- लखनऊ में 20 सितंबर तक इंडिया फूड एक्सपो-2026; खाद्य प्रसंस्करण में रोजगार और कारोबार की संभावनाओं पर जोर, केशव मौर्य ने युवाओं से उद्योग लगाने का आह्वान किया
भारत 19
लखनऊ। खेत और बाग की उपज को सिर्फ मंडियों तक सीमित रखने के बजाय उसे प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों में बदलकर बड़े बाजार तक पहुंचाने पर उत्तर प्रदेश में जोर बढ़ रहा है। इसी कड़ी में लखनऊ के गोमती नगर स्थित रेगालिया ग्रीन्स में शुक्रवार से इंडिया फूड एक्सपो-2026 शुरू हुआ। तीन दिन चलने वाला यह आयोजन 20 सितंबर तक चलेगा और इसमें खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक, मशीनरी, उत्पाद, गुणवत्ता, पैकेजिंग, बाजार और कारोबार विस्तार पर चर्चा हो रही है। आयोजन में खाद्य प्रसंस्करण और एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों के लिए नए बाजार, तकनीक और वित्तीय अवसरों पर भी फोकस है।
उद्घाटन के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि कृषि और बागवानी उत्पादन में उत्तर प्रदेश की मजबूत स्थिति को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़कर किसानों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठाकर खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयां लगाने का आह्वान किया। मौर्य के मुताबिक राज्य का लक्ष्य कृषि उत्पादन को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर बाजार का दायरा बढ़ाना है।
100 के करीब प्रदर्शनियां, तकनीक से कारोबार तक फोकस
एक्सपो में खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली मशीनें, उपकरण और अलग-अलग खाद्य उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। आयोजन में खाद्य प्रसंस्करण तकनीक, गुणवत्ता और सुरक्षा, पैकेजिंग, वैल्यू एडिशन, निर्यात और कारोबार विस्तार जैसे विषयों पर परिचर्चा और प्रशिक्षण सत्र भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार एक्सपो में देश के विभिन्न राज्यों के उद्यमी, निर्माता, तकनीकी सेवा प्रदाता, खरीदार, निवेशक और वित्तीय संस्थान भाग ले रहे हैं। आयोजकों ने एक्सपो से 750 से 1000 करोड़ रुपये तक के संभावित कारोबारी अवसर बनने की उम्मीद जताई है। इसमें एमएसएमई को नए बाजार, तकनीकी साझेदारी, वित्त और कारोबारी गठजोड़ के अवसर मिलने की बात कही गई है।
खेती से उद्योग तक बनेगी नई कड़ी
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार की खाद्य प्रसंस्करण नीति के तहत उद्योग लगाने वालों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं और आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने युवाओं से इन योजनाओं का लाभ लेकर खुद उद्यम शुरू करने और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने की अपील की। मौर्य ने एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) की तर्ज पर स्थानीय खाद्य उत्पादों और व्यंजनों को बाजार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही। सरकार के अनुसार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में मेगा फूड पार्क, कोल्ड-चेन और एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर के जरिए आपूर्ति शृंखला मजबूत करने पर भी काम हो रहा है।
पेठे और पेड़े से दुनिया तक पहुंचेगा यूपी का स्वाद
आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने आगरा के पेठे और मथुरा के पेड़े का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई स्थानीय स्वाद पहले से अपनी पहचान बना चुके हैं। अब जरूरत बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने की है, ताकि ऐसे उत्पाद देश के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी जगह बना सकें।
कानपुर में भी खाद्य प्रसंस्करण का दायरा बढ़ा
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने खाद्य प्रसंस्करण को रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं वाला बड़ा क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि कानपुर में नमकीन, बिस्कुट, खाद्य तेल, शहद, फलों के रस समेत कई खाद्य उत्पादों की इकाइयां पहले से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक कई उद्यमी स्थानीय कृषि उत्पादों को खरीदकर उन्हें तैयार खाद्य पदार्थों में बदल रहे हैं। इससे किसानों की उपज को बाजार मिलता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होता है। अग्रवाल ने कहा कि कानपुर की औद्योगिक पहचान को खाद्य प्रसंस्करण से जोड़कर छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
रोज एक करोड़ रुपये की सहायता का दावा
खाद्य प्रसंस्करण विभाग के विशेष सचिव राज कमल यादव ने दावा किया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रतिदिन करीब एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दे रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उद्यमियों की संख्या बढ़ती है तो सरकार सहायता का दायरा भी बढ़ाने के लिए तैयार है। भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक दीपेश राज ने कहा कि पात्र उद्यमियों को 10 करोड़ रुपये तक बिना संपत्ति गिरवी रखे ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा है। उनके अनुसार ऋण प्रक्रिया में कागजी कार्रवाई कम करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
90 लाख एमएसएमई का आधार
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नीतियों के कारण निवेश का माहौल तैयार हुआ है और देश-विदेश के निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने प्रदेश में करीब 90 लाख एमएसएमई इकाइयों को विभिन्न प्रकार का सहयोग दिए जाने की बात कही। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 90 लाख एमएसएमई का आधार मौजूद है। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए विशेष प्रोत्साहन और सहायता का भी उल्लेख किया तथा युवाओं से सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाकर उद्योग स्थापित करने और रोजगार सृजन में भागीदार बनने का आह्वान किया। श्रम विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. शन्मुगसुंदरम एमके ने भी उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। आईआईए की ओर से कहा गया कि यह आयोजन केवल खाद्य उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, वित्त, ब्रांडिंग, बाजार और नए कारोबार मॉडल को समझने का मंच भी है।


