– धान क्रय केंद्र से पेंशन और आवास तक की शिकायतें लेकर जनता पहुंची उप मुख्यमंत्री के दरबार; छह जिलों के अफसरों को फोन कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश
Bharat 19/ लखनऊ। सरकार जनता के दरवाजे तक पहुंचने की बात करती है, लेकिन सोमवार को लखनऊ में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जनता दर्शन में पहुंचे फरियादियों की तस्वीर ने शासन की निचली परत की दूसरी तस्वीर दिखाई। बरेली में धान क्रय केंद्र चाहिए, शाहजहांपुर में भी यही जरूरत है, उन्नाव में राशन कार्ड और प्रधानमंत्री आवास का इंतजार है, लखनऊ में विधवा पेंशन और बेटी की शादी के लिए मदद की गुहार है। अलग-अलग जिलों और अलग-अलग जरूरतों की ये शिकायतें आखिरकार उप मुख्यमंत्री की ड्योढ़ी पर पहुंचना सवाल खड़े करता है। चुनावी वर्ष में ये स्थिति सरकार को सचेत करने वाली होनी चाहिए।
जनता दर्शन में उप मुख्यमंत्री ने फरियादियों की बातें सुनीं, प्रार्थना-पत्र लिए और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन इस प्रक्रिया में एक दिलचस्प स्थिति भी सामने आई। जिन मामलों का बड़ा हिस्सा जिला या मंडल स्तर पर निपटाया जा सकता था, उनके लिए उप मुख्यमंत्री को खुद अधिकारियों से फोन पर बात करनी पड़ी। केशव प्रसाद मौर्य ने मंडलायुक्त झांसी के साथ अंबेडकर नगर, कानपुर देहात, भदोही, हमीरपुर और शाहजहांपुर के जिलाधिकारियों से दूरभाष पर बात की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। यानी जनता की शिकायत राजधानी तक पहुंची तो शासन की शीर्ष परत सक्रिय हुई, लेकिन उससे पहले की प्रशासनिक सीढ़ियों पर शिकायत कितनी आगे बढ़ी, यही इस पूरे घटनाक्रम का अहम पहलू बन गया।
किसान को क्रय केंद्र चाहिए, व्यवस्था को निर्देश
बरेली की ग्राम प्रधान सुनीता देवी ने अपने क्षेत्र में धान क्रय केंद्र स्थापित करने की मांग रखी। शाहजहांपुर के विमलेश मौर्य भी इसी मांग के साथ पहुंचे। किसानों की उपज की सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय मशीनरी से जुड़ी है। इसके बावजूद यह मांग जनता दर्शन तक पहुंची। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रकरण का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए और किसानों को फसल बेचने में परेशानी न होने देने को कहा। धान खरीद का मौसम सामने है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर क्रय केंद्र जैसी जरूरत का समय रहते समाधान होना ही प्रशासनिक तैयारी की कसौटी है। शिकायत के बाद निर्देश मिलना तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन व्यवस्था की मजबूती इस बात से तय होगी कि अगली बार किसान को यही मांग लेकर लखनऊ न आना पड़े।
पेंशन से राशन कार्ड तक पहुंची फरियाद
लखनऊ की प्रभा टंडन विधवा पेंशन की मांग लेकर पहुंचीं। उन्नाव की गायत्री राशन कार्ड में नाम जुड़वाने की समस्या लेकर आईं। दोनों मामले सीधे उन सरकारी योजनाओं से जुड़े हैं जिनका लाभ स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसी तरह उन्नाव की वंदना और कमला कुमारी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ चाहती हैं। लखनऊ के अमरनाथ ने बेटी के विवाह के लिए आर्थिक सहायता मांगी। पशुपालक विजय पाल वर्मा बस्ती से पशुवाड़ा निर्माण के लिए सरकारी मदद की उम्मीद लेकर पहुंचे तो मेरठ के जोगिन्दर सिंह ने शहरों में चल रही डेयरियों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग रखी। फरियादों की सूची अलग-अलग है, लेकिन इनके बीच एक समानता साफ है—सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी जरूरतें उस स्तर तक पहुंचने के बजाय जनता दर्शन तक पहुंच रही हैं, जहां उनका समाधान होना चाहिए।
मंत्री का फोन बना अगली सीढ़ी
जनता दर्शन में प्रार्थना-पत्र लेना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन छह जिलों के अधिकारियों को सीधे फोन करना इस कार्यक्रम की अलग तस्वीर पेश करता है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सिर्फ प्रकरण देखने के निर्देश नहीं दिए, बल्कि तत्काल संज्ञान लेकर कार्रवाई करने और जिला-मंडल स्तर पर निपट सकने वाले मामलों को वहीं समाप्त करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जनता की समस्याएं कागजी प्रक्रिया में अटकी न रहें। शासन स्तर पर निर्णय जरूरी हो तो पत्रावली समय से भेजी जाए और स्थानीय स्तर पर समाधान संभव हो तो वहीं निस्तारण किया जाए। यह निर्देश दरअसल शासन की उस कड़ी को मजबूत करने की जरूरत की ओर इशारा करते हैं, जहां सरकारी योजना और लाभार्थी के बीच सबसे सीधा संपर्क होता है।
गुड गवर्नेंस का मतलब लखनऊ तक पहुंचना नहीं
जनता दर्शन सरकार को शिकायतों का सीधा फीडबैक जरूर देता है, लेकिन इसकी सफलता इस बात में नहीं है कि कितने फरियादी उप मुख्यमंत्री तक पहुंचे। असली सफलता तब होगी जब धान क्रय केंद्र की मांग किसान स्थानीय स्तर पर रखे और वहीं जवाब मिले, पेंशन के लिए बुजुर्ग या विधवा को राजधानी का रास्ता न देखना पड़े, राशन कार्ड में नाम जोड़ने के लिए मंत्री का हस्तक्षेप जरूरी न हो और आवास या विवाह सहायता की पात्रता स्थानीय स्तर पर ही तय होकर लाभार्थी तक पहुंच जाए। सोमवार के जनता दर्शन में उप मुख्यमंत्री ने फरियादें सुनीं और अधिकारियों को सक्रिय किया। अब इस कवायद की असली कीमत तब साबित होगी, जब इन प्रार्थना-पत्रों का निस्तारण फाइलों में नहीं, फरियादियों की जिंदगी में दिखाई देगा।

