यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग, नौ की मौत
कश्मीरी गेट से महोबा जा रही BR32PA8647 में 30-35 यात्री सवार थे; नौ की मौत, कई ने खिड़कियां तोड़कर बचाई जान, चालक-परिचालक गिरफ्तार
भारत 19
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात जेवर क्षेत्र में 33वें किलोमीटर के पास दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में भीषण आग लग गई। करीब 30-35 यात्रियों से भरी BR32PA8647 बस कुछ ही देर में आग की लपटों से घिर गई। हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। धुआं भरने के बाद कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलकर जान बचाई। पुलिस ने चालक और परिचालक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी मृतकों और घायलों के लिए सहायता घोषित की गई है।
जलने की गंध के बाद भी नहीं रुकी बस
हादसे से ठीक पहले यात्रियों ने चालक केबिन की ओर से जलने की गंध महसूस की थी। जेवर थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी देकर बस रोकने और जांच करने को कहा था। आरोप है कि शिकायत के बावजूद बस तत्काल नहीं रोकी गई। FIR में चालक और परिचालक के केबिन में धूम्रपान करने का आरोप भी लगाया गया है। इसके बाद चालक की सीट के पास आग दिखाई दी और तेजी से फैलने लगी। यात्रियों के मुताबिक धुआं बढ़ने से बस के भीतर दृश्यता कम हो गई। इसी दौरान कई लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़े और बाहर निकलने के लिए छलांग लगाई।
अब बस की स्लीपर संरचना की होगी पड़ताल
हादसे में यात्रियों को खिड़कियां तोड़कर निकलना पड़ा, इसलिए जांच का एक अहम हिस्सा बस की आपातकालीन निकासी व्यवस्था होना चाहिए। आरसी, निर्माण संबंधी दस्तावेज और स्वीकृत बॉडी लेआउट से बस की लंबाई, मॉडल, निर्माण वर्ष और निर्धारित यात्री क्षमता का मिलान किया जा सकता है। इसके बाद वास्तविक स्लीपर लेआउट की जांच जरूरी होगी। बर्थ की स्थिति, केंद्रीय रास्ता, मुख्य दरवाजे, इमरजेंसी विंडो और आपातकालीन निकास यात्रियों के लिए कितने सुलभ थे, यह देखा जाना चाहिए। इमरजेंसी ग्लास तोड़ने के लिए हैमर और दूसरे सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे या नहीं, इसकी भी पड़ताल हो सकती है।
दस्तावेज और जला ढांचा खोलेंगे मोडिफिकेशन की परतें
आग से बस का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त है, लेकिन बचे हुए बॉडी फ्रेम, दरवाजे, खिड़कियों और दूसरे हिस्सों को स्वीकृत डिजाइन से मिलाया जा सकता है। इससे पता चलेगा कि बस की मूल संरचना में बाद में कोई बदलाव हुआ था या नहीं। यदि स्लीपर लेआउट या बॉडी में स्वीकृत डिजाइन से अलग कोई परिवर्तन मिलता है तो संबंधित अनुमति और रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिटनेस प्रमाणपत्र और निरीक्षण के दौरान दर्ज विवरण से भी वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकता है। यह पड़ताल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आग लगने का कारण और आग के बाद यात्रियों की निकासी, दो अलग जांच बिंदु हैं।
19 चालानों वाला रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद बस नंबर के परिवहन रिकॉर्ड की पड़ताल में नियम उल्लंघनों का पुराना रिकॉर्ड सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बस पर 19 चालान और करीब 1.75 लाख रुपये की लंबित राशि दर्ज थी। इनमें ओवरस्पीडिंग और परमिट संबंधी उल्लंघन शामिल बताए गए हैं। जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलाने का चालान भी दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इन पुराने उल्लंघनों को हादसे का कारण नहीं माना जा सकता। लेकिन जांच में यह जरूर देखा जा सकता है कि बार-बार नियम उल्लंघन दर्ज होने के बावजूद बस के संचालन पर परिवहन विभाग की ओर से क्या कार्रवाई हुई थी।
आग की तकनीकी वजह पर फोरेंसिक जांच
प्रारंभिक तकनीकी जांच में एसी सिस्टम में स्पार्क या शॉर्ट सर्किट के बाद इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल के आग पकड़ने की आशंका जताई गई है। यह अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है। फोरेंसिक जांच में एसी, वायरिंग, इंजन, तेल और ईंधन व्यवस्था के साथ संभावित मोडिफिकेशन की स्थिति देखी जाएगी। इससे आग के स्रोत और उसके तेजी से फैलने की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
CCTV से तय होगा घटनाक्रम का समय
जांच में यमुना एक्सप्रेसवे के CCTV, टोल रिकॉर्ड, बस की लोकेशन और यात्रियों के मोबाइल वीडियो महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इनसे यह मिलाया जा सकेगा कि जलने की गंध की शिकायत कब हुई, उस समय बस कहां थी, चेतावनी के बाद कितनी दूरी तय की और आग दिखाई देने के बाद कितनी देर में बस रुकी। यही समयक्रम यह समझने में मदद करेगा कि यात्रियों की पहली शिकायत और आग के विकराल रूप लेने के बीच कितना वक्त था।
चालक-परिचालक की भूमिका की जांच जारी
पुलिस ने चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया है। यात्रियों के बयान, FIR में दर्ज आरोप, बस की तकनीकी जांच और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है। मामले में अंतिम तस्वीर फोरेंसिक रिपोर्ट, वाहन के मूल दस्तावेज, स्वीकृत बॉडी डिजाइन और घटनाक्रम के डिजिटल साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल जांच के दो केंद्रीय प्रश्न हैं कि आग किस वजह से लगी और आग लगने के बाद यात्रियों के लिए सुरक्षित निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।


