– सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग समेत अधूरे विकास कार्यों के लिए कई जिलों को दूसरी व अंतिम किस्त; बुनियादी सुविधाओं पर सरकार का जोर
भारत 19
लखनऊ। शहरी गरीबों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने और अल्पविकसित व मलिन बस्तियों में अधूरे विकास कार्यों को पूरा कराने पर प्रदेश सरकार का जोर बढ़ा है। मुख्यमंत्री नगरीय अल्पविकसित एवं मलिन बस्ती विकास योजना के तहत कई जिलों की लंबित परियोजनाओं के लिए शासन ने दूसरी और अंतिम किस्त की वित्तीय स्वीकृति जारी की है। इन मंजूरियों में सड़क, नाली और इंटरलॉकिंग जैसे सीधे तौर पर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े काम शामिल हैं। 13 अगस्त को बस्ती, मैनपुरी और वाराणसी समेत कई जिलों की उन परियोजनाओं के लिए धन जारी किया गया है, जिनमें पहली किस्त मिलने के बाद काम अधूरे रह गए थे। सरकार ने अब शेष राशि उपलब्ध कराकर इन परियोजनाओं को पूरा कराने का रास्ता साफ किया है।
वाराणसी की 10 परियोजनाओं को 1.33 करोड़
वाराणसी में योजना के तहत 10 परियोजनाओं के अवशेष कार्यों के लिए 133.235 लाख रुपये, यानी 1.33 करोड़ रुपये से अधिक की दूसरी और अंतिम किस्त मंजूर की गई है। इन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत 276.790 लाख रुपये थी और पहली किस्त के रूप में 138.395 लाख रुपये पहले ही जारी किए जा चुके थे। इनमें बस्तियों में इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण जैसे काम शामिल हैं। रामनगर के कोदोपुर में आवासीय क्षेत्र में इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण भी इसी योजना का हिस्सा है। बस्ती जिले की एक परियोजना के लिए 4.89 लाख रुपये की दूसरी और अंतिम किस्त मंजूर की गई है। मोहल्ला नरहरिया के रानी पोखरा क्षेत्र में सीसी रोड निर्माण के लिए कुल 19.60 लाख रुपये स्वीकृत थे। इसमें 14.70 लाख रुपये पहले जारी किए जा चुके थे और अब शेष राशि उपलब्ध कराई गई है। मैनपुरी की तीन परियोजनाओं के अधूरे कार्य पूरे कराने के लिए 9.740 लाख रुपये की दूसरी और अंतिम किस्त स्वीकृत हुई है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 26.72 लाख रुपये थी, जिसमें 13.36 लाख रुपये पहली किस्त के तौर पर जारी किए जा चुके हैं। अब शेष कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराया गया है। परियोजनाओं में इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण के काम शामिल हैं।
सिर्फ पैसा नहीं, काम की निगरानी भी
शासन ने धनराशि जारी करने के साथ उसके इस्तेमाल और काम की निगरानी को लेकर भी शर्तें तय की हैं। परियोजनाओं में कराए जाने वाले कार्य, उनकी लागत और पूरा होने की अवधि की जानकारी कार्यस्थल पर नोटिस बोर्ड के जरिए सार्वजनिक करनी होगी। योजना और परियोजना का विवरण डूडा की वेबसाइट पर भी अपलोड करना होगा। स्वीकृत धनराशि का उपयोग चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में ही करना होगा। काम पूरा होने के बाद उपयोगिता प्रमाणपत्र शासन को उपलब्ध कराना होगा। तय अवधि में खर्च नहीं हुई धनराशि वापस करनी होगी।
बुनियादी सुविधाओं पर सीधा फोकस
इन वित्तीय स्वीकृतियों से गरीब और अल्पविकसित बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अधूरे काम पूरे होने की उम्मीद है। शासनादेशों में परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी संबंधित परियोजना अधिकारियों पर तय की गई है।


