- PMGSY-IV में गुणवत्ता, टिकाऊपन और जलवायु-सहनीयता पर जोर; UPRRDA के CEO शिव सहाय अवस्थी ने बताया प्रदेश में 80 हजार किमी से अधिक ग्रामीण सड़क नेटवर्क, FDR तकनीक में यूपी देश में अग्रणी
भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के साथ अब सड़क निर्माण में पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) के मुताबिक प्रदेश में अब तक 5,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (FDR) तकनीक से किया जा चुका है। इस तकनीक में पुरानी सड़क की सामग्री को दोबारा इस्तेमाल कर सड़क की मजबूत आधार परत तैयार की जाती है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित PMGSY चिंतन शिविर-2026 में UPRRDA के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी और नई निर्माण तकनीकों पर उत्तर प्रदेश के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 80,000 किलोमीटर से अधिक का ग्रामीण सड़क नेटवर्क है और राज्य अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी PMGSY-IV में प्रवेश कर रहा है।
5000 किमी से ज्यादा सड़कों में FDR तकनीक
शिव सहाय अवस्थी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण सड़क निर्माण में फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (Full Depth Reclamation) तकनीक के इस्तेमाल में देश में अग्रणी भूमिका निभाई है। FDR में पुरानी सड़क की सामग्री को निर्धारित गहराई तक मशीनों से मिलाकर उसमें जरूरी बाइंडर और पानी मिलाया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को दबाकर मजबूत आधार तैयार किया जाता है और उसके ऊपर सड़क की नई परत बिछाई जाती है। UPRRDA के अनुसार प्रदेश में अब तक 5,000 किलोमीटर से अधिक FDR सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। इस तकनीक से पुरानी सड़क की उपयोगी सामग्री का पुन: इस्तेमाल होता है, जिससे नई निर्माण सामग्री की जरूरत और सड़क निर्माण से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
PMGSY-IV में गुणवत्ता और टिकाऊपन पर जोर
अवस्थी ने बताया कि PMGSY के चौथे चरण में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और लंबे समय तक टिकाऊ रहने के साथ जलवायु-सहनीयता, नवाचार और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जाएगी। UPRRDA के मुताबिक नए चरण में ग्रामीण मार्गों को स्थानीय परिस्थितियों और बदलते मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार करने पर जोर रहेगा। सड़क निर्माण में नई तकनीकों और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की योजना है।
सड़क से बाजार तक आसान होगी किसानों की पहुंच
ग्रामीण सड़क नेटवर्क को केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाली बुनियादी संरचना के तौर पर देखा जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क से किसानों के लिए उत्पादों को स्थानीय बाजार और मंडियों तक पहुंचाना आसान होता है। इसी तरह स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े अवसरों तक पहुंच भी बेहतर सड़क संपर्क के जरिए आसान होती है।
दूसरे राज्यों के अधिकारी कर रहे यूपी की तकनीक का अध्ययन
UPRRDA के CEO ने बताया कि उत्तर प्रदेश में FDR सहित ग्रामीण सड़क निर्माण में अपनाई जा रही तकनीकों और कार्यप्रणाली को समझने के लिए दूसरे राज्यों के अधिकारी भी प्रदेश का अध्ययन करने पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि PMGSY चिंतन शिविर से मिले अनुभवों को प्रदेश में लागू करते हुए ग्रामीण सड़कों को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने पर काम किया जाएगा। लक्ष्य ग्रामीण सड़क नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।
80 हजार किमी से ज्यादा ग्रामीण सड़क नेटवर्क
उत्तर प्रदेश में 80,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़क नेटवर्क होने का दावा UPRRDA की ओर से किया गया है। PMGSY-IV में इस नेटवर्क को बेहतर बनाने के साथ उन गांवों तक सड़क संपर्क पहुंचाने पर जोर रहेगा, जहां अभी अंतिम छोर की कनेक्टिविटी चुनौती बनी हुई है। ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता, निर्माण तकनीक और रखरखाव में सुधार के जरिए गांवों को बाजार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों से जोड़ना इस चरण की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।


