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कानपुर में HBTU का स्मार्ट ड्रोन बताएगा फसल की बीमारी

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर और कैमरों से लैस ड्रोन करेगा फसलों की सेहत की निगरानी, कीट-रोग और पोषक तत्वों की कमी पहचानने में मिलेगी मदद

भारत 19
कानपुर
। खेतों की निगरानी अब सिर्फ जमीन पर घूमकर नहीं, बल्कि आसमान से भी होगी। HBTU Kanpur Smart Drone आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड सेंसर और कैमरों की मदद से फसलों की सेहत का आकलन करेगा। यह स्मार्ट कृषि ड्रोन खेतों के ऊपर उड़कर फसल में बीमारी, कीट प्रकोप, पोषक तत्वों की कमी और क्रॉप स्ट्रेस के संकेतों की पहचान करने के साथ संभावित पैदावार का अनुमान लगाने में भी मदद करेगा।

हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) ने इंटीग्रेटेड फ्लाइट कंट्रोलर से लैस एडवांस्ड मल्टीपरपस ड्रोन विकसित किया है। इस परियोजना के लिए डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी-आईआईटी भिलाई इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (DST-IBITF) से 37.6 लाख रुपये का अनुदान मंजूर हुआ है। शोध टीम ने परियोजना के पहले चरण का डेमो कर खेतों से जरूरी डेटा जुटाया है और अब दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है।

AI स्मार्ट ड्रोन कैसे पहचानेगा फसल की बीमारी

स्मार्ट ड्रोन खेतों के ऊपर उड़कर फसलों की तस्वीरें और अन्य जरूरी आंकड़े जुटाएगा। इसमें लगे कैमरे और सेंसर फसल में होने वाले तनाव यानी क्रॉप स्ट्रेस के संकेत पकड़ने में मदद करेंगे। इसके बाद तस्वीरों और डेटा का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण किया जाएगा। इस विश्लेषण के जरिए फसल रोग, कीट प्रकोप और पोषक तत्वों की कमी के संभावित संकेतों की पहचान आसान हो सकेगी। किसानों को शुरुआती चरण में फसल की समस्या का पता चलने पर समय रहते उचित उपचार और संसाधनों के इस्तेमाल का निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। प्रोजेक्ट के सह-अन्वेषक प्रो. एके राठौर के अनुसार, ड्रोन से जुटाई जाने वाली तस्वीरों और आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इससे बड़े कृषि क्षेत्र की कम समय में निगरानी संभव होगी और फसल की स्थिति को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझा जा सकेगा।

क्रॉप हेल्थ डेटासेट से होगी फसल की निगरानी

HBTU के स्मार्ट ड्रोन प्रोजेक्ट में क्रॉप हेल्थ डेटासेट तैयार किया जा रहा है। इसके साथ वेजिटेशन इंडेक्स आधारित विश्लेषण का इस्तेमाल कर फसलों की हरियाली, विकास और तनाव की स्थिति का आकलन किया जाएगा। मंगलवार को विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के निर्देशन में छात्र दल ने स्मार्ट ड्रोन का डेमो कर परियोजना के पहले चरण के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए। यह डेटा भविष्य में AI आधारित फसल निगरानी मॉडल और ऑटोमेटेड क्रॉप हेल्थ रिपोर्ट विकसित करने में उपयोगी हो सकता है।

बड़े खेत की कम समय में होगी निगरानी

कृषि ड्रोन तकनीक का सबसे बड़ा फायदा बड़े क्षेत्र की तेजी से निगरानी है। पारंपरिक तरीके से खेत के हर हिस्से तक पहुंचकर फसल की जांच करने में समय और श्रम लगता है। ड्रोन से हवा से तस्वीरें और डेटा जुटाकर पूरे खेत की स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है। फसल में बीमारी या कीट प्रकोप के शुरुआती संकेत मिलने पर अनावश्यक दवाओं और कीटनाशकों के छिड़काव को कम करने की संभावना भी बनेगी। इससे खेती की लागत घटाने, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और फसल की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।

सैटेलाइट और ड्रोन डेटा को जोड़ेगा अगला चरण

प्रोजेक्ट का पहला चरण पूरा होने के बाद अब दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है। इसमें सैटेलाइट और ड्रोन डेटा फ्यूजन का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन से मिलने वाली नजदीकी और विस्तृत जानकारी को सैटेलाइट से प्राप्त व्यापक क्षेत्र के डेटा के साथ जोड़कर फसल की स्थिति का अधिक समग्र आकलन करने की योजना है। अगले चरण में किसानों के लिए ऑटोमेटेड क्रॉप हेल्थ रिपोर्ट तैयार करने और एक फिनटेक समाधान विकसित करने पर भी काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य खेती से जुड़े डेटा को किसानों के आर्थिक और बाजार संबंधी निर्णयों से जोड़ना है।

कटाई से पहले मिल सकता है पैदावार का अनुमान

स्मार्ट ड्रोन से फसल की सेहत और संभावित उत्पादन का आकलन होने पर किसान कटाई से पहले ही अपनी उपज का बेहतर अनुमान लगा सकेंगे। इससे भविष्य में बाजार की योजना बनाने और फसल की बेहतर कीमत हासिल करने के लिए पहले से तैयारी की जा सकेगी। परियोजना के प्रस्तावित मॉडल के अनुसार फसल की सेहत और पैदावार के अनुमान के आधार पर किसान कटाई से पहले अपनी उपज की बोली लगाने की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और बाजार तक सीधी पहुंच मजबूत करने की संभावना है।

एग्री बिजनेस कंपनियों के लिए भी उपयोगी होगा डेटा

ड्रोन से जुटाया गया कृषि डेटा प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट एनालिसिस और रणनीतिक योजना के लिए एग्री-बिजनेस कंपनियों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। परियोजना के प्रस्तावित मॉडल में एकत्र आंकड़ों को लाइसेंस के आधार पर उपलब्ध कराने की संभावना भी शामिल है।

पानी, खाद और कीटनाशक के सही इस्तेमाल में मदद

फसल की स्थिति का सटीक आकलन होने पर किसानों को पानी, उर्वरक और कीटनाशकों के जरूरत आधारित इस्तेमाल के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकती है। इससे संसाधनों के अनावश्यक उपयोग को कम करने और स्मार्ट खेती व टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में मदद मिलेगी।

प्रोफेसरों और छात्रों की टीम ने संभाला प्रोजेक्ट

स्मार्ट ड्रोन परियोजना के मुख्य अन्वेषक एचबीटीयू के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. एसवीएआर शास्त्री हैं। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. एके राठौर और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विवेक वर्मा सह-अन्वेषक हैं। परियोजना के पहले चरण में छात्र दल का नेतृत्व कृष्ण मुरारी गुप्ता ने किया। टीम में बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग अंतिम वर्ष के छात्र उदित गुप्ता, हिमांशु मौर्य और अमय मिश्रा शामिल रहे। एचबीटीयू के कुलपति प्रो. शमशेर और रजिस्ट्रार अमित कुमार राठौर ने एडवांस्ड मल्टीपरपस ड्रोन के पहले चरण का डेमो देखा और इस मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े फैकल्टी और छात्र दल को बधाई दी।

स्मार्ट कृषि ड्रोन से किसानों को ये फायदे

  • बड़े कृषि क्षेत्र की कम समय में निगरानी।
  • फसल की सेहत का डेटा आधारित आकलन।
  • बीमारी और कीट प्रकोप के शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद।
  • पोषक तत्वों की कमी और क्रॉप स्ट्रेस का पता लगाने की संभावना।
  • पानी, खाद और कीटनाशकों का जरूरत आधारित इस्तेमाल।
  • अनावश्यक दवाओं और कीटनाशकों के छिड़काव में कमी की संभावना।
  • फसल की गुणवत्ता और संभावित पैदावार का बेहतर अनुमान।
  • सैटेलाइट और ड्रोन डेटा फ्यूजन से व्यापक निगरानी।
  • ऑटोमेटेड क्रॉप हेल्थ रिपोर्ट की दिशा में तकनीकी तैयारी।
  • किसानों को उत्पादन और बाजार संबंधी निर्णय लेने में संभावित मदद।

HBTU कानपुर का यह स्मार्ट ड्रोन प्रोजेक्ट कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर, कैमरा तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि सैटेलाइट डेटा फ्यूजन और ऑटोमेटेड क्रॉप हेल्थ रिपोर्ट वाला अगला चरण सफल रहा, तो यह तकनीक फसल की बीमारी पहचानने से लेकर उत्पादन का अनुमान और स्मार्ट खेती की योजना बनाने तक किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है।

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