- NFLP से 120 से ज्यादा शिक्षक सीखेंगे संस्थान संचालन, फैसले, रिसर्च और डिजिटल गवर्नेंस; सितंबर और नवंबर में होंगे आवासीय सत्र
Bharat 19/ कानपुर। देश को इंजीनियर और टेक्नोक्रेट देने वाला आईआईटी कानपुर अब उच्च शिक्षा के शिक्षकों को एक नई भूमिका के लिए तैयार करेगा। मकसद सिर्फ बेहतर पढ़ाने वाले शिक्षक तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें अकादमिक लीडरशिप और संस्थान संचालन की उन चुनौतियों के लिए तैयार करना है, जिनका सामना कालेज और विश्वविद्यालयों को करना पड़ता है। इसी उद्देश्य से आईआईटी कानपुर ने नर्चरिंग फ्यूचर लीडरशिप प्रोग्राम (NFLP) शुरू किया है। कार्यक्रम से देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के 120 से अधिक शिक्षक जुड़ चुके हैं। पांच दिन के आवासीय प्रशिक्षण में प्रतिभागी वित्तीय प्रबंधन से लेकर फैसले लेने, फैकल्टी और रिसर्च मैनेजमेंट तथा डिजिटल गवर्नेंस तक के गुर सीखेंगे।
क्लासरूम से आगे संस्थान चलाने की तैयारी
उच्च शिक्षा में शिक्षक की भूमिका अब केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं है। विभाग, कालेज और विश्वविद्यालयों के प्रभावी संचालन के लिए अकादमिक समझ के साथ प्रशासनिक, वित्तीय और प्रबंधन क्षमता की भी जरूरत होती है। आईआईटी कानपुर का NFLP इसी जरूरत को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इसका लक्ष्य शिक्षकों को केवल विषय विशेषज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य में संस्थान की दिशा तय करने वाले अकादमिक लीडर के रूप में तैयार करना है। कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी कानपुर के ऑफिस ऑफ आउटरीच एक्टिविटीज (OOA) की ओर से शिक्षा मंत्रालय के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम (MMTTP) के तहत किया जा रहा है।
फैसलों से फंड मैनेजमेंट तक मिलेगा प्रशिक्षण
इस कार्यक्रम की खासियत इसका दायरा है। प्रतिभागियों को उच्च शिक्षण संस्थानों के संचालन से जुड़े व्यावहारिक विषयों पर विशेषज्ञों के अनुभव और शोध से सीखने का अवसर मिलेगा। पाठ्यक्रम में वित्तीय प्रबंधन, संस्थान निर्माण में सहयोग, निर्णय लेने की प्रक्रिया, संगठनात्मक कार्य संस्कृति, फैकल्टी और रिसर्च मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता, उद्यमिता और स्टार्टअप, कानूनी एवं वैधानिक विषयों पर भी चर्चा होगी। यानी प्रशिक्षण का फोकस केवल अकादमिक दक्षता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बदलते उच्च शिक्षा ढांचे को समझने पर भी रहेगा।
एलुमनाई नेटवर्क और डिजिटल गवर्नेंस भी एजेंडे में
कॉलेज या विश्वविद्यालय की मजबूती अब केवल कैंपस और क्लासरूम तक सीमित नहीं है। संसाधन, पूर्व छात्रों का सहयोग, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता भी संस्थान की क्षमता तय करते हैं। इसीलिए NFLP में एलुमनाई के साथ मजबूत संबंध बनाने और डिजिटल गवर्नेंस जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि बदलती तकनीक और संस्थागत जरूरतों के बीच नेतृत्व की भूमिका कैसे बदल रही है।
देश के बड़े शिक्षाविद साझा करेंगे नेतृत्व अनुभव
कार्यक्रम में आईआईटी कानपुर के निदेशक के अलावा देश के प्रमुख शिक्षाविद और संस्थागत नेतृत्वकर्ता अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित के. चतुर्वेदी, आईआईएसईआर भोपाल के संस्थापक निदेशक प्रो. वीके सिंह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के पूर्व सीईओ और ट्राई के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आरएस शर्मा तथा एबीवी एंड आईआईआईएमटी ग्वालियर के निदेशक प्रो. एसएन सिंह शामिल हैं। NFLP के दो आवासीय सत्र 14 से 18 सितंबर और 16 से 20 नवंबर तक आयोजित किए जाएंगे।
पहले चार सत्रों के बाद बढ़ाया गया दायरा
आईआईटी कानपुर इससे पहले मार्च से अगस्त के बीच चार सत्रों में आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी, आईआईएम, केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों, मेडिकल कालेजों और सरकारी संस्थानों के शिक्षकों के लिए अकादमिक नेतृत्व से जुड़े सत्र आयोजित कर चुका है। अब नए NFLP कार्यक्रम के जरिए इस पहल को और व्यापक रूप दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा में एक बड़े बदलाव की जरूरत को रेखांकित करता है।
सिर्फ अच्छा शिक्षक होना अब काफी नहीं?
बदलती तकनीक, रिसर्च की प्रतिस्पर्धा, वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन, उद्योग से जुड़ाव और छात्रों की बदलती अपेक्षाओं ने कालेजों और विश्वविद्यालयों के संचालन को पहले से ज्यादा जटिल बना दिया है। ऐसे में आईआईटी कानपुर का NFLP एक नई जरूरत की ओर इशारा करता है कि उच्च शिक्षा संस्थानों को अब ऐसे शिक्षकों और प्रशासकों की जरूरत है, जिनके पास विषय की समझ के साथ नेतृत्व और संस्थान संचालन की क्षमता भी हो।


