- CRISP व्यवस्था में दूसरे जोन के अधिकारी करेंगे वार्षिक रिटर्न की प्रारंभिक जांच, स्थानीय अफसर ही जारी करेंगे नोटिस
BHARAT 19/ कानपुर। उत्तर प्रदेश में जीएसटी वार्षिक रिटर्न की जांच व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य कर विभाग ने क्रॉस-जोन रैंडमाइज्ड इंपार्शियल स्क्रूटिनी प्लेटफार्म (सीआरआइएसपी) लागू किया है। इसके तहत वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिटर्न की जांच के लिए चुने गए मामलों की प्रारंभिक जांच अब उसी जोन के अधिकारी नहीं करेंगे। ऐसे मामलों को दूसरे जोन के अधिकारियों को सौंपा जाएगा। विभाग की इस पहल का उद्देश्य जांच में निष्पक्षता लाना और स्थानीय स्तर पर कारोबारी-अधिकारी के परिचय के संभावित प्रभाव को कम करना है। इसे आयकर विभाग की फेसलेस जांच की तर्ज पर राज्य कर विभाग की ओर से उठाया गया पहला कदम भी माना जा रहा है। हालांकि, व्यापारी और अधिवक्ता इस व्यवस्था के विरोध में हैं।
कानपुर की रिटर्न दूसरे जोन, दूसरे जोन की यहां जांच
नई व्यवस्था में किसी कारोबारी का जीएसटी पंजीकरण जिस जोन में है, उसी जोन के अधिकारी को उसकी चयनित वार्षिक रिटर्न की प्रारंभिक विश्लेषणात्मक जांच नहीं मिलेगी। सीआरआइएसपी के माध्यम से मामलों का अंतर-जोन क्रमवार आवंटन किया जाएगा।
मसलन, कानपुर के किसी कारोबारी की वार्षिक रिटर्न जांच के लिए चुनी जाती है तो उसकी प्रारंभिक जांच किसी दूसरे जोन के अधिकारी को मिल सकती है। इसी तरह दूसरे जोन के किसी कारोबारी की रिटर्न कानपुर के अधिकारी को सौंपी जा सकती है।
दूसरे जोन का अफसर जांचेगा, नोटिस स्थानीय अधिकारी देगा
दूसरे जोन का अधिकारी समीक्षा अधिकारी के रूप में रिटर्न की विश्लेषणात्मक जांच करेगा। वह उपलब्ध जीएसटी आंकड़ों और रिटर्न में संभावित विसंगतियों की पड़ताल कर रिपोर्ट तैयार करेगा। जरूरत होने पर एएसएमटी-10 के लिए प्रारूप अथवा सुझाव भी तैयार कर सकता है। हालांकि समीक्षा अधिकारी सीधे करदाता से संपर्क नहीं कर सकेगा और न ही वैधानिक नोटिस जारी करेगा। दूसरे जोन के समीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट मिलने के बाद कारोबारी के क्षेत्राधिकार वाला अधिकारी उसकी समीक्षा करेगा। विसंगति मिलने पर वही जीएसटी प्रपत्र एएसएमटी-10 जारी करेगा और आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगा। यानी सीआरआइएसपी से सिर्फ प्रारंभिक जांच का स्थान बदलेगा, कारोबारी का कानूनी क्षेत्राधिकार नहीं।
सिफारिश मानने से लेकर खारिज करने तक दर्ज करना होगा कारण
सीआरआइएसपी में समीक्षा अधिकारी की सिफारिश पर आगे क्या कार्रवाई हुई, इसका रिकॉर्ड भी रखना होगा। सिफारिश स्वीकार करने, उसमें बदलाव करने, उसे खारिज करने, मामला बंद करने या लंबित रखने की स्थिति में कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। इससे जांच प्रक्रिया में अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
हर जीएसटी जांच पर लागू नहीं होगी CRISP व्यवस्था
सीआरआइएसपी सभी प्रकार की जीएसटी जांच पर लागू नहीं होगी। जांच-पड़ताल, विशेष लेखा परीक्षण, निरीक्षण या तलाशी से जुड़े मामलों, अदालत के निर्देश पर चल रहे मामलों तथा कुछ अन्य श्रेणियों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।
20 जोन के कारोबारियों की रिटर्न होगी क्रॉस-जोन जांच
राज्य कर विभाग ने प्रदेश को 20 जोन में बांट रखा है। इनमें गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद प्रथम, गाजियाबाद द्वितीय, लखनऊ प्रथम, लखनऊ द्वितीय, कानपुर प्रथम, कानपुर द्वितीय, इटावा, वाराणसी प्रथम, वाराणसी द्वितीय, आगरा, प्रयागराज, सहारनपुर, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, अयोध्या, झांसी, अलीगढ़ और गोरखपुर शामिल हैं। सीआरआइएसपी के तहत इन जोन में पंजीकृत कारोबारियों की चयनित वार्षिक रिटर्न की प्रारंभिक जांच दूसरे जोन के अधिकारियों को सौंपी जा सकेगी।
वित्त वर्ष 2024-25 से शुरू होगा पहला चरण
सीआरआइएसपी का पहला चरण वित्त वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिटर्न की जांच से शुरू किया जा रहा है। आगे इस व्यवस्था को मासिक रिटर्न की जांच तक बढ़ाने की योजना है।
व्यापारी बोले- अधिकारियों पर भरोसा नहीं तो व्यवस्था सुधारें
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष गुप्ता का कहना है कि यह प्रक्रिया आगे फेसलेस व्यवस्था की ओर जाती दिख रही है। जांच दूसरे जोन में नहीं भेजी जानी चाहिए। विभाग को यदि अपने अधिकारियों की निष्ठा पर किसी तरह का शक है तो उसके लिए विभाग को किसी दूसरे अधिकारी को वहां बैठाना चाहिए। राज्य कर विभाग ने इस संबंध में सर्कुलर संख्या 119/2026-एसजीएसटी जारी किया है। मूल सर्कुलर छह जुलाई 2026 का है। विभाग की 2026-27 की सूची में इसे वार्षिक रिटर्न की जांच के लिए सीआरआइएसपी व्यवस्था लागू करने से संबंधित बताया गया है।


