फ सेवा कार्य करने तक नहीं, बल्कि सेवा के जरिए सामाजिक संपर्क, सरकार की उपलब्धियों के प्रचार और नए मतदाता वर्गों तक पहुंच बनाने पर रहेगा।
सेवा कार्यक्रमों से बूथ तक पहुंचेगा संगठन का फोकस
अब तक सेवा कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उनकी गतिविधियों को पार्टी एप पर दर्ज करना अभियान का अहम हिस्सा रहा है। इस बार इसके साथ जमीनी पहुंच को भी महत्व दिया जा रहा है। पार्टी यह देखना चाहती है कि अभियान प्रदेश मुख्यालय या जिला स्तर के कार्यक्रमों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर वास्तविक रूप से गांव, मंडल और बूथ तक दिखाई दे। यही वजह है कि अभियान की निगरानी के लिए राज्यों में अलग टीम गठित करने की तैयारी है।
विनोद तावड़े संभालेंगे राष्ट्रीय निगरानी, राज्यों में सात सदस्यीय टीम
राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा महासचिव विनोद तावड़े अभियान की निगरानी कर रहे हैं। राज्य स्तर पर सात सदस्यीय टीम गठित करने की योजना है। इसमें एक मंत्री, संगठन का एक महामंत्री और पांच अन्य वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाएगा। निगरानी टीम का काम सिर्फ कार्यक्रमों की संख्या देखना नहीं होगा, बल्कि यह भी देखना होगा कि सेवा संकल्प अभियान प्रदेश मुख्यालय से निकलकर वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंचा या नहीं। भाजपा का सेवा संकल्प अभियान सेवा गतिविधियों, लाभार्थी संपर्क, सामाजिक संवाद और बूथ सक्रियता को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आ रहा है। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए यह महज कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगठन और जनता के बीच संपर्क की एक माह लंबी कवायद भी है।
