- कानपुर में जनसुनवाई, राजनीतिक भागीदारी, आरक्षण के साथ शिक्षा-रोजगार और मूलभूत सुविधाओं पर जुटाया फीडबैक
Bharat 19/ कानपुर नगर। स्थानीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग ने कानपुर में जनसुनवाई की। आयोग ने सरसैयाघाट स्थित नवीन सभागार और कल्याणपुर विकासखंड सभागार में निवर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवाद कर आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े तथ्य और सुझाव जुटाए।
आयोग के सदस्य एवं सेवानिवृत्त जिला जज बृजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई में निवर्तमान जिला पंचायत सदस्यों, ब्लॉक प्रमुखों एवं प्रशासकों, ग्राम प्रधानों एवं प्रशासकों तथा क्षेत्र पंचायत सदस्यों एवं प्रशासकों से स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक भागीदारी के बारे में जानकारी ली। पिछड़ा वर्ग के आरक्षण प्रतिशत, राजनीतिक और सामाजिक पिछड़ेपन के स्वरूप तथा आर्थिक स्थिति पर भी जनप्रतिनिधियों से फीडबैक लिया गया। उनके क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग की अनुमानित आबादी, प्रमुख जातियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति भी जानी गई। आयोग ने शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर भागीदारी से जुड़े सवाल भी पूछे।
पक्के मकान से पेयजल तक का लिया फीडबैक
जनसुनवाई में पिछड़ेपन को केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रखा गया। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के आवास, शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की स्थिति भी जानी गई। जनप्रतिनिधियों ने शैक्षिक पिछड़ापन दूर करने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने, आर्थिक स्थिति सुधारने और स्थानीय राजनीति में पिछड़ा वर्ग की भागीदारी बढ़ाने के सुझाव दिए। कल्याणपुर विकासखंड सभागार में भी अधिकारियों और निवर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों से स्थानीय स्तर की स्थिति पर जानकारी ली गई।
75 जिलों से जुटेगा अनुभवजन्य डेटा
आयोग के सदस्य बृजेश कुमार ने बताया कि उसका उद्देश्य स्थानीय ग्रामीण निकायों और पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक एवं सामाजिक पिछड़ेपन की वास्तविक स्थिति का अनुभवजन्य आकलन करना है। कानपुर प्रदेश का 22वां जिला है, जहां आयोग ने पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाई है। उन्होंने बताया कि आयोग प्रदेश के सभी 75 जिलों का भ्रमण कर तथ्यों, आंकड़ों और सुझावों को संकलित करेगा। सभी जिलों से प्राप्त जानकारी को समाहित कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। सुनवाई के दौरान सदस्य सेवानिवृत्त अपर जिला जज संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और सेवानिवृत्त आईएएस एसपी सिंह भी मौजूद रहे।


