- कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो संचालन का इंतजार दो माह पार, जुलाई में मिल चुकी है सुरक्षा मंजूरी; प्रधानमंत्री से उद्घाटन की तैयारी के बीच बारिश बनी अड़चन, रोजाना 35 से 40 हजार संभावित यात्रियों को नहीं मिल रहा सीधा लाभ
भारत 19
राजीव सक्सेना, कानपुर। जिस कानपुर मेट्रो ने अपने पहले चरण में सीएमआरएस निरीक्षण के महज सात दिन बाद यात्रियों को सफर करा दिया था, वही अब सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद भी नौबस्ता तक पहुंचने में अटकी है। कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता के बीच करीब आठ किलोमीटर के नए हिस्से का सीएमआरएस निरीक्षण 27 से 29 जून को हुआ था। जुलाई में इसकी मंजूरी मिलने की बात मेट्रो अधिकारी अनौपचारिक तौर पर स्वीकार कर चुके हैं। इसके बावजूद 29 अगस्त तक यात्री सेवा शुरू नहीं हो सकी है।** यानी निरीक्षण के दो महीने पूरे होने के बाद भी ट्रेन प्लेटफार्म से यात्रियों के लिए रवाना नहीं हुई।
मामला अब तकनीकी तैयारी से ज्यादा उद्घाटन की तारीख तय होने पर अटका नजर आ रहा है। यूपी मेट्रो रेल कॉरपोरेशन इस हिस्से का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से कराने की तैयारी में है। मेट्रो अधिकारियों के मुताबिक भारी बारिश के कारण कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उनका कहना है कि यदि बारिश के बाद भी कार्यक्रम टलता है तो विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू होने से पहले संचालन शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
ट्रायल पूरा, सुरक्षा जांच पूरी, फिर भी इंतजार
सेंट्रल-नौबस्ता खंड की तैयारियों में सीएमआरएस की पांच सदस्यीय टीम ने ट्रैक से लेकर यात्रियों की सुरक्षा तक की व्यवस्थाएं परखी थीं। 27 से 29 जून तक हुए निरीक्षण में हाईस्पीड ट्रायल, ट्रैक, सिग्नलिंग, बिजली स्टेशनों और यात्री सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई। आईआईटी से नौबस्ता तक पूरे रूट पर ट्रेन चलाकर परिचालन भी देखा गया। इसका मतलब यह है कि **ट्रेन चलाने की व्यवहारिक तैयारी पहले ही परखी जा चुकी है। सीएमआरएस की रिपोर्ट आने के बाद भी नियमित सेवा शुरू न होने से देरी की वजह अब तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि उद्घाटन कार्यक्रम दिखाई दे रही है।
सात स्टेशन जोड़ेंगे दक्षिण कानपुर को सीधा कनेक्शन
सेंट्रल से नौबस्ता के बीच सात स्टेशन इस विस्तार का हिस्सा हैं। इनमें झकरकटी बस अड्डा और ट्रांसपोर्ट नगर भूमिगत स्टेशन हैं। इसके बाद बारादेवी, किदवई नगर, वसंत विहार, बौद्धनगर और नौबस्ता स्टेशन हैं। इस हिस्से के चालू होने से दक्षिण कानपुर के बड़े आबादी क्षेत्र को पहली बार मेट्रो का सीधा लाभ मिलेगा। फिलहाल आईआईटी से सेंट्रल तक चल रही मेट्रो में प्रतिदिन करीब 30 से 35 हजार यात्री सफर करते हैं। नौबस्ता तक सेवा पहुंचने पर यह संख्या करीब 70 हजार प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है। इस हिसाब से हर दिन करीब 35 से 40 हजार संभावित यात्रियों का अतिरिक्त भार अभी सड़क परिवहन पर ही है। सेंट्रल स्टेशन, कलेक्ट्रेट, लाला लाजपत राय अस्पताल और विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख स्थानों तक दक्षिणी इलाकों से आने वालों के लिए भी यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।
पहले चरण में सात दिन, दूसरे में 71 दिन लगे
कानपुर मेट्रो के पिछले संचालन चरणों से तुलना करें तो मौजूदा इंतजार और स्पष्ट हो जाता है। दिसंबर 2021 में आईआईटी-मोतीझील के नौ स्टेशन वाले प्राथमिक कॉरिडोर का सीएमआरएस निरीक्षण 20 से 22 दिसंबर तक हुआ था और 29 दिसंबर को यात्री सेवा शुरू हो गई थी। इसके बाद चुन्नीगंज से सेंट्रल तक पांच स्टेशनों के विस्तार का सीएमआरएस निरीक्षण 20 और 21 मार्च 2025 को हुआ। इस हिस्से को यात्रियों के लिए खोलने में 71 दिन लगे और 31 मई 2025 को संचालन शुरू हुआ। दोनों चरणों का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। अब सेंट्रल-नौबस्ता खंड का इंतजार भी 71 दिन की पिछली समय-सीमा के करीब पहुंच चुका है। दो महीने बीतने के बाद भी संचालन की निश्चित तारीख घोषित नहीं होने से इस बार देरी का सवाल और बड़ा हो गया है।
यात्री सेवा से पहले स्टेशनों की कमाई की तैयारी
मेट्रो का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। ट्रेन सेवा शुरू होने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन स्टेशनों से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों की प्रक्रिया जारी है। यूपीएमआरसी ने आईआईटी से नौबस्ता तक स्टेशनों पर को-ब्रांडिंग और विज्ञापन अधिकारों के लिए टेंडर जारी किए हैं। एक टेंडर की अंतिम तारीख दो सितंबर और दूसरे की 22 सितंबर है। यानी यात्री परिचालन शुरू होने से पहले ही इस नए हिस्से के स्टेशनों से राजस्व जुटाने की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं।
जलभराव वाले इलाकों को सबसे ज्यादा इंतजार
सेंट्रल-नौबस्ता मेट्रो की जरूरत ऐसे समय में और बढ़ जाती है, जब बारिश के दौरान दक्षिण कानपुर के कई हिस्सों में जलभराव और सड़क यातायात की समस्या बढ़ती है। ऐसी स्थिति में मेट्रो उत्तर और मध्य शहर की ओर आने-जाने का तेज विकल्प बन सकती है।


