- बीएड काउंसलिंग और डीएलएड प्रवेश प्रक्रिया एक साथ होने और कई विश्वविद्यालयों के रिजल्ट देर से जारी होने का डीएलएड प्रवेश पर पड़ा असर
- सत्र 2026-27 के लिए 11 अगस्त से शुरू होने वाली डीएलएड काउंसलिंग में अपेक्षाकृत कम अभ्यर्थियों के पहुंचने से कालेज प्रबंधन की बढ़ गई चिंता
कानपुर। उत्तर प्रदेश के शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (DElEd) करने का सपना देखने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के सामने इस बार प्रवेश का संकट खड़ा हो गया है। डीएलएड प्रवेश प्रक्रिया और बीएड काउंसलिंग 2026 के एक साथ होने से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी दोनों विकल्पों में एक साथ भाग नहीं ले पा रहे हैं।
डीएलएड में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 3 अगस्त निर्धारित की गई थी, जबकि काउंसलिंग प्रक्रिया 11 अगस्त से शुरू होनी है। दूसरी ओर, बीएड की काउंसलिंग 1 अगस्त से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगी। दोनों प्रवेश प्रक्रियाओं की तारीखों में टकराव के कारण डीएलएड के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या उम्मीद से काफी कम रह गई है।
ढाई लाख सीटों पर महज डेढ़ लाख आवेदन
प्रदेश में डीएलएड की करीब 2.50 लाख सीटें हैं, लेकिन इस बार लगभग 1.50 लाख अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया है। यानी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की आशंका ने डीएलएड कॉलेज संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षाविदों के मुताबिक, बीएड और डीएलएड में प्रवेश की पात्रता में अंतर भी इस स्थिति की एक बड़ी वजह है। डीएलएड में आवेदन के लिए अभ्यर्थी का स्नातक उत्तीर्ण होना जरूरी है। इसके विपरीत बीएड में स्नातक अंतिम वर्ष में पढ़ रहे छात्र-छात्राएं भी आवेदन कर सकते हैं।
देर से आए परीक्षा परिणाम ने भी बढ़ाई परेशानी
कई विश्वविद्यालयों के स्नातक अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं हो सके। ऐसे विश्वविद्यालयों के छात्रों के सामने डीएलएड में आवेदन करने का अवसर ही नहीं बचा। डीएलएड आवेदन प्रक्रिया शुरू होने तक जिन छात्रों का स्नातक परिणाम जारी नहीं हुआ था, वे निर्धारित पात्रता पूरी नहीं कर पाने के कारण आवेदन नहीं कर सके। शिक्षाविदों का कहना है कि यदि स्नातक परीक्षा परिणाम समय पर जारी हो जाते और बीएड व डीएलएड की प्रवेश प्रक्रियाओं की तारीखों में टकराव नहीं होता तो डीएलएड के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या काफी अधिक हो सकती थी।
बीएड और डीएलएड में उलझे छात्र
प्रवेश प्रक्रिया के जानकारों के मुताबिक, बड़ी संख्या में छात्र बीएड और डीएलएड दोनों को शिक्षक बनने के बेहतर विकल्प के रूप में देखते हैं। ऐसे में दोनों पाठ्यक्रमों की काउंसलिंग एक साथ होने से छात्रों के सामने किसी एक विकल्प को चुनने की मजबूरी पैदा हो गई है। कई छात्र-छात्राएं इस बात को लेकर भी मायूस हैं कि बीएड की काउंसलिंग में शामिल होने के कारण वे डीएलएड की प्रवेश प्रक्रिया का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। दूसरी ओर, जिन छात्रों के स्नातक परिणाम समय पर नहीं आए, वे डीएलएड आवेदन की अंतिम तारीख ही गंवा चुके हैं।
बिहार और मध्य प्रदेश में डीएलएड धारकों को अवसर
शिक्षाविदों का कहना है कि बिहार और मध्य प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में डीएलएड धारक अभ्यर्थियों के लिए लगातार अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। इसके अलावा निजी स्कूलों में भी प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग बनी रहती है। ऐसे में डीएलएड करने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए इस सत्र में प्रवेश का अवसर नहीं मिलना निराशाजनक है।
2004 में मिली थी निजी डीएलएड कॉलेजों को मान्यता
उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने बताया कि प्रदेश में पहले केवल सरकारी डीएलएड कॉलेज हुआ करते थे। उस समय इस पाठ्यक्रम को बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (BTC) के नाम से जाना जाता था। कॉलेजों की संख्या कम होने के कारण छात्रों को प्रवेश के सीमित अवसर मिलते थे। उन्होंने बताया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने वर्ष 2004 में 40 बीटीसी कॉलेजों को मान्यता दी थी। इसके बाद वर्ष 2010 में इन कॉलेजों को प्रदेश सरकार से संबद्धता मिली।
डीएलएड करने के फायदे- डीएलएड प्राथमिक स्तर पर शिक्षक बनने के लिए महत्वपूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम है।
- यह दो वर्ष का डिप्लोमा कोर्स है।- स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद इसमें प्रवेश लिया जा सकता है।
- डीएलएड के बाद सरकारी शिक्षक भर्ती में पात्रता हासिल करने के अवसर मिलते हैं।
- निजी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग रहती है।- प्रवेश प्रक्रिया में मेरिट को महत्व दिया जाता है।
छात्रों के लिए इस बार क्यों है मुश्किल
- बीएड काउंसलिंग : 1 से 31 अगस्त 2026
-डीएलएड आवेदन की अंतिम तारीख : 3 अगस्त 2026 - डीएलएड काउंसलिंग : 11 अगस्त 2026 से
- कुल डीएलएड सीटें : करीब 2.50 लाख
- आवेदन करने वाले अभ्यर्थी : करीब 1.50 लाख


