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दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए खेतों तक पहुंचे शोध

  • CSA में देशभर के वैज्ञानिकों का मंथन, उन्नत बीज, रोगरोधी किस्मों और आधुनिक तकनीक से उत्पादन बढ़ाने पर जोर; किसानों तक शोध पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा

भारत 19
कानपुर। दालों की बढ़ती मांग के बीच दलहन उत्पादन बढ़ाना अब बड़ी चुनौती है। इसके लिए सिर्फ खेती का रकबा बढ़ाना काफी नहीं होगा, बल्कि प्रयोगशालाओं और अनुसंधान संस्थानों में विकसित उन्नत बीज, नई किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीक को तेजी से किसानों के खेत तक पहुंचाना होगा। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) में हुई अखिल भारतीय समन्वित रबी दलहन अनुसंधान परियोजना की 31वीं वार्षिक समूह बैठक में देशभर के वैज्ञानिकों ने इसी चुनौती पर मंथन किया।

शोध की असली परीक्षा अब खेत में

बैठक में देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र और अध्ययन प्रस्तुत किए। चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि दलहन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए अनुसंधान संस्थानों में लगातार काम हो रहा है, लेकिन उसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब विकसित तकनीक समय पर खेतों तक पहुंचे और उसका प्रभावी इस्तेमाल हो। वैज्ञानिकों ने सूखा और रोगरोधी किस्मों, कम अवधि में तैयार होने वाली प्रजातियों, उन्नत बीज उपचार, संतुलित पोषण और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को दलहन उत्पादन बढ़ाने के अहम उपायों के रूप में सामने रखा। स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुरूप तकनीक विकसित करने में किसानों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

प्रशिक्षण तक सीमित न रहे कृषि तकनीक

समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए CSA के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और खेत स्तर पर तकनीक के प्रभावी प्रसार के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, राज्य कृषि विभागों और किसान उत्पादक संगठनों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। शोध से निकली तकनीक को केवल प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सीमित रखने के बजाय प्रदर्शन प्लॉट, खेत दिवस और स्थानीय भाषा के डिजिटल माध्यमों से किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

किसान की जरूरत के हिसाब से हो अनुसंधान

आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (तिलहन एवं दलहन) डॉ. एसके झा ने रबी दलहन अनुसंधान को किसानों की जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाने की बात कही। उन्होंने विकसित तकनीकों को खेत तक पहुंचाने और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में आगामी वर्ष के लिए फसल सुधार, फसल उत्पादन और फसल संरक्षण से जुड़े तकनीकी कार्यक्रमों पर भी मंथन किया गया। वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो किसानों की स्थानीय परिस्थितियों में उपयोगी हो और कम समय में बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद करे।

उन्नत बीज से रोग नियंत्रण तक फोकस

दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, बेहतर किस्मों, बीज उपचार, संतुलित पोषण, सिंचाई प्रबंधन और रोग नियंत्रण जैसे पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया। उद्देश्य ऐसी तकनीकों को बढ़ावा देना है, जो किसानों के लिए व्यावहारिक होने के साथ फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर सकें। समापन समारोह में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित, आईसीएआर के सहायक महानिदेशक (बीज) डॉ. बीआर चौधरी समेत देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।

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