- वैश्विक स्तर पर वीज़ा अपॉइंटमेंट में बदलाव, छात्रों से कारोबारियों तक बढ़ी चिंता, नई स्क्रीनिंग व्यवस्था के प्रशिक्षण के बीच अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अपॉइंटमेंट प्रभावित
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों की वीज़ा अपॉइंटमेंट व्यवस्था में अस्थायी बदलाव किया है। इसके पीछे कॉन्सुलर अधिकारियों के लिए नई वैश्विक स्क्रीनिंग और प्रशिक्षण प्रक्रिया बताई गई है। कई आवेदकों को अपॉइंटमेंट दोबारा तय किए जाने की सूचना मिल रही है, जबकि नई व्यवस्था सामान्य रूप से कब तक चलेगी, इस पर स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।
भारत के लिए यह केवल अमेरिकी आव्रजन नीति में बदलाव नहीं है। अमेरिका जाने वाले भारतीयों की बड़ी संख्या को देखते हुए इसका असर पढ़ाई, पारिवारिक यात्रा, कारोबार, पेशेवर यात्राओं और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर पड़ सकता है। हालांकि अलग-अलग वीज़ा श्रेणियों और अमेरिकी मिशनों पर असर एक जैसा होगा या नहीं, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
छात्रों की टाइमिंग बिगड़ सकती है
अमेरिका भारतीय छात्रों के प्रमुख विदेशी शिक्षा गंतव्यों में शामिल है। जिन छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल चुका है और यात्रा से पहले वीज़ा इंटरव्यू की जरूरत है, उनकी योजना अपॉइंटमेंट टलने से प्रभावित हो सकती है। देरी बढ़ने पर सेमेस्टर शुरू होने, यात्रा टिकट और आवास जैसी तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।
पर्यटक और परिवार भी इंतजार में
भारत से बड़ी संख्या में लोग अमेरिका में रह रहे परिवार से मिलने, पर्यटन या निजी कामों के लिए वीज़ा लेते हैं। B1/B2 जैसी वीज़ा श्रेणियों में इंटरव्यू या नई अपॉइंटमेंट की तारीख आगे खिसकती है तो पहले से यात्रा तय कर चुके लोगों को अपनी योजना बदलनी पड़ सकती है। अमेरिकी विदेश विभाग पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि वीज़ा अपॉइंटमेंट की उपलब्धता स्थान के अनुसार अलग-अलग होती है और रद्द या बदली गई अपॉइंटमेंट के बारे में आवेदकों को सूचित किया जाता है।
कारोबार और पेशेवर यात्राओं पर भी असर
भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी, तकनीकी और कॉरपोरेट संपर्क व्यापक हैं। कंपनियों के अधिकारी, विशेषज्ञ और कारोबारी बैठक, निवेश, सम्मेलन या अन्य पेशेवर कामों के लिए अमेरिका जाते हैं। यदि अपॉइंटमेंट में देरी व्यापक स्तर पर जारी रहती है, तो ऐसी यात्राओं की योजना भी प्रभावित हो सकती है।
यह असर खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जिनकी यात्रा किसी निश्चित बैठक, प्रोजेक्ट, विश्वविद्यालय सत्र या पारिवारिक कार्यक्रम से जुड़ी है। यानी समस्या सिर्फ वीज़ा मिलने या न मिलने की नहीं, बल्कि वीज़ा प्रक्रिया की समय सीमा अनिश्चित होने की भी है।
पहले से लंबी वेटिंग बढ़ने का खतरा
भारतीय आवेदकों के लिए अमेरिकी वीज़ा अपॉइंटमेंट की उपलब्धता पहले भी एक बड़ा मुद्दा रही है। नई वैश्विक स्क्रीनिंग प्रक्रिया के कारण यदि बड़ी संख्या में अपॉइंटमेंट को आगे बढ़ाया जाता है, तो बैकलॉग बढ़ने की आशंका है। इससे नए आवेदकों के साथ-साथ उन लोगों को भी इंतजार करना पड़ सकता है, जिनकी यात्रा योजनाएं पहले से तय हैं। Reuters के अनुसार, कुछ आवेदकों को अपॉइंटमेंट दोबारा तय किए जाने की सूचना मिली है, लेकिन व्यापक व्यवस्था की अवधि स्पष्ट नहीं की गई है।
भारत के लिए असली चिंता क्या है?
इस घटनाक्रम का भारतीय हितों से सबसे बड़ा सरोकार लोगों की आवाजाही और दोनों देशों के बीच मानव संपर्क से है। अमेरिका भारतीय छात्रों, आईटी और अन्य पेशेवरों, कारोबारियों तथा भारतीय मूल के परिवारों के लिए प्रमुख गंतव्य है। ऐसे में वीज़ा अपॉइंटमेंट प्रक्रिया में वैश्विक स्तर पर आई रुकावट या देरी का प्रभाव सीधे भारतीय आवेदकों तक पहुंच सकता है।

