Hot Topics

CSJMU Admission: 40 फीसदी सीटें खाली, आखिरी मौका

  • 618 कॉलेजों की करीब दो लाख सीटों पर दाखिले सुस्त, ग्रामीण क्षेत्रों के बीए और पीजी पाठ्यक्रमों में सबसे ज्यादा असर; 31 अगस्त तक बढ़ी प्रवेश अवधि

भारत 19
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) से संबद्ध डिग्री कॉलेजों में इस बार दाखिले की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी रही है। सत्र 2026-27 में करीब दो लाख सीटों पर चल रही प्रवेश प्रक्रिया के बावजूद लगभग 40 फीसदी सीटें खाली हैं। कॉलेजों की मांग पर विश्वविद्यालय ने प्रवेश की अवधि बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। सीएसजेएमयू से 618 कॉलेज संबद्ध हैं। रिक्त सीटों की स्थिति सबसे अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के डिग्री कॉलेजों और कई स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में चिंताजनक बताई जा रही है।

ग्रामीण कॉलेजों में बीए, पीजी पाठ्यक्रमों में भी सुस्ती

ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित डिग्री कॉलेजों में बीए की बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं। वहीं कई स्नातकोत्तर कॉलेजों में एमए, एमएससी और एमकॉम की 10 प्रतिशत सीटें भी नहीं भर सकी हैं। इसी स्थिति को लेकर कॉलेज प्रबंधन का प्रतिनिधिमंडल सीएसजेएमयू के कुलसचिव राकेश मिश्रा से मिला था। प्रबंधन ने प्रवेश की समय सीमा बढ़ाने की मांग रखी, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने दाखिले के लिए अतिरिक्त समय देने का फैसला किया।

एडमिशन से चूके छात्रों को अंतिम अवसर

प्रवेश अवधि बढ़ने से उन छात्र-छात्राओं को राहत मिली है, जो तय समय में दाखिले की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके थे। जरूरी दस्तावेज समय पर तैयार न होना, जानकारी का अभाव, आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियां इसके प्रमुख कारण रहे। अब ऐसे विद्यार्थी 31 अगस्त तक CSJMU से संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश ले सकेंगे। बढ़ी हुई अवधि को दाखिले का अंतिम अवसर माना जा रहा है।

कॉलेजों के सामने सिर्फ सीटें भरने की चुनौती नहीं

उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के महासचिव विनय त्रिवेदी के अनुसार, बड़ी संख्या में रिक्त सीटों ने कॉलेज प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी थी। इसका असर शैक्षणिक गतिविधियों और संसाधनों के संचालन पर भी पड़ सकता है। लेकिन मौजूदा प्रवेश स्थिति केवल इस सत्र की समस्या नहीं मानी जा रही। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या पारंपरिक डिग्री कॉलेज छात्रों की बदलती प्राथमिकताओं के साथ कदम नहीं मिला पा रहे हैं।

प्रोफेशनल कोर्स की ओर क्यों बढ़ रहा रुझान

कॉलेज प्रबंधन और शिक्षाविदों के अनुसार, बड़ी संख्या में छात्र अब पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों के बजाय रोजगार से सीधे जुड़े प्रोफेशनल और शॉर्ट टर्म कोर्स चुन रहे हैं। कंप्यूटर, मैनेजमेंट, वेब डेवलपमेंट, डिजिटल मार्केटिंग और यूएक्स डिजाइन जैसे पाठ्यक्रम कम समय में विशेष कौशल हासिल करने का विकल्प देते हैं। यही बदलाव बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों के सामने नई चुनौती बनकर उभर रहा है। हालांकि इन डिग्री पाठ्यक्रमों की भूमिका केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषय विद्यार्थियों की व्यापक समझ, अभिव्यक्ति और विश्लेषण क्षमता विकसित करते हैं। मौजूदा प्रवेश आंकड़े हालांकि यह संकेत जरूर दे रहे हैं कि छात्रों की प्राथमिकता अब ऐसे पाठ्यक्रमों की ओर तेजी से बढ़ रही है, जिनका संबंध सीधे रोजगार और विशेष कौशल से दिखाई देता है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News